जिला अस्पतालों में 15 अगस्त तक लगेगी डायलेसिस मशीन

Published at :05 Jul 2014 1:36 AM (IST)
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जिला अस्पतालों में 15 अगस्त तक लगेगी डायलेसिस मशीन

पटना: 15 अगस्त तक सभी जिला अस्पतालों में डायलेसिस मशीन लग जायेगी. यह घोषणा शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में की. स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह के बीमार रहने के कारण उन्होंने अनुदान मांगें पेश कीं. उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्ष सदन से वाकआउट कर […]

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पटना: 15 अगस्त तक सभी जिला अस्पतालों में डायलेसिस मशीन लग जायेगी. यह घोषणा शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में की.

स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह के बीमार रहने के कारण उन्होंने अनुदान मांगें पेश कीं. उनके जवाब से असंतुष्ट विपक्ष सदन से वाकआउट कर गया. 48 अरब, पांच करोड़, 73 लाख 16 हजार की अनुदान मांगों को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया. भाजपा के विक्रम कुंवर ने कटौती प्रस्ताव पेश किया था.

अज्ञात बीमारी से सरकार चिंतित : प्रभारी मंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर में अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत से सरकार चिंतित है. इसके पॉजिटिव फैक्टर का अभी तक पता नहीं चल पाया है. हालांकि, अज्ञात बीमारी से बच्चों की मौत राष्ट्रीय औसत से कम हुई है. इसका राष्ट्रीय औसत 30 है, जबकि बिहार में 17.02 प्रतिशत है. सरकार ने बच्चों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था की है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने भी मुजफ्फरपुर का दौरा किया है और चिकित्सा व्यवस्था को उन्होंने सही करार दिया था.

खराब दवाओं की खरीद नहीं : उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों के लिए गलत दवाओं की खरीद नहीं हो रही है. दवा खरीद के पहले उसका वेरिफिकेशन होता है. विभाग अपनी प्रयोगशाला में जांच कराता है. दवा खरीद में अनियमितता न हो, इसके लिए सरकार ने औषधारा योजना शुरू की है. भागलपुर में लिग्नोकैन दवा की शिकायत मिलने पर उसकी जांच की गयी. रिपोर्ट सही नहीं मिलने पर कंपनी का कांट्रैक्ट रद्द किया गया. भागलपुर की घटना की जांच के लिए कमेटी बनी है. हेल्थ सेक्रेटरी इसकी जांच करेंगे.

भाजपा के चंद्रमोहन राय ने कहा आधारभूत संरचना के संकट के कारण पांच मेडिकल कॉलेजों को एमसीआइ ने मान्यता नहीं दी. बेतिया में कॉलेज के लिए भवन था, लेकिन सरकार का सारा ध्यान नालंदा पर कें द्रित रहा. पीएमसीएच में डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं रहते. बहस में राजेश सिंह, अब्दुल गफूर, पवन जायसवाल, देव रंजन सिंह, ललन कुमार, भाई दिनेश, राज किशोर प्रसाद, मनोरमा प्रसाद, उषा विद्यार्थी, अमरेंद्र पांडेय व सीता चौधरी ने भी कई सुझाव दिये.

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