व्यापमं घोटाला : बिहार के 300 छात्रों ने एमपी मेडिकल कॉलेजों में लिया है एडमिशन, 25-30 लाख था रेट

पटना: व्यापमं घोटाले में बिहार के छात्र सिर्फ स्कॉलर के रूप में ही काम नहीं करते थे, बल्कि बड़े स्तर पर इस धांधली के खेल में शामिल होकर एडमिशन भी लेते थे. इस दौर में रईस परिवारों की संतानें राज्य में मौजूद इसके ‘सेटरों’ से संपर्क साध कर बड़ी आसानी से मध्य प्रदेश के किसी […]
अगर ज्यादा रुपये खर्च करके कोई अच्छा स्कॉलर के जरिये सेटिंग कर दी, तो एमपी के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर में मौजूद कई अच्छे कॉलेजों में भी आसानी से एडमिशन मिल जाता था. इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो सामान्य रेट से ज्यादा कीमत चुकानेवालों को मनपसंद कॉलेज आसानी से मिल जाता था. बिहार से लेकर एमपी के ‘रैकेटियर’ मिलजुल कर सारा खेल खेलते थे.
शुरुआती अनुमान के अनुसार बिहार के करीब 300 छात्रों ने फर्जी तरीके से मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लिया है. हालांकि इसका कोई सटीक आंकड़ा अभी तक सामने नहीं आया है. एमपी एसटीएफ की शुरुआती जांच में यह बात सामने आयी है कि 2007 से 20014 के बीच करीब दो हजार छात्रों ने फर्जीवाड़ा करके मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत अन्य कोर्सो में एडमिशन लिया है, लेकिन इनमें मेडिकल में एडमिशन लेनेवालों की संख्या सबसे ज्यादा है. 2013 में व्यापमं में 580 सीटें दूसरे राज्यों के छात्रों के लिए रखी गयी थीं. इनमें 460 सीटें पहले ही बुक हो चुकीं थीं. यानी इन सीटों पर पहले ही दलालों या सेटरों ने कब्जा जमा लिया था. जांच कर रही एजेंसियों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इन 460 सीटों में बिहार के करीब 250 छात्रों का एडमिशन एमपी के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में हुआ था.इससे पहले के वर्षो में भी एडमिशन में बड़े स्तर पर धांधली हुई है. पिछले वर्षो की रिपोर्टो की फाइलें खंगाली जा रही है.
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