भाजपा ने नीतीश सरकार के रिपोर्ट कार्ड को नकारा

Published at :21 Nov 2016 10:10 PM (IST)
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भाजपा ने नीतीश सरकार के रिपोर्ट कार्ड को नकारा

पटना : बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने नीतीश कुमार सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेश सरकार द्वारा आज जारी रिपोर्ट कार्ड को नकारते हुए आज आरोप लगाया कि कोई खास उल्लेखनीय उपलब्धियां नहीं होने की वजह से रेल हादसे के बहाने रिपोर्ट कार्ड को जारी करने से टाल दिया. […]

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पटना : बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने नीतीश कुमार सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेश सरकार द्वारा आज जारी रिपोर्ट कार्ड को नकारते हुए आज आरोप लगाया कि कोई खास उल्लेखनीय उपलब्धियां नहीं होने की वजह से रेल हादसे के बहाने रिपोर्ट कार्ड को जारी करने से टाल दिया.

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि कोई खास उल्लेखनीय उपलब्धियां नहीं होने की वजह से पहले तो महागठबंधन सरकार ने रेल हादसे के बहाने रिपोर्ट कार्ड को जारी करने से टाल दिया. फिर दूसरे दिन चुपके से जारी कर जनता को झांसा देने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से उठाए गये उन तमाम सवालों का जवाब देना सरकार ने मुनासिब नहीं समझा जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं.

सुशील मोदी ने कहा कि रिपोर्ट कार्ड में सरकार को बताना चाहिए था कि सत्ताधारी दल के उन दर्जन भर विधायकों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई जिनके काले कारनामों से पूरे देश में बिहार को शर्मसार होना पड़ा है. पूरे बिहार में कोहराम मचाने वाले अपराधियों पर नकेल कसने में सरकार क्यों विफल रही.

भाजपा नेता ने कहा कि कानून के राज का दावा करने वाली सरकार बताये कि जेल-बेल और बचाने-फंसाने का खेल क्यों जारी रहा. भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति पर अमल का दावा करने वाली सरकार को बताना चाहिए पिछले एक साल में बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के तहत कितने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर उनकी सम्पति जब्त कर उनमें स्कूल खोला गया. रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गये कितने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई हुई तथा आय से अधिक संपति के कितने मामले दर्ज किये गये.

सुशील मोदी ने पूछा कि तामझाम से लागू कियेगये कृषि रोड मैप का क्या हुआ. 18 विभागों को मिला कर गठित कृषि कैबिनेट क्यों भंग कर दी गयी. स्वास्थ्य व शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गठित मानव विकास मिशन का क्या हुआ. जब नयी औद्योगिक नीति के अन्तर्गत उद्योगों व निवेशकों को दी जाने वाली सारी रियायतों व अनुदानों को खत्म कर दिया गया है तो फिर औद्योगिक प्रोत्साहन व निवेश को बढावा कैसे दी जायेगी.

उन्हाेंने कहा कि मुख्यमंत्री चापाकल नगर विकास और ग्रामोदय योजनाओं को क्यों बंद कर दिया गया. बैंकों की शिक्षा ऋण योजना को स्टूडेंड क्र्रेडिट कार्ड का नया नाम देकर क्या छात्रों को झांसा देने की कोशिश नहीं की गयी है. क्या छात्रों को वाई फाई शैक्षिक कैम्पस का तब तक कोई लाभ मिल पायेगा जब तक कि उनके पास लैपटॉप नहीं होगा. क्या इस रिपोर्ट कार्ड को चुपके से जारी कर सरकार ने यह स्वीकार नहीं कर लिया है कि सभी मोर्चो पर वह बुरी तरह से विफल है.

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