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सृजन मामला : घोटाले की राशि 1900 करोड़ तक, मामले में रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर 2.50 करोड़ का जुर्माना ठोका

Updated at : 20 Nov 2019 9:05 AM (IST)
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सृजन मामला : घोटाले की राशि 1900 करोड़ तक, मामले में रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर 2.50 करोड़ का जुर्माना ठोका

पटना : बहुचर्चित सृजन घोटाले के मामले में पटना स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में मंगलवार को ट्रायल शुरू हो गया. सीबीआइ-2 की विशेष जज गीता गुप्ता की अदालत में भागलपुर जिला नजारत में 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार 75 रुपये के हुए गबन के मामले में दर्ज केस संख्या 6/17 में जिरह शुरू […]

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पटना : बहुचर्चित सृजन घोटाले के मामले में पटना स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में मंगलवार को ट्रायल शुरू हो गया. सीबीआइ-2 की विशेष जज गीता गुप्ता की अदालत में भागलपुर जिला नजारत में 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार 75 रुपये के हुए गबन के मामले में दर्ज केस संख्या 6/17 में जिरह शुरू हुई.
इसमें विनोद मंडल अभियुक्त है. सृजन घोटाले में सीबीआइ ने 14 प्राथमिकियां दर्ज की हैं. इनमें 24 अभियुक्त बनाये गये हैं, जिनमें एक को छाेड़कर सभी जेल में बंद हैं. सीबीआइ अब तक सृजन घोटाले में सभी 24 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुका है. चार्जशीट के अनुसार घोटाले की रकम 1900 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
विशेष अदालत में इस मामले को लेकर मंगलवार को डीएम कार्यालय भागलपुर के रिटायर्ड कार्यालय अधीक्षक नंदकिशोर मालवीय की गवाही हुई. गवाह ने अपना बयान दर्ज कराते हुए अदालत को बताया कि वह एक फरवरी, 2017 से 18 अक्तूबर 2017 तक भागलपुर के जिला ट्रांजिट शाखा में ऑफिस सुपरिटेंडेंट (कार्यालय अधीक्षक) के प्रभार में थे.
गवाह ने विशेष अदालत को आगे बताया कि सहायक नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव को इंडियन बैंक में खाता खोलने की फाइल पर नोटशीट ट्रांजिट के माध्यम से भेजनी चाहिए थी, लेकिन उनके द्वारा नहीं भेजा गया. आरोपित अमरेंद्र कुमार यादव ने सीधे डीएम के पास फाइल पर अंकित नोटशीट को भेज दिया. उक्त नोटशीट की पहचान भी गवाह ने की. साथ ही यह भी बताया कि सात अगस्त, 2017 को एक शिकायत तिलक मांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए भेजी गयी थी. उक्त शिकायत पत्र की भी पहचान गवाह ने की. गवाह का मुख्य परीक्षण जारी है.
यह था मामला
सृजन घोटाले का उक्त मामला लगभग 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार 75 रुपये के गबन से संबंधित है, जिसमें सीबीआइ ने 28 अगस्त, 2017 को दो अभियुक्त विनोद मंडल व भागलपुर में इंडियन बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक तौकीर कासिम के खिलाफ मामला दर्ज किया था. उक्त मामले में तौकीर कासिम अब भी फरार है. इसके खिलाफ अदालत ने इश्तेहार भी जारी कर दिया है.
पहली बार हुआ सरकारी राशि के गबन का खेल:
उप विकास आयुक्त की गठित टीम ने जिला नजारत के खाते की जांच की. जांच में पता चला कि मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के फंड को पटल बाबू रोड स्थित इंडियन बैंक की शाखा में जमा करा दिया गया. मगर प्रशासन के खाते से राशि की निकासी हो गयी और खाते पर नजर रखनेवाले अंजान बने रहे. बैंक की पासबुक को अपडेट करने के बजाय भेजी गयी खाता विवरणी को अंतिम माना गया. इसमें जाली दस्तावेज के साथ ही डीएम के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल हुआ.
डीएम के निर्देश पर जांच टीम गठित
तत्कालीन डीएम आदेश तितरमारे ने चार अगस्त को एक शिकायत के आधार पर उप विकास आयुक्त अमित कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम से फर्जीवाड़े की जांच करायी. इसमें उप विकास आयुक्त अमित कुमार के अलावा अपर समाहर्ता (राजस्व) हरिशंकर प्रसाद व जिला भविष्य निधि पदाधिकारी चंदन कुमार शामिल थे.
इधर इस मामले में िरजर्व बैंक की बड़ी कार्रवाई बैंक ऑफ बड़ौदा पर Rs 2.50 करोड़ का जुर्माना
नयी दिल्ली/भागलपुर : सरकारी खाते के नाम से काटे गये चेक को सृजन समिति के खाते में जमा करने और सृजन समिति के खाते से अवैध रूप से सरकारी खाते में राशि जमा करने के मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पहली बार बड़ी कार्रवाई की है. उसने इस मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा पर 2.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.
सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के संबंध में जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं करने को लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा पर आरोप लगाया गया है. रिजर्व बैंक द्वारा जुर्माना लगाये जाने को लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा ने मंगलवार को शेयर बाजार को सूचना दी. बीओबी के अनुसार, रिजर्व बैंक ने बैंकिंग नियमन कानून, 1949 के तहत दी गयी शक्तियों का उपयोग करते हुए बैंक पर 2.50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.
जांच में बैंकिंग सिस्टम पर उठाये गये थे सवाल
अक्सर सरकारी विभाग के नाम से जारी चेक को उनके खाते के बजाय सृजन महिला विकास सहयोग समिति के खाते में जमा कराया गया.
सृजन समिति के खाते में जमा सरकारी चेक के पीछे सृजन महिला विकास सहयोग समिति की संचालिका की मुहर और उसमें सृजन समिति के खाते में जमा करने का किया गया उल्लेख.
कई जमा पर्चियों में सरकारी खाते का उल्लेख, मगर राशि सृजन समिति में हुई डायवर्ट.
द भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के स्वीप खाते की राशि अवैध रूप से सृजन समिति के खाते में हुई जमा.
अवैध रूप में सरकारी खाते में सृजन महिला विकास सहयोग समिति के खाते से राशि हुई जमा. आरोपित बैंक की तरफ से विभाग को दी गयी खाता विवरणी में भी की गयी छेड़छाड़.
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