पटना : क्लिनिकल स्टैबलिशमेंट रूल तो बना, पर लागू नहीं
Updated at : 04 Aug 2019 9:02 AM (IST)
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सभी नर्सिंग होमों को मानकों के आधार पर कराना था निबंधन पटना : छह साल बीत जाने के बाद भी राज्य में मरीजों के इलाज की सुविधा को बेहतर बनाने और संस्थानों के निबंधन के लिए क्लिनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और रूल्स 2013 जमीन पर उतर नहीं पाया है. जबकि, इसके बाद आनेवाले रेरा कानून प्रभावी […]
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सभी नर्सिंग होमों को मानकों के आधार पर कराना था निबंधन
पटना : छह साल बीत जाने के बाद भी राज्य में मरीजों के इलाज की सुविधा को बेहतर बनाने और संस्थानों के निबंधन के लिए क्लिनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और रूल्स 2013 जमीन पर उतर नहीं पाया है. जबकि, इसके बाद आनेवाले रेरा कानून प्रभावी तरीके से काम कर रहा है.
पर, क्लिनिकल स्टैबलिशमेंट रूल्स चिकित्सकों और आइएमए के भारी विरोध और कोर्ट के आदेश के बाद इसे ठंडे बस्ते में है. चिकित्सकों की आपत्ति है कि अगर इसके मानकों का पालन किया जाये तो कोई भी अकेला चिकित्सक नर्सिंग होम या क्लिनिक नहीं चला सकता है.
उसे बड़े अस्पतालों में जाकर नौकरी करनी होगी. साथ ही गरीब मरीजों के लिए इलाज भी महंगा हो जायेगा. वर्ष 2013 में राज्य में क्लिनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट और रूल अधिसूचित किया गया. इसमें प्रावधान था कि राज्य में इलाज के क्षेत्र में सेवा देनेवाले सभी क्लिनिकों, पैथोलॉजी सेंटरों और रेडियोलॉजी सेंटरों का निबंधन कराया जाये.
निबंधन के लिए सभी संस्थानों के लिए मानकों की जांच की जायेगी. इसके आधार पर उनका पंजीकरण किया जायेगा. नियमावली में इसके लिए राज्य स्तर पर जिला स्तर पर पंजीकरण की कमेटी बना दी गयी. नियमावली यह कहती है कि कोई भी संस्थान अपने यहां मरीजों की सुविधा को लेकर शुल्क का निर्धारण और उसका प्रदर्शन करेंगे. बिना निबंधन वाले क्लिनिकों की जांच का अधिकार जिला रजिस्ट्रेशन ऑथोरिटी को दिया गया था.
वह समय-समय पर इसके मानकों की जांच कर सकती है. अधिसूचना के बाद उठे विवाद के बाद चिकित्सकों ने पटना हाइकोर्ट द्वारा इस मामले में राहत दी गयी कि कोई भी क्लिनिक चाहे तो वह अपना रिजिस्ट्रेशन करावे या नहीं करावे. इसके लिए कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है. कोर्ट के आदेश के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
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