समझौते के राह पर CO, नई सरकार के सामने रखी 2 मांगे

Published by :Pratyush Prashant
Published at :17 Apr 2026 10:35 AM (IST)
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Bihar News 17 April 2026 (1)

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार

Bihar News: बिहार में पिछले डेढ़ महीने से जारी राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब खत्म होने की ओर बढ़ती दिख रही है. बिहार राजस्व सेवा संघ ने नई सरकार के सामने अपनी दो प्रमुख मांगें रखते हुए साफ संकेत दिया है कि यदि सकारात्मक पहल होती है, तो वे तुरंत काम पर लौट सकते हैं.

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Bihar News: बिहार में पिछले डेढ़ महीने से राज्यभर के राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच गतिरोध कम होती दिख रही हैं. बिहार राजस्व सेवा संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि नई सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाती है, तो वे तुरंत काम पर लौटने को तैयार हैं.

जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और मापी जैसे महत्वपूर्ण कामों के ठप होने से आम आदमी से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर तक में जो गतिरोध पैदा हुआ था, उसके अब जल्द ही सुलझने की उम्मीद है.

नई सरकार से उम्मीद, बातचीत को तैयार अफसर

राजस्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि वे सरकार के साथ संवाद के लिए पूरी तरह तैयार हैं. संघ के अध्यक्ष आदित्य शिवम शंकर के अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर सहमति जताती है और निलंबन जैसी कार्रवाई वापस ली जाती है, तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी.

इस पूरे आंदोलन की जड़ में डीसीएलआर (डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स) पद को लेकर विवाद है. नियम के मुताबिक 9 साल की सेवा पूरी करने के बाद राजस्व अधिकारियों को इस पद पर परमोशन मिलनी चाहिए, लेकिन फिलहाल इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है. यही असंतोष हड़ताल का मुख्य कारण बना.

कैबिनेट फैसले पर उठे सवाल

संघ की पहली मांग उस कैबिनेट प्रस्ताव को वापस लेने की है, जिसमें डीसीएलआर का पद प्रशासनिक सेवा को सौंप दिया गया था. राजस्व अधिकारी चाहते हैं कि इस पद को फिर से उनके लिए आरक्षित किया जाए, ताकि सेवा नियमों का पालन हो सके.

दूसरी बड़ी मांग जिला भू-अर्जन अधिकारी के पद को लेकर है. संघ का कहना है कि यह पद राजस्व सेवा के लिए निर्धारित है, लेकिन यहां भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है.

हड़ताल से ठप पड़े हैं जमीन के काम

राजस्व अधिकारियों (CO) ने साफ कर दिया है कि वे विकास कार्यों में बाधा नहीं बनना चाहते, बस अपनी सेवा शर्तों में न्याय की मांग कर रहे हैं. पुरानी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलते ही CO अंचलों में मोर्चा संभाल लेंगे. अगर ऐसा होता है, तो अगले कुछ दिनों में बिहार के अंचल कार्यालयों में रौनक लौटेगी और जनता के अटके हुए जमीन संबंधी काम तेजी से निपट सकेंगे.

9 मार्च से चल रही इस हड़ताल का असर सीधे आम लोगों पर पड़ा है. जमीन रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन और अन्य राजस्व कार्य लगभग ठप हो गए हैं. हालांकि विभाग का दावा है कि 1100 में से 589 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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