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PM मोदी को जदयू नेता ने लिखी खुली चिट्ठी, पढ़कर रह जायेंगे दंग

Updated at : 27 Oct 2016 4:17 PM (IST)
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PM मोदी को जदयू नेता ने लिखी खुली चिट्ठी, पढ़कर रह जायेंगे दंग

पटना : राजधानी पटना के गांधी मैदान में आज ही के दिन तीन साल पहले 27 अक्तूबर 2013 को बम ब्लास्ट हुआ था. गांधी मैदान में उस वक्त पीएम मोदी की हुंकार रैली आयोजित थी, जिसमें लगातार बम धमाके हुए. तीन साल बीत जाने के बाद एक बार फिर वह मामला बिहार की सियासत में […]

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पटना : राजधानी पटना के गांधी मैदान में आज ही के दिन तीन साल पहले 27 अक्तूबर 2013 को बम ब्लास्ट हुआ था. गांधी मैदान में उस वक्त पीएम मोदी की हुंकार रैली आयोजित थी, जिसमें लगातार बम धमाके हुए. तीन साल बीत जाने के बाद एक बार फिर वह मामला बिहार की सियासत में गूंजने लगा है. सीरियल बम धमाके की तीसरी बरसी पर पटना में जगह-जगह बैनर और पोस्टर दिख रहे हैं. जिसमें प्रधानमंत्री को बम बलास्ट में मारे गये लोगों के परिजनों को आश्वासन देते दिखाया गया है. साथ ही पीड़ित के परिजन कह रहे हैं कि इंतजार कब तक.

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

इतना ही नहीं मामले को लेकर जदयू प्रवक्ता सह विधान पार्षद नीरज कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. नीरज कुमार ने लिखा है-आदरणीय प्रधानमंत्री जी, दिनांक, 27 अक्टूबर 2013 दिन रविवार कृष्ण पक्ष अष्टमी, नक्षत्र पुष्य, योग साध्य, ऋतु हेमंत को पटना के गांधी मैदान में आपकी पार्टी द्वारा हुंकार रैली का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में दुखद आतंकी घटना हुई थी. जिसमें आपके 6 राजनीतिक शुभचिंतक की दुखद मौत हुई थी. राज्य पुलिस ने 48 घंटे के अंदर आतंकियों के स्लीपर सेल को तोड़ दिया था एवं भाजपा शासित प्रदेश छत्तीसगढ़ के रायपुर से आतंकियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की थी.

वायदा भूल जाने का लगाया आरोप

नीरज कुमार ने पत्र में आगे लिखा है कि – इस आतंकी घटना पर आपने 2 नवंबर 2013 दिन शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलकर शोक प्रकट करते हुए नौकरी एवं परवरिश का वादा किया था. जिसे आपने राजनीतिक रूप सेसांत्वना यात्रा घोषित किया था. वादा करने के समय आप भाजपा संसदीय दल के नेता थे. अब तो आप देश के माननीय प्रधानमंत्री बन गये हैं. आपने पीड़ित परिवारों से नौकरी एवं परवरिश का वादा किया था. मैं आश्चर्यचकित हूं कि बाबा रामदेव का राजनैतिक बूटी तो आपने सत्ता के लिए ग्रहण कर लिया लेकिन स्मरण शक्ति के लिए उनके द्वारा बनाए गए मेधा बूटी का नियमित इस्तेमाल करने के बावजूद आपने पीड़ित परिवार की ढ़ाई वर्ष बीत जाने के बावजूद सुध नहीं लिया. आपने एक अबला नारी प्रिया श्रीवास्तव गोपालगंज को तो अपनी बेटी मानकर गुजराती में बात करने का स्वांग भी किया था लेकिन राजनैतिक लाभ के बाद बेटी एवं राज्य की गुजराती भाषा के साथ भी छल किया एवं महादलित स्वर्गीय भरत रजक के परिवार से मिलना भी आपने नागवार समझा.

पीएम को बताया पुरुषार्थहीन

नीरज कुमार ने पत्र में पीएम मोदी को याद दिलाते हुए लिखा है कि आपको स्मरण दिलाना आवश्यक है कि पूरा देश हमारी सेना पर गर्व करता है. आपने गौरीचक पटना के मृतक राजनारायण सिंह के बेटे जो श्रीनगर में सेना में कार्यरत मनोज सिंह एवं उनकी मां रमापति देवी से किये गए वादे को भी भुला दिया. यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश में आतंकी घटना पर राजनीति करने का कुसंस्कार आपने पूरे देश की जनता के सामने पेश किया जबकि आप गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं जहां आपके कार्यकाल में 17 सीरियल ब्लास्ट की घटनाएं हुई जिसमें पीड़ित परिवारों की आपने परवरिश एंव नौकरी का कोई लाभ नहीं दिया. ऐसे में आपने महज वोट के लिए बिहार में यह राजनैतिक महापाप क्यों किया ? देश के करोड़ों नौजवानों को नौकरी देने का आपने वादा किया हलांकि रोजगार के अवसर को ही आपने कम कर दिया जिसका खामियाजा बिहार समेत पूरे देश के नौजवान भुगत रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में आतंकी घटना में पीड़ित मात्र 6 परिवार को आपने वादों के अनुसार रोजगार उपलब्ध न कराकर पुरुषार्थहीन होने का परिचय दिया है.

पीड़ितों की भेजी लिस्ट

नीरज कुमार ने पीएम मोदी पर तंज करते हुए लिखा है कि आप देश के संवैधानिक पद पर आसीन देश के प्रधानमंत्री हैं, इसी कारण मैंने आपको आपके वादों को याद दिलाया है क्योंकि सर्वोच्च पद पर बैठा हुआ व्यक्ति अपने दल के समर्थक परिवार को न्याय नहीं दिला सकता तो देश का लोकतंत्र एवं नेता की विश्वसनीयता खत्म हो जायेगी. नीरज कुमार ने उस बम विस्फोट में मारे गये लोगों की सूची और स्थान का नाम भी संलग्न किया है.

1- राजनारायण सिंह, ग्राम कमरगी, प्रखंड गौरीचक, जिला पटना, समय दिन के 9.52 मिनट
2- विकास सिंह, रामपुर निमिया, कैमूर, समय 11 बजे
3- बिंदेश्वरी चौधरी, बरियारपुर, बेगूसराय, समय 1.45 मिनट
4- राजेश कुमार, परनामा, नालंदा, समय 2.30
5- मुन्ना श्रीवास्तव, गोपालगंज (पीड़ित परिजनों से नहीं हुई मुलाकात)
6- भरत रजक, सुपौल (पीड़ित परिजनों से नहीं हुई मुलाकात)

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