Exclusive : पटना के लोगों को अगले माह से मिलेगी 5G की सुविधा, अन्य जिलों में 2023 तक होगी शुरू

बिहार को 5जी मोबाइल तकनीक से लैस करने के लिए दूरसंचार मंत्रालय और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं. मुख्य तौर पर लेटेन्सी (मोबाइल डेटा को एक से दूसरी जगह ले जाने में लगने वाला समय) को कम करने के लिए काम किया जा रहा है. इसके लिए हर मोबाइल टावर को फाइबर से जोड़ने पर फोकस है.
सुबोध कुमार नंदन, पटना: पटना में 5जी सर्विस दिसंबर के अंत में शुरू होगी. वहीं, नये साल में गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में सेवा शुरू होगी. रिलायंस जियो इसकी तैयारी कर रही है, जबकि एयरटेल का फोकस पटना पर है. इसी आधार पर मोबाइल ऑपरेटर तैयारी में जुटे हैं. इसके बाद दरभंगा, सीवान, बेगूसराय, गोपालगंज, सासाराम, मुंगेर का नंबर आयेगा. हालांकि, 2023 तक सूबे के सभी शहरों में 5जी की सेवा पूरी तरह चालू हो जायेगी.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री ने दूरसंचार विभाग और ऑपरेटर्स को तेजी से काम करने के निर्देश दिये थे. कंपनी के सूत्रों की मानें, तो कि दिसंबर अंत तक पटना जिले में 5जी नेटवर्क के सिग्नल मिलने लगेंगे. जियो सूबे में चरणबद्ध तरीके से रोलआउट कर रही है.
सूबे में 5जी सर्विस लॉन्चिंग के बाद, जियो यूजर्स को जियो वेलकम ऑफर का आमंत्रण मिलना शुरू हो जायेगा. इस ऑफर के तहत ग्राहकों को अनलिमिटेड 5जी डेटा और एक जीबीपीएस तक की स्पीड मिलेगी. इसके लिए उन्हें कोई कीमत नहीं चुकानी होगी.
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5जी नेटवर्क इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) के सात सबसे तेज डेटा नेटवर्क का फ्यूजन होगा.
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इंटरनेट ऑफ थिंग्स मतलब है चीजों का इंटरनेट. अब तक फेसबुक, वाट्सएप, यूट्यूब के जरिये हम एक-दूसरे से कनेक्ट हैं, लेकिन आइटी के जरिये दूसरी चीजों से भी कनेक्ट हो जायेंगे.
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सामान्य दैनिक जीवनचर्या की जिंदगी में उपयोग किये जाने वाले टीवी, फ्रिज, एसी, लाइट, पंखा, कम्प्यूटर, कार जैसी वस्तुएं हैं, जो एक-दूसरे से डेटा शेयर करेंगे.
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जैसे आपके पास एक कार है और वह इंटरनेट से कनेक्ट है. अगर कार के किसी पार्ट में खराबी आती है, तो कार स्वतः ही मैन्युफैक्चर को केयर का डेटा भेज देगी.
बिहार को 5जी मोबाइल तकनीक से लैस करने के लिए दूरसंचार मंत्रालय और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं. मुख्य तौर पर लेटेन्सी (मोबाइल डेटा को एक से दूसरी जगह ले जाने में लगने वाला समय) को कम करने के लिए काम किया जा रहा है. इसके लिए हर मोबाइल टावर को फाइबर से जोड़ने पर फोकस है. इसके बाद लेटेन्सी 10 मिली सैकंड से घटकर मिली सैकेंड हो जायेगी यानी इंटरनेट स्पीड इतनी तेज होगी कि लाइव प्रसारण मोबाइल या टीवी तक पहुंचने में किसी तरह का कोई अंतर नहीं रहेगा. सब कुछ रियल टाइम होगा.
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इंटरनेट स्पीड 20 से 100 गुना तेज (1000 एमबीपीएस तक होगी.
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घर के सभी स्मार्ट डिवाइस को फोन से कनेक्ट कर बाहर से कंट्रोल कर सकेंगे.
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एक साथ कई यूजर्स जुड़ने पर भी इंटरनेट की रफ्तार कम नहीं होगी.
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तेज रफ्तार इंटरनेट से रोबोट, ड्रोन और ऑटोमैटिक वाहनों का संचालन काफी आसान होगा.
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20 हजार से ज्यादा टावर हैं और मौजूदा टावर को ही अपग्रेड किया जा रहा है.
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स्टैंड-अलोन 5जी आर्किटेक्चर नेटवर्क, जिसकी 4जी नेटवर्क पर निर्भरता शून्य है.
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700 मेगाहर्ट्ज, 3500 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम का सबसे बड़ा और बेहतरीन मिश्रण है.
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कैरियर एग्रीगेशन तकनीक का उपयोग करके जियो इन 5जी फ्रीक्वेंसी का एक मजबूत डेटा हाइवे तैयार करती है.
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इन जगहों पर रिलायंस जियो अपनी सर्विस शुरू कर चुका है.
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