छपरा, नयी दिल्ली व कोलकाता में छापेमारी, फर्जी कंपनियां खोल रू 800 करोड़ के जीएसटी की चपत
Updated at : 11 Feb 2019 7:52 AM (IST)
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पटना : केंद्रीय जीएसटी विभाग के इंटेलिजेंस विंग ने फर्जी कंपनियों के आधार पर टैक्स चोरी करने और जमा किये टैक्स के बदले सरकार से इनपुट टैक्स लेने के मामले में 800 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ी है. बिहार में जीएसटी की चोरी का अब तक यह सबसे बड़ा मामला है. फिलहाल मामले की […]
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पटना : केंद्रीय जीएसटी विभाग के इंटेलिजेंस विंग ने फर्जी कंपनियों के आधार पर टैक्स चोरी करने और जमा किये टैक्स के बदले सरकार से इनपुट टैक्स लेने के मामले में 800 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ी है. बिहार में जीएसटी की चोरी का अब तक यह सबसे बड़ा मामला है. फिलहाल मामले की जांच चल रही है.
यह गड़बड़ी 1300 से 1400 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. इस मामले को लेकर विभाग ने रविवार को छपरा, नयी दिल्ली और कोलकाता में छह स्थानों पर छापेमारी की. इस पूरे मामले की जांच के दौरान फर्जी या सेल या ब्रीफकेस कंपनियों के बड़े नेटवर्क का भी पता चला है. इनमें कुछ कंपनियां ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के पते पर भी रजिस्टर्ड हैं. इनमें फर्जी इ-वे बिल से लेकर अन्य कई स्तर पर व्यापक गड़बड़ियां मिली हैं.
टैक्स चोरी करने के लिए कंपनियों ने कागज पर बेचे माल को तीन-चार फर्जी कंपनियों के एकाउंट में घूमाते हुए इन्हें वापस कोलकाता स्थित एक व्यक्ति के एकाउंट में जमा करवा दिया. इन कंपनियों में पैसे का रोटेशन दिखाकर उन्होंने टैक्स चोरी करने के साथ ही सरकार से इनपुट टैक्स पर करीब 70 करोड़ रुपये का सीधा फायदा ले लिया.
हकीकत में जब टीम तीनों शहरों में उल्लेखित कंपनियों के पते पर पहुंची, तो कहीं कोई कंपनी हकीकत में पायी नहीं गयी. सारी कंपनियां कागज पर ही चल रही हैं. जांच टीम सबसे पहले छपरा स्थित भरतिया उद्योग के पते पर पहुंची, तो वहां इस नाम की किसी कंपनी का कोई अता-पता नहीं मिला. इसके बाद छपरा में महावीर ट्रेडर्स, दिल्ली की जेनरल ट्रेडिंग और कोलकाता की भरतिया उद्योग व सेंट्रलाइज मर्चेंट कंपनियां शामिल हैं.
इन शहरों में सभी कंपनियों के पते फर्जी पाये गये. हकीकत में कहीं कोई कंपनी नहीं पायी गयी. कागज पर छपरा की दोनों कंपनियों ने करीब 250 करोड़ रुपये का स्क्रैप का माल नयी दिल्ली की कंपनी को बेचा. इसके बाद इतने रुपये के इसी माल को कोलकाता की भरतिया उद्योग को बेचा गया. अंत में यही माल सेंट्रलाइज मर्चेंट को बेच दिया. एक माल को कई कंपनियों को बेचते हुए दिखाते हुए करीब 400 करोड़ के टैक्स की बड़े स्तर पर चोरी की गयी.
इसके अलावा इन कंपनियों ने सरकार से कई चरणों में क्रेडिट इनपुट का फायदा लेकर करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान सरकार को कर दिया. सामान ढुलाने में भी इन कंपनियों ने गलत तरीके से इ-वे बिल को जेनरेट कर इसे दिखाया. इसमें भी टैक्स की बड़े स्तर पर चोरी की गयी. इस तरह से सभी फर्जी कंपनियों ने अलग-अलग राज्यों में अपना जाल फैला कर करोड़ों रुपये की चपत सरकार को लगायी है. स्क्रैप पर 18% जीएसटी लगता है, जबकि कंपनी 5% या इससे कम टैक्स जमा करती थी.
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