बिहार : विधानसभा व लोकसभा उपचुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा, सीटों को लेकर छिड़ा घमासान, एनडीए और महागठबंधन में खलबली
Updated at : 22 Sep 2019 5:02 AM (IST)
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पटना : बिहार विधानसभा व लोस उपचुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा के बाद एनडीए व महागठबंधन के घटक दलों के बीच सियासी खलबली शुरू हो गयी है. एनडीए के भीतर पांच सीटों का बंटवारे का फाॅर्मूला क्या होगा, इसको लेकर अभी तक चुप्पी है. माना जा रहा है कि अगले सप्ताह जदयू, भाजपा व लोजपा […]
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पटना : बिहार विधानसभा व लोस उपचुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा के बाद एनडीए व महागठबंधन के घटक दलों के बीच सियासी खलबली शुरू हो गयी है. एनडीए के भीतर पांच सीटों का बंटवारे का फाॅर्मूला क्या होगा, इसको लेकर अभी तक चुप्पी है. माना जा रहा है कि अगले सप्ताह जदयू, भाजपा व लोजपा के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी, जिसमें तालमेल को अंतिम रूप दे दिया जायेगा.
इधर, महागठबंधन में सीटों को लेकर घमासान शुरू हो गया है. विस की खाली हुई सीटों में सिर्फ एक सीट कांग्रेस के पास थी. शेष सभी चार सीटों पर जदयू के विधायक थे. समस्तीपुर लोस की सीट पर चुनाव लड़ने के लिए दोनों ही गठबंधन में कोई विवाद नहीं दिख रहा.
महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस की झोली में जायेगी. यहां से कांग्रेस के डाॅ अशोक कुमार उम्मीदवार होते रहे हैं. पिछले चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के ही पास रही थी. वहीं, एनडीए में यह सीट लोजपा को दी गयी थी. लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान के निधन के बाद यह सीट उसे ही मिलनी तय मानी जा रही है. लोजपा सूत्रों के मुताबिक रामचंद्र पासवान के बेटे को यहां उम्मीदवार बनाया जायेगा.
2015 में महागठबंधन में बांटी गयी चार सीटें जदयू के खाते में आयी थी, जबकि, किशनगंज विधानसभा की सीट राजद से लेकर कांग्रेस को दी गयी थी. विधानसभा चुनाव के महागठबंधन के स्वरूप में उस समय बड़ा बदलाव आया जब, जदयू उससे निकलकर एनडीए में शामिल हो गया.
लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में राजद-कांग्रेस के साथ छोटे-छोटे दलों को शामिल होने का मौका मिल गया. इस गठबंधन में फिलहाल राजद, कांग्रेस के अलावा उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतन राम मांझी का हम और मुकेश साहनी का वीआइपी शामिल हैं. इन छोटे दलों में भी सीटों को लेकर उम्मीद जगी है.
फाॅर्मूला क्या होगा, अभी तक चुप्पी
किशनगंज : महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस को जाती दिख रही है. एनडीए के भ्ज्ञीतर अभी तय नहीं हुआ है. 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस को यह सीट दी गयी. यहां से कांग्रेस के युवा नेता मो जावेद विधायक निर्वाचित हुए. इस बार के लाेकसभ चुनाव में मो जावेद किशनगंज की सीट से सांसद निर्वाचित हो गये.
नाथनगर : नाथनगर की सीट पर जदयू औरराजद के बीच मुकाबला संभावित है. 2015 के चुनाव में जदयू के अजय मंडल ने
लोजपा के अमरनाथ कुशवाहा को पराजित किया था. इस बार एनडीए में यहसीट जदयू को मिल सकती है और महागठबंधन में राजद और कांग्रेस दोनोे का दावा है.
बेलहर – दरौंदा
सीवान जिले की दरौंदा सीट पर राजद और एनडीए के बीच मुकाबला होने के आसार हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में दरौंदा की सीट महागठबंधन में जदयू को मिली और यहां से कविता सिंह दोबारा विधायक निर्वाचित हुई. भाजपा ने जितेंद्र स्वामी को उम्मीदवार बनाया था. इस सीट पर जदयू और भाजपा दोनों का ही दावा बनता दिख रहा.
विस की तीन और लोस की एक सीट पर कांग्रेस में बनी सहमति
पटना. विस की तीन और लोस की एक सीट पर कांग्रेस में उपचुनाव लड़ने पर आम सहमति बन गयी है. राजद के साथ होनेवाली महागठबंधन की बैठक के पूर्व शनिवार को दोपहर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा और प्रभारी सचिव वीरेंद्र सिंह राठौर ने कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर एक घंटे तक अकेले में मंथन किया. मंथन में पांच विधानसभा में तीन व लोस की एक मात्र सीट पर दावेदारी का फैसला किया है. कांग्रेस 2018 के विधानसभा उपचुनाव की तर्ज पर इस बार भी अपनी दावेदारी कर रही है.
सिमरी बख्तियारपुर
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर की सीट पर एनडीए और महागठबंधन का सीधा मुकाबला होगा. सिमरी बक्तियारपुर की सीट पर 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू के दिनेश चंद्र यादव और लोजपा के युसुफ सलाउद्दीन के बीच मुकाबला हुआ था. जदयू उम्मीदवार को 66298 और लोजपा उम्मीदवार को 58550 वोट आये.
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