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बिहार में बाढ़ का कहर : 22 से अधिक की माैत, सीएम नीतीश ने कहा- राहत में कोई कोताही बरदाश्त नहीं

Updated at : 29 Jul 2016 7:06 AM (IST)
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बिहार में बाढ़ का कहर : 22 से अधिक की माैत, सीएम नीतीश ने कहा- राहत में कोई कोताही बरदाश्त नहीं

नीतीश ने किया हवाई सर्वेक्षण : नेपाल की तराई में भारी वर्षा के कारण उत्तर बिहार के 10 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है. बाढ़ से अब तक 22 से अधिक की माैत हो चुकी है. लगभग 18 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आ गये हैं. पटना/पूर्णिया : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार […]

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नीतीश ने किया हवाई सर्वेक्षण : नेपाल की तराई में भारी वर्षा के कारण उत्तर बिहार के 10 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है. बाढ़ से अब तक 22 से अधिक की माैत हो चुकी है. लगभग 18 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आ गये हैं.
पटना/पूर्णिया : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. सुबह नौ बजे उन्होंने गंगा व गंडक में आयी बाढ़ से ग्रस्त वैशाली, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज व सारण का हवाई सर्वेक्षण किया. उन्होंने नेपाल में लगातार बारिश से गंडक क्षेत्र में बढ़े जलप्रवाह का जायजा लिया.
इसके बाद दोपहर 1:25 बजे से शाम तीन बजे तक उन्होंने कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जिलों के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया. इस दौरान उन्होंने महानंदा, कोसी, कनकई, रेतुआ, परमान, मेची, बकरा नदियों में आयी बाढ़ से तबाही को देखा. हवाई सर्वेक्षण से लौटने के बाद पूर्णिया एयरपोर्ट पर उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की और राहत व बचाव कार्य को लेकर निर्देश दिये.
मुख्यमंत्री की दिन भर की व्यस्तता के चलते गुरुवार की शाम पूर्व निर्धारित कैबिनेट की बैठक टालनी पड़ी. मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण के दौरान जो कुछ देखा, उस बाबत अधिकारियों को जानकारी दी और उनसे वस्तुस्थिति का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि बाढ़ से जो भी पीड़ित हैं, उन्हें हर हाल में राहत पहुंचायी जाये. चेतावनी भी दी कि इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बरदाश्त नहीं की जायेगी.
मुख्यमंत्री ने सभी पीड़ित परिवारों को तुरंत सूखा राशन और जहां पके हुए भोजन की व्यवस्था की जा सकती है, वहां सामूहिक किचेन चला कर पका पकाया भोजन देने का निर्देश दिया. उन्होंने जिन गांवों का संपर्क टूट गया है, उन सभी गांवों में नावों के माध्यम से तत्काल संपर्क स्थापित कराने का भी निर्देश दिया. बाढ़ग्रस्त सभी जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के माध्यम से राहत का वितरण सुनिश्चित करने व चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का टास्क दिया. लगभग डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी ने बताया कि किशनगंज जिले में जल स्तर घटता जा रहा है, जबकि पूर्णिया और अररिया में स्थिति गंभीर बनी हुई है.
मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी मौजूद थे. शाम लगभग पांच बजे मुख्यमंत्री हवाई जहाज से पटना के लिए प्रस्थान कर गये.
कटिहार में उतरी सेना, भागलपुर, सुपौल व पूर्णिया में डूबने से सात लोगों की मौत
भागलपुर/बगहा : बाढ़ की स्थिति और गंभीर होती जा रही है. कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा व भागलपुर के हजारों गांवों में बाढ़ पानी फैलने से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. कटिहार के कदवा में बांध काटने के बाद नये इलाके में तेजी से पानी फैल रहा है. गंभीर स्थिति को देखते हुए सेना के 200 जवानों को राहत व बचाव कार्य में लगाया गया है. एसडीआरएफ की टीम पहले से ही बचाव कार्य में लगी है.
गुरुवार को भागलपुर के पीरपैंती में दो, पूर्णिया में तीन व सुपौल में दो की डूबने से मौत हो गयी. पूर्णिया के अमौर में बाढ़ राहत कार्य का जायजा लेने के लिए निकले मुखिया की नाव पलट गयी. स्थानीय लोगों के सहयोग से सभी को बाहर निकाला गया. सहरसा के नवहट्टा में बाढ़ग्रस्त इलाके का
दौरा कर लौटने के दौरान कोसी की तेज धार में सीओ व अन्य अधिकारियों की नाव फंस गयी. चालक की सूझबूझ से नाव को सुरक्षित एकाढ़ घाट पर लाया गया. गोपालगंज में सुबह आठ बजे सिपाया स्थित रिंग बांध टूट गया. वहीं, बगहा शहर पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. गंडक का पानी सुरक्षा बांध तोड़ कर बुधवार की देर रात दर्जनों मुहल्लों में प्रवेश कर गया.
कटिहार में बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है. बुधवार को बेलगच्छी-झौआ-महानंदा के दायां तटबंध को कुरसेला व कचोरा के बीच बिंदाबाड़ी गांव के पास काटे जाने के बाद गुरुवार को बाढ़ का पानी कदवा, डंडखोरा व प्राणपुर प्रखंड के सैंकड़ों गांवों में प्रवेश कर गया. इन प्रखंडों से जिला मुख्यालय व पश्चिम बंगाल से सड़क संपर्क भी भंग हो गया है. सेना के जवानों ने अब तक 400 से अधिक बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकाला है.
किशनगंज में मीरभिट्टा पुल, पवना पुल पर पानी का दबाव होने के बाद प्रशासन ने एनएच 327इ पर बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दिया है. इसके अलावा किशनगंज-बहादुरगंज पथ पर भी मौजाबाड़ी पुल पर दबाव के कारण वाहनों का आवागमन बंद है. बाढ़ के कहर से कोढ़ोबाड़ी थाना का संपर्क दिघलबैंक प्रखंड मुख्यालय से टूट गया है. सिंघीमारी-तालगाछ रोड के ऊपर पानी बह रहा है.
पूर्णिया के अमौर अमौर प्रखंड क्षेत्र से होकर बहनेवाली महानंदा, कनकई, दास, परमान व बकरा नदियों के जल स्तर में वृद्धि का गुरुवार को भी जारी रहा. करीब एक सप्ताह से फैले बाढ़ के कारण कई कच्चे व पक्के मकान अब गिरने लगे हैं.
एनएच-31 से पानी उतरते ही बायसी प्रखंड के चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देता है. लोग एनएच या फिर विद्यालयों में बने शिविरों में पनाह लिए हुए है. अररिया में गुरुवार को बाढ़ पीड़ितों ने शहर से गुजरने वाले एनएच-57 को स्टेशन जाने वाली सड़क के पास जाम कर दिया. वहीं नरपतगंज में सुरसर के पास बाढ़ पीड़ितों ने बथनाहा-बीरपुर मार्ग को जाम कर प्रदर्शन किया. सभी जगहों पर बाढ़ पीड़ितों का यही कहना था कि जिस तरह प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों को राहत मुहैया कराने में प्रयास करना चाहिए, वह नहीं हो रहा है.
सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में कोसी के कटाव से बागेवा गांव का अस्तित्व खतरे में है. अब तक ढाई दर्जन से अधिक घर नदी में विलीन हो चुके हैं. वहीं, मधेपुरा में सुरसर नदी का तांडव जारी है. सुपौल के सैकड़ों गांवों में लोगों का जन जीवन अस्त-व्यस्त है.
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