पास के गांवों से सात डिग्री अधिक गर्म है पटना, आज और बढ़ेगी गर्मी छह से आठ अप्रैल तक बारिश के आसार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Apr 2019 6:43 AM (IST)
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मौसम ने बदले मिजाज : घटती हरियाली और अधिक इमारतों ने बिगाड़ी शहर की आबोहवा इंटरनेशनल जर्नल की रिपोर्ट ने चेताया पटना के अलावा पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर का भी ऐसा ही हाल राजदेव पांडेय पटना : राजधानी पटना का तापमान निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्र से दो से सात डिग्री सेल्सियस अधिक पाया जा रहा […]
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- मौसम ने बदले मिजाज : घटती हरियाली और अधिक इमारतों ने बिगाड़ी शहर की आबोहवा
- इंटरनेशनल जर्नल की रिपोर्ट ने चेताया
- पटना के अलावा पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर का भी ऐसा ही हाल
राजदेव पांडेय
पटना : राजधानी पटना का तापमान निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्र से दो से सात डिग्री सेल्सियस अधिक पाया जा रहा है. मौसम विज्ञान के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं. विशेषज्ञों ने पाया है कि राजधानी के ठीक ऊपर वायुमंडल में एक लेयर विकसित हो गया है. इसके चलते शहरी धरातल की गर्मी का प्रसार वायुमंडल में नहीं हो पा रहा है. वहीं, दूसरी ओर इस लेयर के चलते वायुमंडल में होनेवाले बदलाव भी शहर में जल्दी महसूस नहीं हो पाते हैं. इसकी पुष्टि सेटेलाइट से प्राप्त हुई तस्वीरों से भी हुई है.
अलग-अलग इलाके में अलग-अलग तापमान : एक इंटरनेशनल जर्नल के मुताबिक बिहटा रूट से अगर पटना शहर के खगौल इलाके में प्रवेश करें, तो उसका तापमान अचानक दो से तीन डिग्री अधिक हो जाता है.
अगर हाजीपुर की तरफ से पटना सिटी में प्रवेश करें तो पश्चिम दरवाजा के पास पांच से सात डिग्री अधिक तापमान महसूस होता है. शहर के चारों तरफ के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में डाकबंगला क्षेत्र में सात डिग्री सेल्सियस तक तापमान अधिक रहता है, जबकि 30 साल पहले तक इस तरह का अंतर 0़ 5 डिग्री सेल्सियस से भी कम पाया जाता था. तापमान के इस अंतर को कभी भी महसूस किया जा सकता है.
बिहार के इन शहरों का भी यही हाल : इंटरनेशनल जर्नल में बताया गया है कि न केवल पटना बल्कि भागलपुर, गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया का भी यही हाल है. दरअसल इन शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है, इसलिए शहरों में हरियाली तेजी से उजाड़ी गयी है. वाहनों और वातानुकूलित साधनों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है. इन्हीं कारणों से यह स्थिति उत्पन्न हुई है.
औसत तापमान तीन डिग्री बढ़ा
पिछले साल तक अप्रैल, मई और जून का अधिकतम औसत तापमान क्रमश: 42़ 6, 43़ 4 और 43़ 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 1969 में इन्हीं तीनों माह में अधिकतम तापमान 42़ 3, 42़ 2 और 40़ 2 डिग्री सेल्सियस रहा था. जाहिर है कि शहर के तापमान में इन तीनों माह के औसत तापमान में तीन डिग्री से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. इससे भी शहर गर्म हुआ है.
हरियाली की कमी कारण
इस संदर्भ में व्यापक अध्ययन किया गया है. उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों से भी इसकी पुष्टि हुई है. पटना में पश्चिम दरवाजा और डाकबंगला क्षेत्र में सर्वाधिक गर्मी महसूस हुई है. शहर में कंक्रीट का जाल बिछा है और हरियाली करीब-करीब खत्म हो गयी है.
डॉ प्रधान पार्थ सारथी, मौसम विज्ञानी, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया
…हालांकि न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक 22.4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 36 डिग्री रहा.
आइएमडी पटना के मुताबिक तापमान में शुक्रवार को भी तेजी रहेगी. हालांकि 6, 7 और 8 अप्रैल को आंधी, पानी और ओला वृष्टि भी होने के आसार हैं. दरअसल पश्चिमी विक्षोभ की टफ लाइन पटना से गुजर रही है. जेट स्ट्रीम मौसम में हो रहे बदलाव में निर्णायक साबित हो रही है.
आज बढ़ेगी गर्मी, छह से आठ अप्रैल तक बारिश के आसार
शहर में गुरुवार को तेज धूप पड़ी. हालांकि बीच बीच में ठंडी हवा भी चली. इससे लोगों ने राहत की सांस भी ली.
गर्मी से बचाव के लिए स्कूलों में रखने होंगे मिट्टी के घड़े
पटना : प्रदेश के विद्यालयों में अब गर्मी से बचाव के लिए प्लान लागू किया जायेगा. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने प्रदेश के सभी शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश शुक्रवार को जारी किये हैं.
इन दिनों बढ़ती गर्मी और लू की दशाओं के संदर्भ में यह गाइडलाइन जारी की गयी है. हीट एक्शन प्लान के तहत विद्यालयों को मुख्यमंत्री सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है. इसके तहत विद्यालयों में अनिवार्य तौर पर बिजली के पंखे और ठंडे पानी के लिए मिट्टी के घड़े रखने का प्रबंध करने को कहा है.
अगर चापाकल खराब हैं, तो उन्हें सुधरवाने के निर्देश दिये. अगर जरूरत पड़े, तो पानी के टैंकरों का प्रबंध किया जाये. दिशा-निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि अगर मौसम ज्यादा खराब हो, तो विद्यालयों का टाइम टेबल भी बदला जा सकता है. इस पर निर्णय लेने का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारियों को है.
इसके अलावा विद्यालयों को हीट एक्शन प्लान के तहत बच्चों को बदलते मौसम की जानकारी भी देनी होगी. इन बातों को मुख्यमंत्री सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सुरक्षित शनिवार के कैलेंडर से जोड़ने के निर्देश भी दिये हैं. चूंकि पिछले कुछ सालों से लगातार राज्य के कई जिलों में सूखा पड़ा है. कम वर्षा की वजह से लू चलने की आशंका है. इसके लिए राज्य आपदा प्रबंधन ने भी सतर्क किया है.
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