बोधगया का चक्कर लगा रहे एमयू के छात्र
Updated at : 18 Oct 2019 8:25 AM (IST)
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पटना : मगध विश्वविद्यालय शाखा कार्यालय तो बंद हो गया, लेकिन छात्रों की परेशानी अब भी बरकरार है. मिली जानकारी के अनुसार शाखा कार्यालय तीन वर्ष तक के लिए स्थापित किया गया था लेकिन उसे पहले ही समाप्त कर दिया गया. इस वजह से पटना और नालंदा के सैकड़ों छात्रों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए […]
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पटना : मगध विश्वविद्यालय शाखा कार्यालय तो बंद हो गया, लेकिन छात्रों की परेशानी अब भी बरकरार है. मिली जानकारी के अनुसार शाखा कार्यालय तीन वर्ष तक के लिए स्थापित किया गया था लेकिन उसे पहले ही समाप्त कर दिया गया.
इस वजह से पटना और नालंदा के सैकड़ों छात्रों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बोधगया का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इसमें छात्रों को अधिक राशि भी खर्च करनी पड़ रही है. वहीं, छात्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यालय के कर्मी काफी परेशान करते हैं और काम में देरी करते हैं. बार-बार जाने के डर से छात्र आसानी से दलालों के झांसे में आ जाते हैं और जल्दी काम कराने के लिए छात्र वहां शिकार
हो रहे हैं.
अभी दो सत्रों के छात्रों की परीक्षा बाकी, सत्र 2016-19 की चल रही है परीक्षा
मगध विश्वविद्यालय में अभी दो सत्र की परीक्षा बाकी है. स्नातक सत्र 2016-19 की फाइनल परीक्षा चल रही है. वहीं स्नातक सत्र 2017-20 की अभी सेकेंड व व थर्ड इयर की परीक्षा होनी बाकी है. इसी प्रकार पीजी में अभी सत्र 2016-18 की फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा 22 अक्तूबर से होनी है. वहीं सत्र 2017-19 की सेकेंड, थर्ड व फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा होनी बाकी है.
शाखा कार्यालय से एडमिट कार्ड का वितरण, माइग्रेशन का वितरण, नाम व अन्य सुधार के लिए आवेदन आदि लिये जाते थे लेकिन अब इसके लिए भी छात्रों को मुख्यालय जाना पड़ता है. ऑनलाइन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन तो मांगा गया लेकिन छात्रों को वह प्राप्त नहीं हो पा रहा है.
किसी भी तरह के सुधार के लिए मुख्यालय जाना अनिवार्य
छात्रों को अगर नाम, उम्र, पता, रॉल नंबर या रजिस्ट्रेशन में सुधार कराना है तो उन्हें मुख्यालय तक आने-जाने में करीब 250 किमी तक का सफर तय करना पड़ता है. वहां भी कर्मचारी इन्हें खूब घूमाते हैं और छोटे से काम के लिए उन्हें काफी इंतजार करना पड़ता है. जब छात्रों को दोबारा आने की नौबत दिखाई पड़ती है तो वे दलालों के माध्यम से काम करवाते हैं. इससे छात्रों का न सिर्फ मानसिक शोषण व आर्थिक शोषण भी हो रहा है.
विसंगतियों को दूर करने को नयी गाइडलाइन जल्द
पटना. प्रदेश के सभी 13 विश्वविद्यालयों से संबद्ध निजी एवं सरकारी कॉलेजों के प्रबंधन और उनकी प्रशासनिक विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने अनौपचारिक रूप से गाइडलाइन तैयार कर ली है. हालांकि गाइडलाइन को फाइनल टच देने के लिए अभी कुछ औपचारिकताएं बाकी रह गयी हैं. राजभवन की मंजूरी के बाद यह गाइडलाइन जारी की जायेगी.
हुई उच्चस्तरीय बैठक : आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राजभवन में गुरुवार को गाइडलाइन तैयार करने के लिए बनायी गयी समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई. बैठक में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो हरि केश सिंह, एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसके सिंह और मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद मौजूद रहे.
लंबी चली बैठक में उन विसंगतियों व प्रबंधन से जुड़ी अनियमितताओं को दूर करने के लिए बनाये जा रहे नियम-कायदों पर विचार किया गया. देखा गया है कि विश्वविद्यालयों को संबद्ध प्राइवेट कॉलेजों को नियंत्रित करने में काफी दिक्कत आती है. इसके अलावा कॉलेजों में टीचर्स के चयन और गवर्निंग बॉडी की प्रक्रिया में काफी विसंगतियां चिह्नित की गयी थीं.
पटना शाखा कार्यालय में अब सिर्फ लीगल वर्क होते हैं. बाकी सारे काम मुख्यालय से ही होते हैं. छात्र या तो ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या फिर उन्हें बोधगया ही जाना होगा. यहां पर सारे एकेडमिक कार्ड बंद हो चुके हैं.
अंजनी कुमार घोष, एमयू लीगल शाखा कार्यालय के इंचार्ज
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