पांच सालों तक विक्षिप्त अवस्था में गायब रहे थे वशिष्ठ नारायण, युवाओं ने ढूंढ़ा था
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Nov 2019 8:03 AM (IST)
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डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह अपनी माता लहासी देवी एवं पिता लालबहादुर सिंह तथा दो छोटे भाई भूतपूर्व सैनिक किशुन सिंह एवं आरा अनुमंडल कार्यालय में नाजिर के पद पर कार्यरत हरिश्चंद्र सिंह के साथ रहते थे. पूना में सैनिक के पद रहते उनके भाई किशनु सिंह द्वारा उनके इलाज के लिए अाठ अगस्त, 1989 को […]
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डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह अपनी माता लहासी देवी एवं पिता लालबहादुर सिंह तथा दो छोटे भाई भूतपूर्व सैनिक किशुन सिंह एवं आरा अनुमंडल कार्यालय में नाजिर के पद पर कार्यरत हरिश्चंद्र सिंह के साथ रहते थे.
पूना में सैनिक के पद रहते उनके भाई किशनु सिंह द्वारा उनके इलाज के लिए अाठ अगस्त, 1989 को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराने को आरा से ट्रेन द्वारा ले जाया जा रहा था. इसी क्रम में मध्य प्रदेश के खंडवा जिला के गढ़वारा रेलवे स्टेशन पर रात्रि में स्टेशन पर बुक स्टॉल की दुकान देखकर ट्रेन से उतर गये. उस दौरान ट्रेन में छोटे भाई, उनकी पत्नी और एक बेटी सो रहे थे और इन्होंने देखा नहीं कि वे किस स्टेशन पर उतर गये थे और वे पांच वर्ष तक जहां-तहां भटकते रहे.
परिवार के लोगों ने बताया कि स्टेशन पर उतरने के बाद कुछ रेलवे कर्मचारी एवं टिकट निरीक्षकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन लगभग 30 मिनट तक अंग्रेजी में स्पीच दी थी, जिसके बाद सभी रेलवे कर्मचारी सहम गये थे और वे स्टेशन परिसर से बाहर चले गये.
लगभग पांच साल बाद 7 फरवरी, 1993 को उनके पैतृक गांव बसंतपुर के कमलेश राम एवं भोरिक राम उर्फ सुदामा राम अपनी बहन की शादी में फर्नीचर के सामान खरीदने छपरा जा रहे थे. उसी दौरान लगभग पांच वर्षों से गायब डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह को देखा था. उसके बाद परिवारवालों की सूचना देकर उन्हें बुला कर वापस गांव लाया गया था.
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