अब सेहत पर भारी पड़ने लगी है हवा, लगातार आठवें दिन पटना की वायु रही वैरी पूअर

Updated at : 05 Nov 2019 8:55 AM (IST)
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अब सेहत पर भारी पड़ने लगी है हवा, लगातार आठवें दिन पटना की वायु रही वैरी पूअर

शाम को शहर में बारीक धूल कण की मात्रा 200 से पार पटना : दीपावली के बाद लगातार आठवें दिन सोमवार को भी पटना की हवा बेहद खराब रही. हालांकि रविवार की अपेक्षा केवल तकनीकी तौर पर वायु प्रदूषण आंशिक तौर पर कुछ कम रहा और एयर क्वालिटी इंडेक्स 383 दर्ज की गयी. पटना का […]

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शाम को शहर में बारीक धूल कण की मात्रा 200 से पार
पटना : दीपावली के बाद लगातार आठवें दिन सोमवार को भी पटना की हवा बेहद खराब रही. हालांकि रविवार की अपेक्षा केवल तकनीकी तौर पर वायु प्रदूषण आंशिक तौर पर कुछ कम रहा और एयर क्वालिटी इंडेक्स 383 दर्ज की गयी.
पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के निकटवर्ती इलाके और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कई शहरों से ज्यादा रहा. बिहार के दूसरे बड़े शहर मुजफ्फरपुर की हवा भी वैरी पूअर और गया की हवा भी पूअर रही है.
पटना शहर में वायु प्रदूषण की मुख्य वजह पीएम 2.5 की बढ़ी हुई मात्रा रही. दिन की बात छोड़ दें, तो देर शाम 6:30 बजे पटना की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 244 माइक्रोग्राम्स प्रति क्यूबिक मीटर रही, जो सामान्य से करीब पांच गुना ज्यादा व काफी भयावह है.
देर शाम पटना की हवा में पीएम 2.5 की बढ़ी हुई मात्रा की वजह अनकवर्ड ( बिना ढके) निर्माण कार्य और वाहनों की अधिक संख्या में सड़कों पर होना है. इन निर्माण कार्यों में अधिकतर सरकारी हैं. जानकारी के मुताबिक नगर निगम प्रशासन के पास उनकी नगरीय सीमा में कितने निर्माण कार्य चल रहे हैं, इसकी सूची भी नहीं है, जबकि निगम एजेंसियों को निर्माण कार्य की अनुमति भी देती है.
पश्चिमी विक्षोभ की निष्क्रियता से नहीं बढ़ रही ठंड
पटना. बिहार ही नहीं समूचे देश में तापमान सामान्य या सामान्य से ऊपर बना हुआ है. इसमें गिरावट नहीं देखी जा रही है. इसकी वजह पश्चिमी विक्षोभ है. यह अभी सक्रिय नहीं है. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 6 नवंबर से कश्मीर से लेकर उत्तराखंड में वह सक्रिय होने जा रहा है.
उसके सक्रिय होने के बाद ही बिहार में ठंडक बढ़ेगी. फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के चक्रवात के चलते बिहार में मौसम भारी बना रहेगा. चक्रवातीय स्थिति के चलते आसमान में बादल छाये रहेंगे. इससे दिन में गर्माहट बनी रहेगी. प्रदेश के में मौसम में कोई खास बदलाव का पूर्वानुमान नहीं है.
शहर में प्रदूषित हवा से 5% बढ़ गये सांस के मरीज
पटना : पटना में जहरीली हवा का साइड इफेक्ट दिखायी देने लगा है. राजधानी की आबोहवा में सांस लेने को मजबूर राजधानीवासी अब प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से भी दो चार हो रहे हैं. अस्पतालों में आजकल सांस, अस्थमा और कफ की समस्या वाले मरीजों की संख्या अचानक ही पांच फीसदी तक बढ़ गई है. इन मरीजों में ज्यादातर बच्चे और बूढ़े हैं. आपको बता दें कि इस प्रदूषण का सबसे गंभीर और खतरनाक असर बच्चों और बुजुर्गों पर ही पड़ता हैं.
पीएमसीएच की ओपीडी में सोमवार को कुल 1844 मरीज आये, जिसमें से सांस के मरीजों की संख्या पांच फीसदी तक बढ़ी हुई पायी गयी. वहीं, आइजीआइएमएस में 3100 नये और पुराने मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिसमें भी सांस से जुड़ी बीमार लोगों की संख्या में कुछ इजाफा देखने को मिला.
राजधानी के सरकारी अस्पतालों में भी सर्दी जुखाम, सांस फूलना जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों के बढ़ने से स्पष्ट है कि किस तरह प्रदूषण धीरे-धीरे लोगों को बीमार कर रहा है. बुजुर्ग और बच्चे प्रदूषण जनित समस्याओं को अभी झेल रहे हैं. लेकिन इसके अलावा भी जो इस हवा में सांस ले रहा हैं, वो कहीं न कहीं किसी न किसी दूरगामी बीमारी को न्यौता दे रहा है.
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि बच्चों के फेफड़े काफी नाजुक होते हैं, जो प्रदूषण को डीप इन्हेल कर लेते हैं. इसकी वजह से बाद में बच्चों में सांस या अस्थमा की परेशानी हो जाती हैं. इसके अलावा बुजुर्गों के फेफड़े भी इस लेवल के प्रदूषण को झेलने में नाकाम रहते हैं और इसलिए इस तरह की हवा में उन्हें सांस की समस्या हो जाती है.
40 लाख टन फसल अपशिष्ट जला रहे किसान
पटना : धीरे-धीरे ही सही राज्य में भी खेतों में फसल अपशिष्ट खासकर पुआल जलाने का औसत बढ़ रहा है. राज्य के छह जिलों मसलन रोहतास, कैमूर, भोजपुर, पटना, औरंगाबाद और नालंदा में पुआल जलाने का औसत अन्य जिलों से अधिक है. रोहतास में सबसे अधिक किसानों के द्वारा पुआल जलाने का काम किया जा रहा है. कृषि विभाग के अनुसार लगभग चार मिलियन टन राज्य में प्रतिवर्ष फसल अपशिष्ट जलाने का औसत है.
उन्हीं बातों को लेकर आठ नवंबर को विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कृषि विभाग की बैठक होगी. गौरतलब है कि अक्तूबर माह में फसल अवशेष प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम हो चुके हैं. कृषि विभाग व राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के अध्ययन के अनुसार प्रति वर्ष देश में 686 मिलियन टन कृषि अपशिष्ट का उत्पादन होता है.
इसमें 140 मिलियन टन अपशिष्ट को किसान खेतों में ही जला देते हैं जो कुल उत्पादन का 20% है. उसी प्रकार राज्य में प्रतिवर्ष 30 मिलियन टन फसल अपशिष्ट का उत्पादन होता है. इसमें चार मिलियन टन अपशिष्ट को खेतों में जलाया जाता है. जो 13% है. बीते वर्ष राज्य में 32 लाख टन पुआल जलाया गया था.
यह होगा उपाय
फसल अवशेष के वर्मी कम्पोस्ट बनाने से लेकर अन्य वस्तुओं के निर्माण में इसके उपयोग किये जायेंगे. गया व मुजफ्फरपुर की सभी पंचायतों के स्कूलों में इस संदर्भ में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा. किसान कॉल सेंटर के माध्यम से अब तक आठ लाख किसानों को फसल प्रबंधन की जानकारी दी जा चुकी है.
पुआल जलाने पर रिमोट सेंसिंग से रखेंगे नजर
पटना : पंजाब-हरियाणा की तर्ज पर बिहार में भी पुआल और दूसरे कृषि अवशेषों को जलाने पर नजर रखने के लिए बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर से संपर्क साधा है.
बोर्ड की मंशा है कि रिमोट सेंसिंग से कृषि अवशेष जलाने के स्थान की जानकारी कुछ ही मिनट के अंदर जिला से लेकर ब्लाॅक लेवल के अफसरों तक पहुंच जाये. बोर्ड के सदस्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि राज्य सरकार भी ऐसा चाहती है. इस दिशा में हमने रिमोट सेंसिंग एक्सपर्ट से संपर्क साधा है. हम एक खास मेकेनिज्म बनाकर वर्तमान और भविष्य के बड़े संकट को दूर करना चाहते हैं.
प्रभात खबर ने रिमोट सेंसिंग सेंटर के एक्सपर्ट डॉ के आरपी सिंह से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बोर्ड ने संपर्क साधा है. ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है. बता दें कि रिमोट सेंसिंग का आधार सैटेलाइट है. अभी नासा की विशेष वेबसाइट के जरिये दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी तरह के आग जलने की घटना को देखा जा सकता है. हालांकि एक्सपर्ट से ही सही स्थाना को पहचान सकते हैं.
प्रदेश का हाल
मुजफ्फरपुर
दीपावली के बाद मुजफ्फरपुर की हवा की गुणवत्ता में गिरावट आयी है़ यहां विषैली गैस का अनुपात एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर 437 तक पहुंच गया था. इसके बाद से एक्यूआइ लगातार 200 से 300 तक बना हुआ है. हवा में छोटे कण पीएम 2.5 भी बढ़े हुए हैं. मानक के अनुसार एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 तक होना चाहिए. इससे अधिक होने पर यह मनुष्य सहित सभी जीव-जंतुओं के लिए खतरा बन जाता है.
भागलपुर
भागलपुर भी वायु प्रदूषण की चपेट में है. इससे दिन भर कोहरा छाया हुआ रहा और तापमान में वृद्धि दर्ज की गयी़ मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार को भी कोहरा छाया रहेगा, जबकि बुधवार व गुरुवार को धुंध रहेगी. आर्द्रता अगले तीन दिनों तक 70 प्रतिशत से ऊपर ही रहेगी. यहां की हवा में विषैली गैस की मात्रा अधिक दर्ज की गयी है़ शहर के तापमान में अचानक वृद्ध दर्ज की गयी है.
गया
गया में सोमवार को पीएम टू का स्तर एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को गया में पीएम टू(पार्टिकुलेट मेटर) 207 घनमीटर रहा. यह बता दें कि एक नवंबर से चार नवंबर के दौरान गया का एअर क्वालिटी इंडेक्स लगातार खतरनाक स्तर तक पहुंचा है. सीयूएसबी के डॉ राम कुमार के अनुसार रोड व बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में लगातार हो रहे काम की वजह से भी पीएम टू का स्तर काफी बढ़ा है.
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