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मकर संक्रांति पर महागठबंधन के भोज में तेजस्वी ने पहली बार लिया कन्हैया का पक्ष, ...जानें क्यों है दोनों के बीच दूरी?

Updated at : 15 Jan 2019 2:34 PM (IST)
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मकर संक्रांति पर महागठबंधन के भोज में तेजस्वी ने पहली बार लिया कन्हैया का पक्ष, ...जानें क्यों है दोनों के बीच दूरी?

पटना : मकर संक्रांति के मौके पर सदाकत आश्रम में आयोजित चूड़ा-दही भोज में राजद नेता तेजस्वी यादव ने पहली बार जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया का पक्ष लिया. तेजस्वी यादव ने कहा कि जो भी भाजपा के खिलाफ बोलता है, उस पर मुकदमा होता है. हमारे लोगों के साथ ही ऐसा ही हो रहा […]

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पटना : मकर संक्रांति के मौके पर सदाकत आश्रम में आयोजित चूड़ा-दही भोज में राजद नेता तेजस्वी यादव ने पहली बार जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया का पक्ष लिया. तेजस्वी यादव ने कहा कि जो भी भाजपा के खिलाफ बोलता है, उस पर मुकदमा होता है. हमारे लोगों के साथ ही ऐसा ही हो रहा है.

जानकारी के मुताबिक, मकर संक्रांति के मौके पर कांग्रेस की ओर से पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में चूड़ा-दही का भोज आयोजित किया गया. इस मौके पर महागठबंधन के नेता भी शामिल हुए. दिल्ली पुलिस द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया सहित 10 लोगों पर चार्जशीट दायर किये जाने की बात भोज में शामिल राजद नेता तेजस्वी यादव से पूछे जाने पर उन्होंने पहली बार कन्हैया कुमार का पक्ष लिया. तेजस्वी यादव ने कहा कि जो भी भाजपा के खिलाफ बोलता है, उस पर मुकदमा होता है. हमारे लोगों के साथ ही ऐसा ही हो रहा है.

कन्हैया के साथ तेजस्वी ने साझा नहीं किया था मंच

कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. महागठबंधन की ओर से वह प्रत्याशी बनाये जा सकते हैं. सीपीआई के टिकट पर वह चुनाव लड़ना चाहते हैं. वहीं, तेजस्वी यादव ने अब तक उनसे दूरी बना रखी है. अभी तक दोनों ने मंच साझा नहीं किया है. कन्हैया कुमार की कार्यशैली को नापसंद करते हुए पिछले साल अक्टूबर माह में राजधानी स्थित गांधी मैदान में आयोजित सीपीआई की रैली में तेजस्वी यादव ने मंच साझा नहीं किया था. इस रैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद जैसे बड़े नेताओं ने शिरकत की थी. वहीं, राजद की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे और उपाध्यक्ष तनवीर हसन को अंतिम समय में रैली में जाने का संदेश आया. इससे स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव रैली में कन्हैया के साथ मंच साझा करने से कतरा गये. हालांकि, महागठबंधन की एकता दिखाने के लिए उन्होंने दूसरे दर्जे के नेताओं को रैली में भेज दिया था.

क्या है नापसंद करने की वजह?

बताया जाता है कि कन्हैया कुमार से तेजस्वी यादव खफा हैं. उन्होंने जरूरी मुद्दे पर बातचीत के लिए एक बार कन्हैया को फोन किया. कन्हैया के फोन को किसी दूसरे व्यक्ति ने रिसीव किया और कहा कि बाद में बात करा देगें. इसके बाद तेजस्वी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कन्हैया ने कैसा पीए रख लिया है, जो मेरी राजनीतिक हैसियत भी नहीं जानता? साथ ही उन्होंने गुस्सा जताते हुए यहां तक कहा था कि इस आदमी के साथ काम करने में परेशानी होगी. उनकी प्रतिक्रिया से लगता है कि यह शख्स गंभीर स्वभाव का नहीं हैं. हालांकि, बाद में कन्हैया के फोन करने पर उन्होंने पहला सवाल यही पूछा कि अपना मोबाइल साथ क्यों नहीं रखते? कैसे पीए रखे हैं, जो मुझे नहीं जानते? इसके बाद कन्हैया ने अफसोस भी जताया था.

तेजस्वी की सार्वजनिक मंच पर सराहना कर चुके हैं कन्हैया

कन्हैया कुमार तेजस्वी यादव की जमकर सराहना कर चुके हैं. एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कन्हैया कुमार ने तेजस्वी को बिना किसी विवाद के बिहार में विपक्ष का चेहरा बताया. साथ ही कहा कि बिहार की जनता और विपक्ष के नेता उन्हें स्वीकार कर रही है. बिहार में सत्ता परिवर्तन होने पर तेजस्वी बिहार का नेतृत्व करेंगे, इसमें संशय नहीं है.

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