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पटना : रामय्या को गिरफ्तार कर हाइकोर्ट में पेश नहीं कर सकी पुलिस

Updated at : 25 Apr 2019 6:55 AM (IST)
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पटना : रामय्या को गिरफ्तार कर हाइकोर्ट में पेश नहीं कर सकी पुलिस

पटना : पटना हाइकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद भी बिहार पुलिस पूर्व आइएएस अधिकारी और बिहार लैंड ट्रिब्यूनल (बीएलटी) के पूर्व न्यायिक सदस्य केपी रामय्या को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश नहीं कर सकी . बुधवार को मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ को महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद भी बिहार पुलिस पूर्व आइएएस अधिकारी और बिहार लैंड ट्रिब्यूनल (बीएलटी) के पूर्व न्यायिक सदस्य केपी रामय्या को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश नहीं कर सकी . बुधवार को मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ को महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि फरार केपी रामय्या को गिरफ्तार करने की सभी कोशिशें अब तक विफल रही हैं.

उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सभी तरह की कार्रवाई की, लेकिन अब तक वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाया है. महाधिवक्ता ने अदालत को बताया की रामय्या की गिरफ्तारी के लिए हैदराबाद के पुलिस कमिशनर से भी संपर्क किया गया है. आइपीएस रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में एक टीम रामय्या को गिरफ्तार करने के लिए हैदराबाद गयी हुई है. लेकिन अब तक पुलिस को सफलता नहीं मिली है. हैदराबाद स्थित रामय्या के आवास पर ताला बंद है.

वहां कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था. श्री किशोर ने कोर्ट को बताया कि सोमवार को दोपहर 3:30 बजे तक रामय्या का मोबाइल फोन ऑन था, लेकिन उसके बाद उसके मोबाइल का स्विच ऑफ हो गया. जिस समय मोबाइल खुला हुआ था, उस समय उस मोबाइल का लोकेशन हैदराबाद दिखा रहा था. इससे यह प्रमाणित होता है कि वह व्यक्ति उस वक्त हैदराबाद में था. उसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है.

वहीं, दूसरी ओर रामय्या की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि रामय्या की तरफ से मैंने जो वकालतनामा हाइकोर्ट में दायर किया है, उसे वापस लेने की अनुमति मुझे दी जाये, क्योंकि मैं अब उस व्यक्ति की तरफ से हाइकोर्ट में कोई भी पैरवी नहीं करना चाहता, जो कानून का पालन नहीं कर रहा है और अदालती आदेश की अवहेलना खुलेआम कर रहा है. सुनवाई के समय आइजी मुख्यालय गणेश कुमार भी उपस्थित थे. मुख्य न्यायाधीश का न्याय कक्ष वकीलों से खचाखच भरा हुआ था.

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से यह पूछा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज है, उस व्यक्ति ने एेच्छिक सेवानिवृत्ति कैसे ले ली.

सरकार ने उसे बिहार लैंड ट्रिब्यूनल में सदस्य कैसे बना दिया, सरकार ने उसकी पेंशन क्यों नहीं रोकी. सरकार अविलंब उसका पासपोर्ट नियमानुसार जब्त करब्ये, क्योंकि संभव है कि वह देश छोड़कर भाग जाये. कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ छह करोड़ से ज्यादा के घोटाले का मामला दर्ज है और वह व्यक्ति आराम से घूम रहा है, सरकार उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है.

ऐसी बात नहीं है कि इस बात की जानकारी सरकार और उसके आला अधिकारियों को नहीं है. लेकिन इसके बावजूद उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जो सरकार और कानून की आंखों में धूल झोंक रहा है. आखिर उस व्यक्ति पर किसका वरदहस्त है. कोई-न-कोई तो जरूर है, जिसके कारण उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई अब तक नहीं की गयी है. यही कारण है कि वह सबों को धोखा दे रहा है और कानून की धज्जियां उड़ा रहा है.

कोर्ट ने महाधिवक्ता के अनुरोध पर इस मामले को 30 अप्रैल मंगलवार को सुनवाई के लिए रखते हुए कहा कि बेहतर होगा कि पुलिस उसे जल्द-से-जल्द गिरफ्तार कर ले. अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार के खिलाफ कुछ भी आदेश पारित कर सकता है और अगर ऐसा होता है तो यह सरकार के लिए खतरे की घंटी साबित होगी, क्योंकि कानून से बड़ा कोई नहीं है.

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