मोकामा : अबेकस पद्धति से खेल-खेल में गणित सीख रहे हैं बच्चे
Updated at : 26 Aug 2019 9:29 AM (IST)
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बंटी कुमार मोकामा : मोकामा के ग्रामीण क्षेत्रों में अबेकस पद्धति (गिनतारा) का प्रचलन बढ़ रहा है. बच्चे खेल–खेल में गणित सीख रहे हैं. इस पद्धति के तहत बच्चों में कैलकुलेट करने की क्षमता विकसित की जाती है. वहीं , बच्चे बिना कॉपी–कलम व कैलकुटेर लिये गणित के कठिन सवालों का हाजिर जवाब देते हैं. […]
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बंटी कुमार
मोकामा : मोकामा के ग्रामीण क्षेत्रों में अबेकस पद्धति (गिनतारा) का प्रचलन बढ़ रहा है. बच्चे खेल–खेल में गणित सीख रहे हैं. इस पद्धति के तहत बच्चों में कैलकुलेट करने की क्षमता विकसित की जाती है. वहीं , बच्चे बिना कॉपी–कलम व कैलकुटेर लिये गणित के कठिन सवालों का हाजिर जवाब देते हैं.
औंटा गांव के लोगों ने खास पहल कर अपने बच्चों को यह पद्धति सिखाने की कवायद शुरू की है. प्रशिक्षक अंशुमाली प्रियदर्शी ने बताया कि अबेकस वैसे तो प्राचीन पद्धति है, लेकिन हाल के दिनों में इस पद्धति का विस्तार शुरू हुआ है. खासकर बड़े स्कूलों में इस पद्धति से बच्चों का मानसिक विकास किया जा रहा है.
हर रविवार को औंटा में होती है स्पेशल क्लास
उन्होंंने इसकी चर्चा एक साल पहले अपने गांव औंटा में की. यहां के प्रबुद्ध लोगों ने इसके लिए खास बैठक कर अबेकस क्लास शुरू करवाया. हर रविवार को बच्चों को इसकी जानकारी दी जाती है. इसमें पांच वर्ष से लेकर बारह वर्ष तक के बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंट किया जा रहा है. गांव के दर्जनों बच्चे अबेकस पद्धति से पांचवीं वर्ग तक के गणित को आसानी से हल कर रहे हैं. धीरे–धीरे आसपास के गांवों में भी इस पद्धति के प्रति लोगों में जागरूकता आ रही है.
पांच हजार वर्ष पूर्व चीन में हुई थी शुरुआत
अबेकस (गिनतारा) गणितीय गणनाओं में काम आने वाला पहला उपकरण है. इसकी शुरुआत तकरीबन पांच हजार वर्ष पूर्व चीन में हुई थी. बाद में इसका प्रचलन जापान, मलयशिया, कोरिया, फ्रांस आदि देशों में हुआ. इसका उपयोग केवल बेसिक गणितीय गणना के लिए होता था, लेकिन कागज–कलम का प्रयोग शुरू होने पर इसे नजरअंदाज किया जाने लगा.
इधर, पिछले दो–तीन दशकों में रूस और फ्रांस में अबेकस पद्धति का उपयोग ब्रेन डेवलपमेंट के टूल के रूप में किया जाने लगा है. वहीं गत दस वर्षों से भारत के बड़े शहरों के विद्यालय इसका अनुकरण कर रहे हैं. दक्षिण भारत के स्कूलों में इस पद्धति की जानकारी बच्चों को प्राथमिकता के तौर पर दी जा रही है. अब इस पद्धति का प्रचलन बिहार व यूपी में तेजी से बढ़ा रहा है.
पटना के कई स्कूलों में चलता है अबेकस का कोर्स
पटना के कई स्कूलों में अबेकस का कोर्स चलता है. इसमें गोला रोड के दो, राजीव नगर के एक, खगौल रोड के एक, कंकड़बाग के एक स्कूल शामिल हैं.
अबेकस की जानकारी बच्चों को देने वाले शिक्षक पंकज कुमार ने बताया कि मोकामा के तीन स्कूलों में जल्द अबेकस क्लास शुरू किये जायेंगे. अबेकस के आठ स्टेज की तैयारी पूरी करने वाले बच्चों में तार्किक गुणों का भी विकास हो जाता है. वे अन्य विषयों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इससे बच्चों के बीच विषय वस्तु को जल्द सीखने की क्षमता का विकास होता है.
आठ स्टेजों में होती है पढ़ाई
अबेकस के तहत ब्रेन डेवलपमेंट की पढ़ाई बच्चों के बीच आठ स्टेज में होती है. अमूमन बच्चे इस पद्धति से 01 से 99 तक का टेबल आसानी से सीख जाते हैं. एक स्टेज का तीन महीने तक अभ्यास करवाया जाता है. ग्रामीणों की मानें तो कमजोर बच्चों का भी गत छह माह के अभ्यास के बाद अच्छा प्रदर्शन रहा है.
इसको लेकर इस पद्धति की चर्चा इलाके में तेजी से फैल रही है. बच्चों को शुरुआती दौर में अबेकस से जोड़, घटाव, गुणा आदि बताया जाता है. वहीं, बाद में बच्चे हाथ की उंगलियों का अबेकस के रूप में इस्तेमाल कर गणित के कठिन सवालों का हल निकाल लेते हैं. प्रश्न पढ़ने के दौरान ही हल बच्चों के दिमाग में आ जाता है.
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