गंगा की गाद से डॉल्फिन के अस्तित्व पर भी खतरा
Author Prabhat khabar digital desk
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अनुपम कुमारी पटना : गंगा में बढ़ता प्रदूषण न केवल मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं पर भी असर डाल रहा है. बढ़ती गाद के कारण गंगा की गहराई दिनों-दिन घटती जा रही है. ऐसे में गंगा की डॉल्फिन पर भी संकट आ गया है. यदि जल्द गंगा को गाद की […]
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अनुपम कुमारी
पटना : गंगा में बढ़ता प्रदूषण न केवल मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं पर भी असर डाल रहा है. बढ़ती गाद के कारण गंगा की गहराई दिनों-दिन घटती जा रही है. ऐसे में गंगा की डॉल्फिन पर भी संकट आ गया है. यदि जल्द गंगा को गाद की समस्या से निजात नहीं दिलायी गयी, तो कुछ समय में गंगा को स्वच्छ रखने वाली डॉल्फिन का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा. गंगा नदी में पाये जाने वाले डॉल्फिनों की संख्या करीब 2500 है. वहीं, पूरी रेंज बांग्लादेश, ब्रह्मपुत्र अरैर नेपाल मिलाकर इनकी संख्या करीब 3500 है. नेपाल में करीब 50, बांग्लादेश में 550 और ब्रह्मपुत्र में करीब 500 से 600 डाल्फिन हैं. ऐसे में डॉल्फिनों की रक्षा के लिए जल्द से जल्द गंगा को गाद मुक्त बनाना होगा.
गांधी घाट की गहराई आठ फुट रह गयी : डॉल्फिन मैन के नाम से जानेवाले पटना विवि के डॉ आरके सिन्हा ने बताया कि गांधी घाट की गहराई पहले जहां 35 फुट हुआ करती थी, आज यह घट कर आठ से 10 फुट तक हो गयी है. इतना ही नहीं गंदे जल में वैसे जलीय जीव जंतु सर्वाइब नहीं कर पायेंगे, जिनका शिकार बड़े जीव जंतु करते हैं. ऐसे में डॉल्फिन का शिकार भी धीरे-धीरे समाप्त हो जायेगा. साथ ही गंगा की गहराई घटने से उसका प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है, जो डॉल्फिन के लिए अनुकूल नहीं है. क्योंकि, डॉल्फिन गहराई और छिछले पानी में पायी जाती है. डॉ सिन्हा ने इस संबंध में राज्य सरकार को मौखिक रूप से सूचना दे दी है.
इन कारणों से समस्या: हिमालय में वनों की कटाई और दियारे के वनों की कटाई के बाद तेजी से हो रहे भू-क्षरण ने गंगा को पूरी तरह से गाद युक्त बना दिया है. इसके अलावा बिना ट्रिटमेंट के सीवरेज के पानी को सीधे गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है. मानव क्रिया-कलापों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण गंगा अविरल नहीं होकर मंद हो गयी है.
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