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पटना : शहर में 50 प्रतिशत विक्रेता बिना लाइसेंस के बेच रहे दूध

Updated at : 17 Aug 2019 7:41 AM (IST)
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पटना : शहर में 50 प्रतिशत विक्रेता बिना लाइसेंस के बेच रहे दूध

आनंद तिवारी अब तक कागजों में ही चल रही है विक्रेताओं के लाइसेंस लेने की बात, बढ़ा मिलावटी दूध का कारोबार पटना : मिलावटी व बिना लाइसेंस के दूध बेचने वालों पर शिकंजा कसना खाद्य सुरक्षा विभाग को मुश्किल साबित हो रहा है. दूध विक्रेताओं के लाइसेंस लेने की बात अब तक सिर्फ कागजों में […]

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आनंद तिवारी
अब तक कागजों में ही चल रही है विक्रेताओं के लाइसेंस लेने की बात, बढ़ा मिलावटी दूध का कारोबार
पटना : मिलावटी व बिना लाइसेंस के दूध बेचने वालों पर शिकंजा कसना खाद्य सुरक्षा विभाग को मुश्किल साबित हो रहा है. दूध विक्रेताओं के लाइसेंस लेने की बात अब तक सिर्फ कागजों में ही चल रही है. यही नतीजा है कि पूरे पटना जिले में अब तक महज करीब 50 प्रतिशत ही दूध विक्रेताओं के पास लाइसेंस है. अगर, फुटकर विक्रेताओं की बात करें, तो यह संख्या और अधिक बढ़ जायेगी. ऐसे में मिलावटी दूध का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है.
राजधानी में अधिकांश दूध ग्रामीण क्षेत्र से आता है. सबसे अधिक पुनपुन, मसौढ़ी, फतुहा, पटना-गया रूट और बिहटा आदि जगहों से दूध ट्रेन व रोड परिवहन से लाया जा रहा है. ये फुटकर विक्रेता पटना जंक्शन स्थित दूध मार्केट के अलावा शहर केबड़े व नामी मिठाई दुकान के कारखानों में दूध उपलब्ध कराते हैं. बावजूद इनकी किसी तरह की चेकिंग नहीं की जाती है. खास बात यह है कि दूध बेचने वालों को भी लाइसेंस की कोई जानकारी नहीं है, जिस कारण इनके दूध की गुणवत्ता में कमी पायी जा रही है.
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले दूध को नहीं करते चेक
किया जा चुका है नष्ट
रुकनपुरा मोनकामना मंदिर से सटे इलाके में 10 अगस्त को फूड विभाग की
छापेमारी के दौरान ऑक्सीटोसिन इन्जेक्शन देते हुए एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ा गया. मौके पर 15 गायों को चेक किया गया, जहां पता चला कि गाय को ऑक्सीटोसिन इन्जेक्शन देकर दूध निकालने का काम किया जा रहा है. 100 लीटर दूध को नष्ट कर सड़क पर बहाया गया. वहीं नवंबर 2018 में भी दूध मार्केट में छापेमारी के दौरान मिलावटी दूध पकड़ा जा चुका है.
ऐसे बनवाएं लाइसेंस
लाइसेंस बनवाने के लिए दूध विक्रेताओं के पास पहचान प्रमाण, बिजली के बिल की कॉपी, स्वच्छता फार्म का होना अनिवार्य है. ये सभी जरूरी कागज आपको खाद्य सुरक्षा विभाग में जमा कराने होंगे.
डेयरी के लिए एक साल की फीस दो हजार रुपये और फुटकर विक्रेताओं के लिए 100 रुपये फीस है. पांच साल तक की फीस जमा कर पांच साल तक वैधता का लाइसेंस भी ले सकते हैं. लाइसेंस एक हफ्ते में मिल जाता है. अधिक जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग की वेबसाइट से ले सकते हैं.
विक्रेता जल्द बनवा लें लाइसेंस
सभी दूध विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग का लाइसेंस लेना अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है. अभी हाल में खुले में मिलावटी दूध बेचने वाले पर कार्रवाई की गयी थी. अब अभियान के तौर पर छापेमारी की जायेगी. जिन दूध विक्रेताओं व डेयरी वालों के पास लाइसेंस नहीं है, वे जल्द बनवा लें.
अजय कुमार, फूड इंस्पेक्टर
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