ePaper

सूखे की मार : 42 हजार मीटरिक टन धान की होगी खरीद करेगा प्रशासन

Updated at : 27 Nov 2018 9:28 AM (IST)
विज्ञापन
सूखे की मार : 42 हजार मीटरिक टन धान की होगी खरीद करेगा प्रशासन

आठ प्रखंडों में खराब है स्थिति, 1750 और 1770 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है दर का निर्धारण पटना : समय पर बारिश नहीं होने और कई क्षेत्रों में सूखे का पूरा प्रभाव रहने के कारण इस बार धान उत्पादन पर इसका पूरा असर पड़ने वाला है. अनुकूल बारिश नहीं होने के कारण प्रशासन इसका […]

विज्ञापन
आठ प्रखंडों में खराब है स्थिति, 1750 और 1770 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है दर का निर्धारण
पटना : समय पर बारिश नहीं होने और कई क्षेत्रों में सूखे का पूरा प्रभाव रहने के कारण इस बार धान उत्पादन पर इसका पूरा असर पड़ने वाला है. अनुकूल बारिश नहीं होने के कारण प्रशासन इसका अंदाजा लगा रहा है कि इस बार का उत्पादन 50 फीसदी कम होगा है.
वहीं सूबे के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से इस बार जो सभी जिलों के लिए धान खरीद करने का लक्ष्य दिया गया है, उससे भी सूखे की स्थिति स्पष्ट हो गयी है. इस बार जो सरकार के विभाग की ओर से फसल खरीद करने के लिए पटना जिले को मात्र 42 हजार मीटरिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि बीते वर्ष 2017-2018 में धान खरीद का लक्ष्य 90 हजार मीटरिक टन दिया गया है.
वहीं इसके एवज में प्रशासन की ओर से एक लाख क्विंटल से अधिक की खरीद भी की गयी थी. ऐसे में स्पष्ट हो गया है कि इस जिले में सूखे का असर काफी व्यापक है. विभाग की ओर से धान खरीद के दर का भी निर्धारण कर दिया गया है. विभाग की ओर से जारी पत्र में साधारण धान के लिए 1750 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद करने को कहा गया है.
इसके अलावा धान के ए ग्रेड के लिए 1770 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद का रेट रखा गया है. इसके साथ ही विभाग ने धान अधिप्राप्ति के लिए भी 15 नवंबर से शुरू करने और अगले वर्ष 31 मात्र तक खरीद करने की छूट दी है. इसके अलावा पत्र में कहा गया है कि विशेष परिस्थिति में 31 जुलाई तक धान की खरीद की जा सकती है. गौरतलब है कि धान की खरीद पंचायत स्तर पर पैक्स और प्रखंड स्तर पर व्यापार मंडल से की जाती है. इसके बाद पैक्स व व्यापार मंडल के तैयार धान को सीएमआर संग्रहण केंद्र में जाम कराया जाता है. जिला प्रशासन की ओर से जिले के 23 प्रखंडों में आठ प्रखंडों को सूखे से प्रभावित होने की पुष्टि की गयी है. जिलाधिकारी कुमार रवि के निर्देश पर फुलवारीशरीफ, दनियावां, बिक्रम, धनरूआ, नौबतपुर, पालीगंज, दुल्हिन बाजार एवं मसौढ़ी को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. इस प्रखंडों में अब गेहूं के बजाय मसूर, चना, राई और सरसों के उत्पादन पर रोज देने के लिए कहा गया है. वहीं सूखाग्रस्त प्रखंडों में खरीफ मौसम में 1210 क्विंटल चना बीज, 1303 क्विंटल मसूर बीज, 163 क्विंटल मटर बीज एवं 15.45 क्विंटल राई बीज के अतिरिक्त मांग कृषि विभाग से की गयी है. इधर, जिला प्रशासन ने किसानों को डीजल सब्सिडी देने के लिए तेजी जाने के निर्देश दिये हैं. अब तक चार करोड़ 60 लाख रुपये का डीजल अनुदान बांटा जा चुका है. इसमें 65245 आवेदन प्राप्त किया गया था, जिसमें 35894 आवेदन स्वीकृत किया गया.
इसके अलावा अभी भी 7322 डीजल सब्सिडी के लगभग का मामला अटका हुआ है. वहीं बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत लोगों को अभी अनुदान मिलने में दो माह से अधिक का समय लगने की संभावना है. जिले में 19 हजार 550 आवेदनों को स्वीकृत किया गया है. जिसकी प्रखंड स्तर से जांच के बाद आगे की कार्रवाई फाइनल की जायेगी.
मोकामा : दलहनी फसल की बर्बादी देखकर किसान मिथिलेश सिंह काे दौरा पड़ने के बाद गंभीर हालत में पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पीड़ित किसान मूल रूप से मोकामा के मोलदियार टोला के निवासी हैं.
दरअसल टाल में कीड़ाखोरी की वजह से उनकी 25 बीघे में लगी फसलें नष्ट हो गयीं. उन्होंने पैदावार की उम्मीद में दोबारा कर्ज उठाकर दलहन की बुआई की. दुर्भाग्यवश दोबारा लगायी गयी फसल को भी कीड़े चट कर गये. रिश्तेदार टुनटुन सिंह ने बताया कि गहरा सदमा लगने से वह खेत से लौटते वक्त पछाड़ खाकर गिर पड़े थे.
पिछले वर्ष टाल में पैदावार तो अच्छी हुई थी, पर बाजार में उपज की कीमत नहीं मिलने से उन्हें खेती की लागत भी ऊपर नहीं हो सकी थी. मिथिलेश सिंह के अलावा अन्य किसानों के भी दयनीय हालात है.
इस बार किसानों ने कलेजे पर पत्थर रखकर दलहन की बुआई शुरू की थी, लेकिन टाल में कीड़े का प्रकोप भयावह हो गया. खेतों में दलहन के शिशु पौधे नष्ट हो गये. इसके बावजूद किसानों ने हौसलापूर्वक खेतों में पटवन किया. वहीं, दलहन की दोबारा बुआई की. किसानों का यह प्रयास भी निरर्थक साबित रहा. खेती में बार–बार नुकसान को लेकर किसानों का धैर्य टूटने लगा है.
आर्थिक नुकसान से लगा सदमा
किसान मिथिलेश सिंह को आशा की किरण नहीं दिखाई पड़ी. उन्होंने पुश्तैनी जमीन के अलावा शिवनार, पैजुना टाल में पट्टे पर खेत लेकर दलहन बुआई की थी.
लगातार दूसरी बार बुआई करने से पटवन, बीज व जुताई का खर्च 50 हजार रुपये बढ़ गया, लेकिन दूसरी बार भी फसल कीड़ाखोरी से बेकार हो गयी. पीड़ित किसान के परिवार के सदस्य पंकज सिंह ने बताया कि बैंक व आम लोगों से तकरीबन दो लाख रुपये पहले ही उधार लेकर उन्होंने खेती की थी, लेकिन उम्मीद से विपरीत परिणाम से वह काफी घबरा गये. उन्हें गहरा सदमा लगा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन