सुप्रीम कोर्ट ने बिहार से सड़क दुर्घटनाओं पर मांगी रिपोर्ट
Updated at : 07 Jul 2016 7:35 AM (IST)
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पटना : सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा कमेटी ने यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामले में बिहार सरकार से रिपोर्ट मांगी है. यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामले में की जा रही कार्रवाई का ब्योरा उपलब्ध कराने के लिए लिखा है. देश में सड़क दुर्घटना व उससे होनेवाली मौत […]
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पटना : सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा कमेटी ने यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामले में बिहार सरकार से रिपोर्ट मांगी है. यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामले में की जा रही कार्रवाई का ब्योरा उपलब्ध कराने के लिए लिखा है. देश में सड़क दुर्घटना व उससे होनेवाली मौत की संख्या में वृद्धि पर सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता व्यक्त की है.
इसके लिए सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए बनायी गयी कमेटी द्वारा सड़क परिवहन को सुरक्षित बनाने हेतु दिशा-निर्देश व राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा करना है. सड़क सुरक्षा कमेटी ने दुर्घटनाओं के कारण का पता लगाने व उससे संबंधित की जा रही कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी है. देश में घातक दुर्घटनाओं में विगत दस साल में छह फीसदी वृद्धि हुई है. बिहार भी इस मामले में पीछे नहीं है. बिहार में वर्ष 2014 की अपेक्षा वर्ष 2015 में घातक दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई. राज्य में वर्ष 2014 में 4913 व 2015 में 5421 लोगों की जान गयी.
सड़क दुर्घटना में एनएच पर 28़ 2 फीसदी, स्टेट हाइवे पर 25़ 2 फीसदी व अन्य मार्ग पर 46़ 6 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं होती है. सड़क दुर्घटना के कारण में अधिकतर ड्राइवर की गलती, गति सीमा का पालन नहीं, ओवरलोड को माना जाता है.
सड़क सुरक्षा कमेटी ने सड़क सुरक्षा को लेकर जिले में नियमित बैठक नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की है. इस बाबत परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा को लेकर नियमित बैठक करने के लिए सभी डीएम को लिखा है. जिले में सड़क सुरक्षा समिति की तीन माह पर बैठक कर सड़क सुरक्षा के उपायों पर विचार-विमर्श करना है.
राज्य में बनी सड़क सुरक्षा नीति
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार ने पिछले साल सड़क सुरक्षा नीति बनायी. सड़क सुरक्षा नीति के एक्शन प्लान में सड़क सुरक्षा को लेकर संबंधित विभाग को टास्क सौंपा गया. सड़क सुरक्षा नीति का उद्देश्य सड़क दुर्घटना में मृत्यु की वास्तविक संख्या में कमी लाना, सड़क के आधारभूत संरचना के विकास में सुरक्षा डिजाइन, शिक्षा, आपात देखभाल, दुर्घटना सूचना प्रणाली विकसित करना आदि शामिल है.
साल घातकदुर्घटना सड़कदुर्घटना मौत घायल
2010 4513 11033 5137 8106
2011 4676 10673 5090 7083
2012 4706 10320 5056 7142
2013 4612 10200 5061 5232
2014 4505 9556 4913 6640
2015 4771 9555 5421 6835
कमेटी ने सात बिंदुओं बिना हेलमेट, ओवर स्पीडिंग, खतरनाक ड्राइव, रेड लाइट जंपिंग, बिना सीट बेल्ट, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग व ओवरलोडिंग के मामले में की जा रही कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है. कमेटी ने कहा है कि इन मामले में कितने वाहनों की जांच हुई. उससे कितना जुर्माना वसूल हुआ. नियम तोड़नेवाले कितने लोगों का लाइसेंस निलंबित और रद्द किया गया है
सड़क सुरक्षा कमेटी के निर्देश के बाद परिवहन विभाग ने सभी जिले से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है. इस बाबत विभागीय प्रधान सचिव ने सभी डीएम, एसपी व डीटीओ पर पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि जिले में पदस्थापित वरीय पुलिस पदाधिकारी, थानाध्यक्ष को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा के तहत कार्रवाई का अधिकार है. पुलिस पदाधिकारियों को की गयी कार्रवाई के बारे में प्रत्येक माह रिपोर्ट देना है.
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