बिहार में वर्ष 2019-20 में 77279 हेक्टयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य : जल संसाधन मंत्री

Updated at : 04 Jul 2019 9:16 PM (IST)
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बिहार में वर्ष 2019-20 में 77279 हेक्टयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य : जल संसाधन मंत्री

पटना : बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने गुरुवार को कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रदेश में 77279 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य है और 112874 हेक्टेयर क्षेत्र में ह्रासित सिंचाई क्षमता का पुनर्स्स्थापन किया जायेगा. बिहार विधानसभा में गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2019-20 के […]

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पटना : बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने गुरुवार को कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रदेश में 77279 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता के सृजन का लक्ष्य है और 112874 हेक्टेयर क्षेत्र में ह्रासित सिंचाई क्षमता का पुनर्स्स्थापन किया जायेगा. बिहार विधानसभा में गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए जल संसाधन विभाग के 36 अरब 52 करोड़ 30 लाख 15 हजार रुपये से अनधिक के आय-व्यय पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब देते हुए वृहद एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं से राज्य में सृजित होने वाली इष्टतम सिंचाई क्षमता 53.53 लाख हेक्टेयर के विरुद्ध मार्च 2019 में बढ़कर यह 30.04 हेक्टेयर हो गया है और करीब 23.5 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन हमें और करना है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से अबतक बिहार में सिंचाई की कुल सृजन क्षमता बढ़कर 3.5 लाख हेक्टेयर बढ़ी है. संजय ने बताया कि वर्ष 2004-05 में जल संसाधन विभाग का कुल योजना व्यय जहां 361.66 करोड़ रुपये था, वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 2964.14 करोड़ रुपये हो गया. उन्होंने कहा कि नदी जोड़ों योजना के तहत 4900 करोड़ रुपये की लागत वाली कोसी-मेची लिंक योजना की स्वीकृति अंतिम चरण में है और इस योजना से अररिया, कटिहार, किशनगंज एवं पूर्णिया जिले के 21 प्रखंडों में 210516 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

संजय ने कहा कि फरक्का बराज के कुप्रभाव के कारण गंगा जिसकी बिहार में कुल लंबाई में 445 किलोमीटर है, में उत्पन्न गाद की समस्या के कारण इस नदी की अविरलता घटती जा रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा कहते रहे हैं कि गंगा की निर्मलता उसकी अविरलता के बिना संभव नहीं है. संजय ने कहा कि गंगा में गाद की समस्या को लेकर दो सम्मेलन पटना और नयी दिल्ली में बिहार सरकार द्वारा आयोजित किया गया था एवं उसके फलाफल पर आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत सरकार के जलसंसाधन विभाग को भेजा गया.

उन्होंने कहा कि गंगा नदी में उत्पन्न गाद के कारण बिहार के लगातार प्रभावित होने को ध्यान में रखते हुए फरक्का बराज के संरचना में बदलाव की आवश्यकता है. संजय ने बताया कि लगातार कम वर्षापात के कारण जल संकट से निपटने और इसके प्रबंधन और संरक्षण के लिए दीर्घकालीन प्रणाली विकसित किये जाने को लेकर आगामी 13 जुलाई को बिहार विधानसभा के सेंट्रल हाल में बिहार विधानमंडल के सभी सदस्यों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विचार विमर्श करेंगे.

उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या के निदान के लिए बिहार में 3790 किलोमीटर तटबंध और नेपाल भाग 68 किलोमीटर तटबंध का निर्माण कराया गया है. संजय ने बताया कि सप्त कोसी हाई डैम के निर्माण के लिए शीर्ध डीपीआर तैयार करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष आने वाली बाढ़ के मद्देनजर बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य से जुड़ी 208 योजनाओं में से 202 योजनाओं का काम पूरा कर लिया गया है. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य उनके जवाब के दौरान ही सदन से वाकआउट कर गये. मंत्री के जवाब के बाद विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में सदन ने जल संसाधन विभाग के बजटीय मांग को ध्वनि मत से पारित कर दिया.

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