पटना : स्कूली बच्चे आउटडोर गेम्स में नहीं ले रहे हैं दिलचस्पी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jan 2019 6:51 AM (IST)
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राजेश कुमार सिंह पटना : स्वस्थ दिमाग के लिए आउटडोर गेम्स भी जरूरी है. स्कूलों में आउटडोर गेम्स को बढ़ावा दिया जा रहा है. बावजूद इसके क्लास व उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्कूली बच्चों का खेलना-कूदना कम हो रहा है. बिहार व झारखंड दोनों राज्यों में इस तरह की समस्याएं मिल रही हैं. गेम्स पीरियड […]
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राजेश कुमार सिंह
पटना : स्वस्थ दिमाग के लिए आउटडोर गेम्स भी जरूरी है. स्कूलों में आउटडोर गेम्स को बढ़ावा दिया जा रहा है. बावजूद इसके क्लास व उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्कूली बच्चों का खेलना-कूदना कम हो रहा है.
बिहार व झारखंड दोनों राज्यों में इस तरह की समस्याएं मिल रही हैं. गेम्स पीरियड में बच्चे आउटडोर गेम्स में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. इसका खुलासा नेशनल एचीवेंट सर्वे (एनएएस) रिपोर्ट में हुआ है. बिहार, झारखंड सहित यह सर्वे देश के सभी 36 राज्यों के चुनिंदा सरकारी स्कूलों में किया गया.
22 प्रतिशत बच्चे खेल से दूर
बिहार में कक्षा आठ के 22 प्रतिशत बच्चे आउटडोर गेम्स से दूर हैं. गेम्स पीरियड होने के बावजूद ये बच्चे खेलने नहीं जा रहे हैं. कक्षा तीन के 18 और कक्षा पांच के 19 प्रतिशत बच्चे गेम्स पीरियड में आउटडोर गेम्स से दूरी बनाये रखते हैं. झारखंड में स्थिति इससे थोड़ी अच्छी है.
झारखंड में कक्षा तीन के 15, पांच के 16 और आठ के 17 प्रतिशत बच्चे गेम्स पीरियड में खेलने बाहर नहीं जाते.
– बिहार में कक्षा आठ के पांच प्रतिशत बच्चे नहीं जाना चाहते स्कूल : एनएएस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में कक्षा आठ के पांच प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाना चाहते. कक्षा पांच के छह और कक्षा तीन के आठ प्रतिशत बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं.
– आउटडोर गेम्स के फायदे : आउटडोर गेम्स के जरिये घर के सदस्यों के अलावा बाहर के लोगों, बाहर की दुनिया से भी रूबरू होने का मौका मिलता है
– आउटडोर गेम्स फिट रखने में तो मददगार है ही साथ ही ये बीमारियों से भी बचाता है, आउटडोर गेम्स से बच्चों का आत्ममविश्वस बढ़ता है.
बच्चों के साथ खुद को शामिल करके खेल के प्रति प्रेरित किया जा सकता है. पढ़ाई का बोझ भी बढ़ता जा रहा है. इससे बच्चे कम रूचि ले रहे हैं
– डॉ मनोज कुमार, मनोचिकित्सक
उम्र बढ़ने के साथ कम होती जाती है परेशानी
स्कूल जाने में होने वाली परेशानी को लेकर भी बच्चे गंभीर दिखे. रिपोर्ट की मानें तो कक्षा तीन के 23 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि उन्हें स्कूल जाने के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी तरह 22 प्रतिशत कक्षा पांच के और 16 प्रतिशत कक्षा आठ के बच्चों ने परेशानी की बात स्वीकार की.
इससे साफ है कि बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है, स्कूल जाने के दौरान आने वाली परेशानी कम होती जाती है. झारखंड में कक्षा तीन के 23, कक्षा पांच और आठ के 22 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल जाने के दौरान होने आने वाली समस्याएं गिनायीं.
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