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बिहार में दारोगा समेत 2446 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को झटका, हाईकोर्ट ने ज्वाइनिंग पर लगाई रोक

Updated at : 01 Dec 2021 8:39 PM (IST)
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बिहार में दारोगा समेत 2446 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को झटका, हाईकोर्ट ने ज्वाइनिंग पर लगाई रोक

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के द्वारा 2446 पदों पर बहाली मामले में पेंच फंस गया है. रिजल्ट को चैलेंज करने के मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने बहाली प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया है.

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बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने बिहार पुलिस और कारा एवं सुधार सेवाओं के अधीन दारोगा, सार्जेंट और सहायक जेल अधीक्षक के कुल 2446 पदों पर बहाली निकाली थी. हाल में ही इसका अंतिम रिजल्ट भी जारी कर दिया गया. वहीं जिन अभ्यर्थियों का चयन किया गया है वो लंबे समय से ट्रेनिंग में जाने का इंतजार कर रहे हैं. अब न्यायालय के निष्कर्ष का उन्हें इंतजार करना पड़ेगा.

2446 दारोगा परीक्षा के रिजल्ट के खिलाफ कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में केस किया था. शिकायतर्काओं का पक्ष अधिवक्ता रितिका रानी ने हाईकोर्ट में लड़ा. उन्होनें कहा कि सुधीर कुमार गुप्ता समेत 268 अभ्यर्थियों ने यह शिकायत की है कि उन्होंने एग्जाम में कट ऑफ स्कोर से अधिक नंबर के प्रश्न सही हल किये हैं. वहीं आयोग ने जब 1 अगस्त 2021 को अपने वेबसाइट पर स्कोरकार्ड अपलोड किया तो पाया गया कि करीब 236 कंडिडेट के नंबर कट ऑफ से अधिक हैं लेकिन उनका चयन नहीं हुआ.

अधिवक्ता रितिका रानी ने बताया कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण ली गई. आज बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टे लगा दिया है. उन्होंने बताया कि अब अभी किसी भी अभ्यर्थी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया जाएगा. बहाली की प्रक्रिया रोक दी जाएगी. आयोग को अदालत में कई अनसुलझे सवालों के जवाब देने होंगे.

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अधिवक्ता रितिका रानी ने बताया कि करीब चार हफ्ते के बाद इस मामले की सुनवाई फिर होगी. मेरिट लिस्ट को चैलेंज करने के मामले को लेकर अधिवक्ता कहतीं हैं कि जबतक मामला हाइकोर्ट में पेंडिंग रहेगा, तबतक बहाली को लेकर सारी प्रक्रिया पर रोक रहेगी. बता दें कि जिन अभ्यर्थियों का इस बहाली के लिए चयन किया गया है वो लंबे समय से ट्रेनिंग के लिए इंतजार कर रहे हैं.

हाल में ही चयनित अभ्यर्थियों का बड़ा समूह पुलिस मुख्यालय पहुंच गया था. वो इसकी जानकारी चाहते रहे हैं कि आखिर उन्हें ट्रेनिंग के लिए क्यों नहीं बुलाया जा रहा. जबकि आयोग इतने लंबे समय तक इंतजार कराने की कोई पुष्ट जानकारी अभ्यर्थियों को नहीं दे सका. हमेसा गोलगोल बातें कहकर ही चयनित अभ्यर्थियों को भेजा जाता रहा है. अब हाईकोर्ट के स्टे के बाद जहां परिणाम को चैलेंज करने वालों में उम्मीदें जगी हैं वहीं चयनित छात्रों में इंतजार अवधि को लेकर निराशा बढ़ी है.

Published By: Thakur Shaktilochan

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