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पहले टिकट बांटते थे, अब खुद मुहताज

Updated at : 07 Oct 2015 2:28 AM (IST)
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पहले टिकट बांटते थे, अब खुद मुहताज

नाराजगी : वरिष्ठ नेताओं के परिजनों को नहीं िमला टिकट, हर पार्टी की कमोबेश यही स्थिति निर्भय पटना : बिहार की राजनीति में टिकट दिलवाने के लिए जिन नेताओं के आगे पीछे भीड़ लगी रहती थी, अब उनके परिजन ही टिकट के भटक रहे हैं. ऐसे कई नेता हैं, जिन्हें उनकी पार्टी में टिकट ही […]

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नाराजगी : वरिष्ठ नेताओं के परिजनों को नहीं िमला टिकट, हर पार्टी की कमोबेश यही स्थिति
निर्भय
पटना : बिहार की राजनीति में टिकट दिलवाने के लिए जिन नेताओं के आगे पीछे भीड़ लगी रहती थी, अब उनके परिजन ही टिकट के भटक रहे हैं. ऐसे कई नेता हैं, जिन्हें उनकी पार्टी में टिकट ही नहीं मिला. वहीं, कई ने तो दूसरे छोटे दलों की ओर रुख किया और वहां से उन्हें टिकट मिल सका है. भाजपा-कांग्रेस में ऐसे कई नेता हैं, जिन्हें और जिनके परिवार को विधानसभा चुनाव में नजर अंदाज किया गया है.
भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले स्व. कैलाशपति मिश्र की पुत्र वधु (भतीजा की पत्नी) दिलमणी देवी का ब्रह्मपुर से विधानसभा का टिकट काट दिया गया है. वहां से भाजपा सांसद डाॅ सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को टिकट दिया गया है. पूर्व मंत्री चंद्रमोहन राय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे. उन्होंने पहले ही चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी. उन्हें उम्मीद थी कि उनके बेटे को टिकट मिलेगा, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया.
इसके बाद चंद्रमोहन राय ने भाजपा छोड़ दी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन का एलान भी किया. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह को पार्टी ने टिकट दे दिया, लेकिन उनके चहेतों को टिकट नहीं मिल सका. वहीं, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के बेटे को भी टिकट नहीं मिल सका.
प्रख्यात साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के बेटे पद्मपराग वेणु को भी भाजपा ने टिकट नहीं दिया. कांग्रेस में भी टिकट बंटवारे में कई नेताओं की नहीं चली और उन्हें नजरअंदाज किया गया. प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी अपनी पत्नी को टिकट नहीं दिला सके. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा और रामजतन सिन्हा को टिकट ही नहीं मिल सका.
टिकट नहीं मिलने पर रामजतन सिन्हा ने पार्टी छोड़ दी और निर्दलीय नामांकन कर दिया है. यहीं स्थित पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बेटे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार अपने चहेते को टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन नहीं मिल सका. राजद और लोजपा में भी स्थित अलग नहीं है.
राजद के कद्दावर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुनाथ झा को पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर वे दल से अलग हो गये. अब समाजवादी पार्टी के बिहार में चुनाव अभियान संभाल रहे हैं और उनके बेटे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. देव नारायण यादव के दामाद विधायक उमाकांत यादव का टिकट राजद ने काट दिया. इसके बाद वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. लोजपा प्रमुख व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के दामाद अनिल साधु दूसरों को टिकट दिलवाते थे, लेकिन इस बार उन्हें ही टिकट नहीं दिया है.
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