पटना : गर्दनीबाग व बेऊर को मिलेगा साफ पानी
Updated at : 01 Dec 2019 10:28 AM (IST)
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पटना : लंबे अरसे से लंबित पटना जलापूर्ति योजना पर एक माह के अंदर काम शुरू हो जायेगा. कटरा, दीदारगंज नगर, गर्दनीबाग और बेऊर वाटर प्रोजेक्ट को लेकर एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी करते हुए वर्क ऑर्डर दे दिया गया है. चयनित एजेंसियां एक माह में जलमीनार व नेटवर्क विस्तार पर काम शुरू कर देंगी. […]
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पटना : लंबे अरसे से लंबित पटना जलापूर्ति योजना पर एक माह के अंदर काम शुरू हो जायेगा. कटरा, दीदारगंज नगर, गर्दनीबाग और बेऊर वाटर प्रोजेक्ट को लेकर एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी करते हुए वर्क ऑर्डर दे दिया गया है.
चयनित एजेंसियां एक माह में जलमीनार व नेटवर्क विस्तार पर काम शुरू कर देंगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बड़ी आबादी (करीब चार लाख) को पीने के पानी की समस्या से राहत मिलेगी. शनिवार को मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित स्थायी समिति की बैठक में जलापूर्ति योजना की समीक्षा के दौरान नगर आयुक्त अमित कुमार पांडेय ने इस बारे में जानकारी दी. मेयर ने पूछा कि निगम को 13 जलमीनार व नेटवर्क विस्तार से संबंधित योजना पूरी करनी है.
इस प्रोजेक्ट में विलंब कहां है. नगर आयुक्त ने बताया कि कटरा, दीदारगंज नगर, गर्दनीबाग और बेऊर वाटर प्रोजेक्ट पर शीघ्र काम शुरू होगा. वहीं, छह प्रोजेक्टों के लिए एजेंसी चुन ली गयी है. प्रशासनिक स्वीकृति मांगी जा रही है. तीन प्रोजेक्टों के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिन पर जल्द काम शुरू होगा.
आउटसोर्सिंग एजेंसी पर हो सकती है कार्रवाई : बैठक में साफ-सफाई की
समीक्षा की गयी. समीक्षा के दौरान स्थायी समिति सदस्यों ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि बांकीपुर अंचल में आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मी उपस्थित रहते हैं. लेकिन, सफाई कार्य नहीं करते हैं. क्योंकि एजेंसी कर्मियों को नियमित वेतन भुगतान करती है. इसके जवाब में नगर आयुक्त ने कहा कि भुगतान का मामला नहीं है. इस मामले की गंभीरता से जांच कर एजेंसी पर कार्रवाई भी की जायेगी.
स्थायी समिति सदस्य इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी, आशीष कुमार सिन्हा, मुन्ना जायसवाल और सुचित्रा सिंह ने सवाल उठाते हुए नगर आयुक्त से पूछा कि गाड़ियों का समुचित रखरखाव नहीं हो रहा है. इससे गाड़ियां खराब हो रही हैं. वहीं, गाड़ियों के अभाव में सब्जी मंडी के आसपास से नियमित कचरे का उठाव नहीं हो रहा है.
इस पर नगर आयुक्त ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि एक भी गाड़ी खराब नहीं रहनी चाहिए. वहीं, अपने-अपने
अंचल की सब्जी मंडी को चिह्नित करें और गाड़ियों की संख्या बढ़ाते हुए नियमित कचरे का उठाव सुनिश्चित कराएं. नगर आयुक्त ने बताया कि वार्डों की संकरी गलियों से कचरा उठाव को लेकर शीघ्र 10-10 हाथ ठेला मुहैया करा दिये जायेंगे. इससे डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन कार्य और आसान हो जायेगा. इसके साथ ही सभी अंचलों में वर्कशॉप बनाया जायेगा और अंचल स्तर पर निजी एजेंसी चुनी जायेगी, जो गाड़ियों के मेंटेनेंस पर नजर रखेगी.
निगम प्रशासन ने निजी एजेंसी इइएसएल के सहयोग से करीब 70 हजार स्ट्रीट लाइटें लगायीं. लेकिन, पार्षदों की अनुशंसा पर करीब 16 हजार और स्ट्रीट लाइटें लगनी हैं. इस जरूरत को निजी एजेंसी पूरा नहीं कर रही थी. नगर आयुक्त ने बताया कि एजेंसी से सहमति बन गयी है और शीघ्र ही लाइटें लगाने का काम शुरू होगा. इसके साथ ही संशोधन के साथ मोबाइल टावर विनियमन पर भी स्थायी समिति की मुहर लग गयी है.
कच्ची नाली-गली योजना के तहत 3600 से अधिक योजनाएं बनायी गयीं. लेकिन, सिर्फ छह से आठ सौ योजनाओं पर ही काम शुरू किया जा सका है. बैठक के दौरान डिप्टी मेयर मीरा देवी सहित सदस्यों ने सवाल उठाये. इसके जवाब में नगर आयुक्त ने कहा कि अगले एक सप्ताह के भीतर कच्ची नाली-गली की शत-प्रतिशत योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी जायेगी. साथ ही राशि आवंटित करने का काम शुरू कर दिया जायेगा.
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