कहीं आप चांदी के नाम पर जर्मन सिल्वर तो नहीं खरीद रहे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Mar 2017 6:54 AM

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10-30 के आइटम बेचे जा रहे ‍Rs 300 तक सुबोध कुमार नंदन पटना : सोने के आभूषण की शुद्धता लेकर अक्सर लोगों की शिकायत सुनने को मिलती है. लेकिन, चांदी के आभूषण में भी कम खेल नहीं है. इसका पता लोगों को तब चलता है, जब चांदी के पुराने आभूषण बेचने जाते हैं और ज्वेलर […]

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10-30 के आइटम बेचे जा रहे ‍Rs 300 तक
सुबोध कुमार नंदन
पटना : सोने के आभूषण की शुद्धता लेकर अक्सर लोगों की शिकायत सुनने को मिलती है. लेकिन, चांदी के आभूषण में भी कम खेल नहीं है. इसका पता लोगों को तब चलता है, जब चांदी के पुराने आभूषण बेचने जाते हैं और ज्वेलर उसे जर्मन सिल्वर बताता है. इन दिनों जर्मन सिल्वर को चांदी का आभूषण बता कर बेचने का खेल शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की ज्वेलरी दुकानों में खुलेआम चल रहा है.
ज्वेलर्स इसमें जम कर मुनाफा कमा रहे हैं. लगन के मौके पर चांदी की पायल, चाबी रिंग, बिछिया, कीया, सिंदूरदानी, चैन,पान पत्ता, मछली अादि की मांग सबसे अधिक होती है. इस दौरान यह खेल बढ़ जाता है.
सर्राफा संघ भी मानते हैं कि चांदी के नाम पर खेल हो रहा है. सामान्य तौर पर जर्मन सिल्वर और चांदी के बीच कोई अंतर नहीं दिखता. जर्मन सिल्वर के बने आभूषण मुख्य रूप से कोलकाता, राजकोट, अहमदाबाद, आगरा तथा मथुरा से आते हैं. पटना में इसका सबसे बड़ा बाजार बाकरगंज है, जहां तीन दर्जन से अधिक ज्वेलर्स के थोक विक्रेता जर्मन सिल्वर के बने गहने के कारोबार से जुड़े हैं. इसके अलावा मच्छरहट्टा तथा चूड़ी बाजार में जर्मन सिल्वर के बने गहने थोक भाव में बेचे जाते हैं.
50 रुपये की ज्वेलरी की बिक्री 500 रुपये में
जर्मल सिल्वर व्हाइट मेटल होता है, जो बाजार में 70 से 80 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध होता है. इसका इस्तेमाल मुख्यत: आर्टिफिशियल ज्वेलरी के निर्माण में होता है. जर्मन सिल्वर की 50 रुपये की ज्वेलरी काे चांदी बता कर 400 से 500 रुपये तक में बड़ी आसानी से बेचा जा रहा है.
मध्यम व छोटे दुकानदार अधिक कर रहे उपयोग
आभूषण दुकानदारों ने बताया कि जर्मन सिल्वर को चांदी के नाम गहने बेचने वाले मध्यम व छोटे दुकानदार हैं. इसका शिकार वो लोग होते हैं, जो भाव को लेकर मोल तौल करते हैं. दुकानदारों की मानें तो दुकानदार ग्राहकों को खोना नहीं चाहता है तो वैसे परिस्थिति में ऐसा करना दुकानदारों की मजबूरी हाे जाती है.
ऐसे पहचानें असली हॉलमार्क
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) वह संस्था है, जो उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराये जा रहे गुणवत्ता स्तर की जांच करती है. यदि सोना-चांदी के गहने हॉलमार्क हैं तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है. हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने-चांदी की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वेलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है.
ऐसे बचें ठगाने से
जर्मन सिल्वर की पहचान कसौटी पर परख कर ही की जा सकती है. ज्वेलरी विशेषज्ञ भरत मेहता के मुताबिक ग्राहक को बाजार के भाव से दुकानदार अगर कम कीमत पर चांदी का आभूषण दे, तभी सतर्क हो जाएं. कोई भी दुकानदार बाजार से कम दर पर चांदी नहीं बेच सकता. वैसे इसकी पहचान के लिए चांदी के आभूषण को कसौटी पर रगड़ कर देखें. अगर रगड़ने पर रंग निकलने लगे, तो समझिए कि वह असली चांदी नहीं है.
दाम में भारी अंतर
शुद्ध चांदी के गहने
बिछिया Rs 200-300 जोड़ा 03 ग्रा
कीया Rs 500 – 700 में 10 ग्रा
पायल Rs 1100 में 20 ग्राम
चाबी रिंग Rs 1100 में 20 ग्राम
जर्मन सिल्वर
बिछिया Rs 10 – 30 प्रति जोड़ा
कीया Rs 15 – 40
पायल Rs 75 – 150
चाबी रिंग Rs 25 – 75
जानकार और अधिकारी बोले
ग्रामीण व अर्ध शहरी इलाकों से आनेवाले कई ग्राहकों के चांदी के आभूषणों में जर्मन सिल्वर पाया जाता है. टेस्टिंग मशीन से जांच में इसका पता लगता है.
धीरज कुमार, नवरत्न ज्वेलर्स एंड ब्रदर्स, बोरिंग रोड
कुछ दुकानदार ऐसा करते हैं. ऐसा खेल मुख्य रूप से उन ग्राहकों के साथ होता है, जो मोल-तोल करते हैं, इस ठगी से बचने के लिए बाजार का भाव देखंे.
विनोद कुमार, अध्यक्ष, पाटलिपुत्र सर्राफा संघ
जर्मन ज्वेलरी की बिक्री पर रोक नहीं है. पर, कोई दुकानदार जर्मन ज्वेलरी को चांदी का बता कर बेचता है, तो गलत है. ग्राहक की शिकायत पर कार्रवाई हो सकती है.
गोपाल प्रसाद सिंह, अनुभाग अधिकारी, मानक ब्यूरो
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