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पटना : जू के पशुपालक व डॉक्टर को बर्ड फ्लू का खतरा, जानें लक्षण, ऐसे रहें सावधान

Updated at : 27 Dec 2018 6:35 AM (IST)
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पटना : जू के पशुपालक व डॉक्टर को बर्ड फ्लू का खतरा, जानें लक्षण, ऐसे रहें सावधान

छह मोराें की मौत के बाद पर्यटकों के लिए जू कितना खतरनाक है इसकी जांच चल रही है सिविल सर्जन की टीम ने खून का सेंपल जांच के लिए भेजा आरएमआरआइ इधर स्वास्थ्य विभाग व सिविल सर्जन की टीम पहुंची जू का निरीक्षण करने पटना : शहर के चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने […]

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छह मोराें की मौत के बाद पर्यटकों के लिए जू कितना खतरनाक है इसकी जांच चल रही है
सिविल सर्जन की टीम ने खून का सेंपल जांच के लिए भेजा आरएमआरआइ
इधर स्वास्थ्य विभाग व सिविल सर्जन की टीम पहुंची जू का निरीक्षण करने
पटना : शहर के चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद अब वहां के पशुपालक, वेटनरी डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ पर भी वायरस का खतरा मंडराने लगा है.
खास तौर पर माेर के केयर टेकर में भी इसकी आशंका हो सकती है. जू प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने पशुपालक, पारा मेडिकल स्टाफ और वेटनरी डॉक्टर का ब्लड सेंपल आरएमआरआइ सेंटर भेज दिया है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि इन लोगों को बर्ड फ्लू है या नहीं.
पोस्टमार्टम के कारण जांच के दायरे में आये कर्मी : चिड़ियाघर में मोर पक्षियों की मौत के बाद पटना के सिविल सर्जन डॉ पीके झा व स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण करने पहुंची. टीम ने जू के सभी पक्षियों का निरीक्षण किया और जांच के लिए सेंपल लिया. जांच के बाद संभावित खतरे को लेकर करीब दो घंटे तक बंद कमरे में अधिकारियों की बैठक की गयी.
वहीं बातचीत के दौरान पता चला कि जिन छह मोरों की मौत हुई है, उनका पोस्टमार्टम एक वेटनरी डॉक्टर, दो पारा मेडिकल स्टाफ, दो केयर टेकर आदि स्टाफ की मौजूदगी में किया गया है. पोस्टमार्टम के दौरान पक्षी के करीब आने से बर्ड फ्लू के एच5एन1 वायरस संक्रमण का खतरा है. रिपोर्ट एक-दो दिन में आ जायेगी.
बाकी बचे मोरों को दूसरे बाड़ों में किया गया शिफ्ट: चिड़ियाघर में रहने वाले मोर के पिंजड़े को सील कर दिया गया है. वहीं बाकी बचे मोरों को आसपास के दूसरे बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है. फिलहाल जू प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि यहां मौजूद बाकी हजारों पक्षियों और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बर्ड फ्लू कितना खतरनाक हो सकता है. बाकी परिंदों की भी जांच की जा रही है. जू प्रशासन को यह भी डर सता रहा है कि कहीं और पक्षियों में इन्फेक्शन न फैल गया हो.
बर्ड फ्लू के 3 वायरस काफी खतरनाक : सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार झा ने बताया कि बर्ड फ्लू तीन तरह के वायरस से होता है. एवियन इन्फ्लुएंजा, एच5एन1 और इन्फ्लुएंजा ए वायरस. इसमें एच5एन1 सबसे खतरनाक माना जाता है. बर्ड फ्लू का वायरस पक्षी से इंसान में फैलता है.
बर्ड फ्लू का वायरस इतना खतरनाक होता है कि चपेट में आये शख्स की जान तक जा सकती है. वायरस से फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है और सांस लेने में दिक्कत होती है. बुखार आना, खांसी आना, गला खराब होना, मांसपेशियों में दर्द और कन्जंक्टिवाइटिस के लक्षण होते हैं.
दवाओं का किया जा रहा छिड़काव: वहीं घटना के दूसरे दिन जू के लगभग सभी इलाकों में दवा का छिड़काव किया गया. प्रधान मुख्य वन संरक्षक डीके शुक्ला ने बताया कि सफाई के बाद फिर से सभी परिंदों की जांच होगी, अतिरिक्त वेटनरी चिकित्सक और विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है. पिंजड़े और बाड़े साफ किये जा रहे हैं. संक्रमण रोकने के लिए एंटी वायरस का छिड़काव हो रहा है.
दूसरे दिन भी बंद रहा चिड़ियाघर
बर्ड फ्लू के कारण से दूसरे दिन बुधवार को भी पटना जू बंद रहा. टिकट काउंटर से लेकर मुख्य द्वार तक आने जाने की मनाही रही. इस कारण कई लोग निराश हो कर वापस लौट गये. किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली. खास कर आगामी नये साल के मौके पर जू बंद होने के कारण आम लोग निराश हैं. वायरस निरोधक स्प्रे व दवा का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि वायरस को समाप्त किया जा सके.
लोगों की जानकारी के लिए मुख्य गेट पर इसकी नोटिस लगा दी गयी है. आम लोगों के लिए जू सामान्य स्थिति होने तक के लिए बंद कर दिया गया है. जांच जारी है. इसके लिए एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट मदद कर रहा है. सभी सैंपल को कलेक्ट करके भोपाल भेजा जा रहा है. जू के अंदर बने सभी पिंजड़ों में स्वच्छता का काम चल रहा है

अमित कुमार, डायरेक्टर, पटना जू
…बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ा

डॉक्टरों ने चिकन व अंडा खाने वाले लोगों को किया सावधान
मुंगेर व पटना में ताबड़तोड़ हुए पक्षियों की मौत के बाद शहर में भी बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ता जा रहा है. अब तक पटन जू में 6 मोर की मौत हो चुकी है. कहीं फिर से वायरस पॉजिटीव नहीं मिल जाये इसके लिए डॉक्टरों ने चिकन और अंडों पर हेल्थ एडवाइजरी जारी की है. सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार झा ने बताया कि चिकन और अंडे अधपका न खायें. साथ ही कई अन्य सुझाव भी दिये हैं.

इस तरह से खाएं चिकन
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि अच्छी तरह से पके हुए चिकन या पोल्ट्री के पक्षी के अच्छी तरह से पके हुये मांस का सेवन करने में कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि आधा पका हुआ चिकन या आधा पका हुआ अथवा कच्चा अंडा खाने से बचें. पका चिकन खाने से खतरा नहीं है, यह अच्छी तरह से प्रेशर कुकर में 25 से 30 मिनट पका हुआ होना चाहिए.
क्या-क्या होते हैं लक्षण मरीज को
तेज बुखार चढ़ता है, जोकि 100 से ऊपर होता है. गले में कफ बनना शुरू हो जाता है, जिसके चलते खराश हो जाती है. पूरा शरीर दर्द करने लगता है और अकड़न सी होती है. काफी थकान भी हो जाती है. नाक बहना और सिर दर्द भी लक्षण हैं. कभी-कभी उलटी भी होती है.
सात महीने पहले केंद्र की चेतावनी पर अफसरों ने बंद कर ली थीं आंखें
मुंगेर जिले के असरगंज और फिर पटना के चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू की पुष्टि के सात महीने पहले ही केंद्र सरकार ने इस बीमारी की रोकथाम के संबंध में बिहार सरकार को चेतावनी जारी कर दी थी. इसके बावजूद केंद्र की चेतावनी को राज्य सरकार के महकमों ने नजरअंदाज कर दिया. उनकी नींद तब खुली, जब मुर्गियों और मोरों की मौत हो गयी. इसके बाद 26 दिसंबर को विज्ञापनों के माध्यम से पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने एडवाइजरी जारी की. वहीं स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हुआ. केंद्रीय कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विभाग ने पांच जून, 2018 को ही सभी राज्यों को पत्र लिखकर बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) एच5एन1 और एच5एन8 वायरस के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया था.
इन वायरसों से देश को मुक्त करने की बात कही गयी थी. यह पत्र बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव के कोषांग ने आठ जून को प्राप्त किया था. इसके बाद केंद्रीय कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विभाग ने पांच सितंबर, 2018 को इस संबंध में फिर से बिहार सहित सभी राज्यों को एवियन इन्फ्लूएंजा के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया. यह पत्र छह सितंबर को बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव के कोषांग ने प्राप्त किया था.
मुंगेर जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि
मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड की अमैया पंचायत के गोरहो गांव के एक पोल्ट्री फॉर्म में बर्ड फ्लू की शिकायत मिली. वहां का सैंपल की जांच के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि भोपाल के एनआईएचएसएपीएल ने 19 दिसंबर को की. वहां मुर्गा, बत्तख और कौआ मिलाकर करीब 588 बर्ड्स की कलिंग (संख्या घटाने के लिए मारना) करायी गयी.
मुंगेर के बाद पटना चिड़ियाघर में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है. साथ ही सभी जिला के पोल्ट्री फॉर्म और संभावित स्थानों पर पक्षियों से खून के नमूने लेना शुरू कर दिया है. इन्हें कोलकाता स्थित प्रयोगशाला भेजा जायेगा.
विनोद सिंह गुंजियाल, निदेशक, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

चिड़ियाघर प्रशासन पर खड़े हुए सवाल
जब पहले मोर की मौत हुई उसके इलाज के लिए पहले भोपाल या अन्य जगहों पर रेफर क्यों नहीं किया गया
जानवरों के लिए अलग से पशु कर्मी रखे गये हैं, बीमारी की भनक उनको क्यों नहीं लगी
इलाज के लिए अलग से पशु डॉक्टर हैं, फिर भी उनकी मौजूदगी में लगातार 6 मोरों की मौत कैसे हो गयी
पशुओं की स्वास्थ्य देखभाल के लिए रजिस्टर मेंटेंन होते हैं, क्या वह रजिस्टर देखा गया या नहीं
केंद्रीय चिड़िया प्राधिकरण की गाइड लाइन के अनुसार जू परिसर में ही पशु डॉक्टर को रहना चाहिए, लेकिन जानकार बताते हैं डॉक्टर बाहर रहते हैं.
पटना : संक्रमण से बचने को जू कर्मियों को मिली वैक्सीन
पटना : चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू के बाद सिविल सर्जन डॉ पीके झा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने कर्मियों के स्वास्थ्य का जायजा लिया. टीम ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को टॉमी फ्लू वैक्सीन दिया. इसकी जानकारी देते हुए जू के निदेशक अमित कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिये गये सभी वैक्सीन कर्मचारियों को दे दिये गये हैं.
संक्रमण से बचने के लिए यह वैक्सीन लगाये गये हैं. अमित कुमार ने कहा कि पिछले 24 घंटे में एक भी पक्षी की मौत नहीं हुई है. वहीं, अंतिम मौत को देखा जाये, तो 72 घंटे में किसी भी पक्षी की मौत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि आठ दिनों तक यदि जानवरों की मौत नहीं होती है, तो बाकी पक्षियों का सैंपल लिया जायेगा. फिलहाल जिन पिजरे में मोर रहते थे, उन सबके सैंपल ले लिये गये हैं.
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