तय समय में मुहैया कराना होगा जन्म-मृत्यु का रजिस्ट्रेशन
Updated at : 20 Sep 2019 8:12 AM (IST)
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पटना : राज्य में जन्म मृत्यु का निबंधन अब आरटीएस कानून में शामिल होगा. बिहार देश में सर्वाधिक जन्म दर वाले राज्यों में शामिल है. फिर भी यहां जन्म और मृत्यु के निबंधन की दर बेहद कम है. बिहार में इसके निबंधन की दर अभी सिर्फ 55 प्रतिशत है. जबकि राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत के […]
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पटना : राज्य में जन्म मृत्यु का निबंधन अब आरटीएस कानून में शामिल होगा. बिहार देश में सर्वाधिक जन्म दर वाले राज्यों में शामिल है. फिर भी यहां जन्म और मृत्यु के निबंधन की दर बेहद कम है. बिहार में इसके निबंधन की दर अभी सिर्फ 55 प्रतिशत है. जबकि राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत के आसपास है.
2020 तक बिहार में इसका लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल करने और लोगों को समय पर इसका लाभ देने के लिए राज्य सरकार इस सुविधा को सेवा का अधिकार (आरटीएस) अधिनियम में शामिल करने जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग के इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगते ही इसे अमल में लाया जायेगा.
इसके बाद यह सेवा कानून में शामिल हो जायेगी और संबंधित संस्थान या व्यक्ति को निर्धारित समय में इसे संबंधित व्यक्ति को मुहैया कराना अनिवार्य होगा. आरटीएस में इसके शामिल होने के बाद लोगों को तय समयसीमा में इसे प्राप्त करने का अधिकार मिल जायेगा. तय समय में इसे मुहैया नहीं कराने वाली संस्थान पर कार्रवाई होगी.
जन्म-मृत्यु निबंधन में यह है बिहार की स्थिति
राज्य में जन्म-मृत्यु का निबंधन कराना अनिवार्य है, लेकिन आम लोग इसे लेकर खासकर मृत्यु का निबंधन कराने के प्रति बहुत जागरूक नहीं हैं. जन्म का निबंधन कराने के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, निजी हॉस्पिटल समेत अन्य स्थानों पर व्यवस्था मौजूद है. राज्य के कुछ जिलों में निबंधन की स्थिति अच्छी है.
इसमें शेखपुरा (71.99 प्रतिशत), सीतामढ़ी (67.59), पूर्णिया (67.37), किशनगंज (64.28), समस्तीपुर (63.44), कटिहार (63.02) और खगड़िया (62.63 प्रतिशत) शामिल हैं. जबकि, कुछ जिलों की स्थिति काफी खराब है. इसमें पूर्वी चंपारण (42.91 प्रतिशत), बांका (45.18), कैमूर (46.09), औरंगाबाद (47.96) और सारण (48.24 प्रतिशत) हैं. अन्य जिलों में यह 50 से 60 प्रतिशत के बीच है.
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