राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा- समाज के दबाव से ही बदलाव संभव

Updated at : 04 May 2019 6:05 AM (IST)
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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा- समाज के दबाव से ही बदलाव संभव

पटना : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि संसदीय प्रणाली को बेहतर करने के लिए समाज का दबाव जरूरी है. शासन पद्धति में लोकतंत्र सबसे बेहतर है तथा इस लोकतंत्र में विधायिका उसका प्राणतंत्र है. चुनाव के चार फेज बीत जाने के बाद भी यह मुद्दा नहीं बन पाया है कि लोकतंत्र में कैसे […]

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पटना : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि संसदीय प्रणाली को बेहतर करने के लिए समाज का दबाव जरूरी है. शासन पद्धति में लोकतंत्र सबसे बेहतर है तथा इस लोकतंत्र में विधायिका उसका प्राणतंत्र है. चुनाव के चार फेज बीत जाने के बाद भी यह मुद्दा नहीं बन पाया है कि लोकतंत्र में कैसे लोगों को विधायिका में जाना चाहिए.

विधायिका कैसे प्रभावशाली होकर कार्य करे, इस पर बहस नहीं हो रही है. वे स्थानीय एएन कॉलेज में सत्येंद्र नारायण सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला के दसवीं कड़ी में शुक्रवार को मुख्य वक्ता के रूप में ‘‘प्रभावी संसदीय प्रणाली में समाज की भूमिका’’ विषय पर बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि इथिक्स से अलग रहने पर संसद सदस्य भी नहीं रहना चाहिए. अत: संसद सदस्य को लोकहित में अपने आचार–विचार को निहित रखना चाहिए, तभी लोकतंत्र का भला हो सकता है. उन्होंने पिछले दो दशक का आंकड़ा देते हुए कहा कि संसद का समस्त कार्यवाही का लगभग चालीस प्रतिशत समय बर्बाद हुआ जिसके कारण कई अत्यंत महत्वपूर्ण बिल नहीं पास हो पाया.
आज के समय में संस्थाओं पर जन अदालत की आवश्यकता है. वर्तमान युग में ज्ञान का बहुत बड़ा महत्व है. अत: समाज को वर्तमान युग में हो रहे परिवर्तन से वाकिफ रहना चाहिए.
उन्होंने कहा कि विश्व के देश ब्रिटेन, अमेरिका आदि को विकसित होने में सौ–दो सौ वर्ष लगे लेकिन चीन जो हमसे बाद में आजाद हुआ वह मात्र तीस–चालीस साल में विकसित हो गया है, क्योंकि वहां नॉलेज को बढावा दिया गया. आज चीन पेटेंट करवा रहा है और अमेरिका के वर्चस्व को तोड़ रहा है. तकनीक समाज को आगे ले जाती है. तकनीक का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.
देश के विकास के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत होना जरूरी है साथ ही आज की चुनौतियों में जनसंख्या एक ज्वलंत समस्या है. अपने बेहतर जीवन यापन के लिए लोग गांव से शहर की ओर प्रवास करते हैं. अत: गांव को अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा ताकि सभी को अपने पैतृक स्थान पर ही रोजगार मिल सके.
उन्होंने कहा कि हम सभी सरकार से लाभ चाहते हैं परंतु हममें से कोई भी टैक्स नहीं देना चाहता है तो फिर विकास की रफ्तार कम तो होगी ही. आज के दौर में मैकयावेली के सिद्धांत नहीं बल्कि गांधी के सिद्धांत प्रासंगिक हैं. हम जितना अपने इतिहास में देखेंगे उतना ही हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा.
इसके पूर्व अपने अध्यक्षीय भाषण में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गुलाब चंद्र राम जायसवाल ने कहा कि समाज के प्रति दायित्व का निर्वहण सरकार का प्रमुख उद्देश्य है. विधायिका और कार्यपालिका में समन्वय जरूरी है. प्राचार्य प्रो एसपी शाही ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का संचालन प्रो कलानाथ मिश्र ने किया.
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