पटना : भागलपुर, गया और मुंगेर के चार बाल गृहों पर एफआइआर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Jan 2019 4:00 AM (IST)
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पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले की जांच कर रही सीबीआई ने राज्य के तीन अन्य शहरों में चल रहे चार अन्य बाल गृहों के खिलाफ भी एफआइआर दर्ज की है. इनमें गया और भागलपुर के एक-एक और मुंगेर के दो बाल गृह शामिल हैं. चारों मामलों में अलग-अलग एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू […]
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पटना : मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले की जांच कर रही सीबीआई ने राज्य के तीन अन्य शहरों में चल रहे चार अन्य बाल गृहों के खिलाफ भी एफआइआर दर्ज की है. इनमें गया और भागलपुर के एक-एक और मुंगेर के दो बाल गृह शामिल हैं. चारों मामलों में अलग-अलग एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी हैं.
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) की रिपोर्ट में इन चारों बालक गृहों की दुर्दशा की भी विस्तार से जानकारी दी गयी है. इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने पूरे मामले की जांच कर इसे सही पाया और फिर कार्रवाई की है.
एफआइआर में फिलहाल किसी को नामजद अभियुक्त नहीं बनाया गया है, लेकिन दोनों मामलों में बाल गृह के सभी दोषी कर्मियों समेत अन्य अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. भागलपुर में यह बाल गृह रूपम प्रगति समाज चलाता था, जो सिर्फ लड़कों के लिए था. यह भागलपुर इंडस्ट्रियल एरिया के रेशम नगर में मौजूद था.
गया के बाल गृह का नाम हाउस मदर ऑफ चिल्ड्रेन होम है. इसी तरह मुंगेर में दो बाल गृहों में बाबू घाट स्थित फोर्ट एरिया स्थित पनाश शेल्टर होम और चौबाग स्थित चंद्रमौली सिंह के मकान में चलने वाला शॉर्ट स्टे होम शामिल हैं. गौरतलब है कि टिस की रिपोर्ट में राज्य के 17 बाल गृहों की खराब हालत का जिक्र किया गया है.
एफआइआर में कहा गया है कि भागलपुर बाल गृह में बच्चों का यौन उत्पीड़न होता था. उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था. उन्हें हमेशा भद्दी भाषा से संबोधित किया जाता था.
जो एनजीओ इसका संचालन करता था, उसका एक स्टाफ (होम सुप्रीटेंडेट) बच्चों के पक्ष में हमेशा आवाज उठाता था, जिसे एनजीओ के सचिव ने नौकरी से हटा दिया था. जब इस बाल गृह की जांच करने टीम पहुंची, तो यहां रखी शिकायत पेटी को खोलने के लिए कहा गया.
पहले तो कर्मियों ने चाबी गुम होने की बात कही. फिर सख्ती दिखाने पर इसे खोला, तो इसमें बाल गृह के संचालन से जुड़ी दर्जनों शिकायतें पड़ी मिलीं. जांच में एनजीओ के स्तर पर वित्तीय अनियमितता की भी बात भी सामने आयी है.
बच्चों से कागज पर लिखवाये जाते थे गंदे संदेश
गया के बाल गृह में भी बच्चों के हर तरह से शोषण की बात सामने आयी है. इसका संचालन डीओआरडी करता था. यहां न तो बच्चों के पढ़ने के लिए कोई सुविधा थी और न ही उचित भोजन, दवा समेत अन्य किसी तरह की सुविधा थी.
बच्चों से मजदूरी भी करवायी जाती थी. यहां काम करने वाली महिला कर्मी बच्चों से कागज पर भद्दे संदेश लिखवाकर दूसरी महिला कर्मी को भेजवाती थी. ऐसा नहीं करने पर बच्चों को प्रताड़ित किया जाता था.
नयी महिला कर्मियों को खासतौर से बच्चों की तरफ से गंदे संदेश भेजवाये जाते थे. यहां रहने वाले बच्चों को हमेशा जेल की तरह बंद करके रखा जाता था. उन्हें कहीं आने-जाने की इजाजत नहीं थी.
मुंगेर के होम की हालत भी बदतर मिली
मुंगेर में शॉर्ट स्टे होम नॉवेल्टी वेल्फेयर सोसाइटी चलाती थी. यहां की लड़कियों ने बताया कि किसी बाथरूम में अंदर से लॉक नहीं होने से वे असुरक्षित महसूस करती हैं. जांच के दौरान एक कमरे में मानसिक रूप से पीड़ित महिला और लड़की भी मिली, जिन्हें बंद करके रखा गया था.
स्टॉफ ने दलील दी कि इन्हें उग्र होने से बचाने के लिए बंद करके रखा जाता है. दूसरे बाल गृह पनाश शेल्टर होम ‘पनाह’ की हालत भी खराब ही पायी गयी. यहां के लड़कों से जबरन सुप्रीटेंडेंट के घर में काम करवाया जाता है. एक मूक-बधिर बच्चे के चेहरे पर तीन इंच के चीरे का निशान पाया गया.
पता चला कि सुप्रीटेंडेंट ने इसे मारा है. सात साल के एक मासूम ने बताया कि उसे एक स्टॉफ ने इतना मारा कि उसके सुनने की क्षमता खत्म हो गयी. कई बच्चों के चेहरे और अन्य स्थानों पर जख्म के निशान पाये गये.
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