पटना : कांग्रेस में राज्यसभा और विधान परिषद की एक सीट के लिए होड़
Updated at : 27 Dec 2019 9:28 AM (IST)
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शशिभूषण कुंवर पटना : कांग्रेस में एक अनार और सौ बीमार की स्थिति बन गयी है. बिहार कोटे से राज्यसभा की रिक्त होनेवाली पांच सीटों में दो महागठबंधन के खाते में आनेवाली हैं. विधानसभा कोटे से बिहार विधान परिषद की एक सीट आसानी से जीत सकती है. इन दोनों सीटों को लेकर पार्टी नेताओं ने […]
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शशिभूषण कुंवर
पटना : कांग्रेस में एक अनार और सौ बीमार की स्थिति बन गयी है. बिहार कोटे से राज्यसभा की रिक्त होनेवाली पांच सीटों में दो महागठबंधन के खाते में आनेवाली हैं. विधानसभा कोटे से बिहार विधान परिषद की एक सीट आसानी से जीत सकती है. इन दोनों सीटों को लेकर पार्टी नेताओं ने लॉबिंग आरंभ कर दी है.
उपरी सदन जाने को बेताब कांग्रेसियों की निगाहें आलाकमान की ओर टिकी हैं. वहां से जिस नेता की लॉबी सफल होगी, उसको यह अवसर मिलेगा. कांग्रेस नेताओं को भरोसा है कि लोकसभा चुनाव की सीटों के समझौते के दौरान राजद ने राज्यसभा की एक सीट देने का वादा किया था. संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इसकी घोषणा की थी. विधानसभा में सदस्यों की संख्या के आधार पर कांग्रेस के पास राज्यसभा भेजने के लिए आवश्यक 42 विधायकों की संख्या नहीं है. कांग्रेस के पास विधानसभा में 26 विधायक हैं. राजद के 16 विधायकों की मदद कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट हासिल हो सकती है.
इधर, विधानसभा में कांग्रेस के पास विधायकों की उतनी संख्या है जिससे एक विधान परिषद के सदस्य का चुनाव किया जा सके. विधान परिषद सदस्य के लिए 25 विधायकों के मत की आवश्यकता है.
सामाजिक समीकरणों पर हो रही खेमाबंदी
राज्यसभा और विधान परिषद पहुंचने के लिए पार्टी नेता सामाजिक समीकरणों की दुहाई दे रहे हैं. नेताओं का मानना है कि 1990 के बाद से सामाजिक आधार पर कुछ जातियों के नेताओं का तो मनोनयन राज्यसभा के लिए हुआ है, लेकिन सामाजिक समीकरण की बहुत- सी जातियों के नेताओं को पार्टी द्वारा यह अवसर नहीं दिया गया है.
वैसी स्थिति में उन वर्गों को यह अवसर मिलना चाहिए. उपरी सदन के लिए अपने को उपयुक्त मान रहे ऐसे नेताओं का कहना है कि 1990 के बाद से जगन्नाथ मिश्र, फगुनी राम व डाॅ अखिलेश प्रसाद सिंह के अलावा कपिल सिब्बल और आरके धवन को बिहार कोटे से राज्यसभा भेजा गया है. इसके अलावा विधानसभा और लोकसभा में भी ऐसे नेता हैं, जिनके मूल्य पर पार्टी ने अपने परंपरागत सीट को महागठबंधन कोटे में डाल दिया था.
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