स्कूली बसों में न महिला गार्ड, न ही दी जाती है पॉक्सो ई-बूथ की जानकारी
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के निर्देश के बाद भी शहर के स्कूलों व स्कूली बसों में नियमों व प्रावधानों की अनदेखी की जाती है. ऐसा स्कूल से लेकर स्कूली बसों में आम तौर पर देखा जा सकता है. स्कूल में बच्चों को न ठीक से पॉक्सो ई-बूथ की जानकारी दी जाती है […]
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पटना : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के निर्देश के बाद भी शहर के स्कूलों व स्कूली बसों में नियमों व प्रावधानों की अनदेखी की जाती है. ऐसा स्कूल से लेकर स्कूली बसों में आम तौर पर देखा जा सकता है. स्कूल में बच्चों को न ठीक से पॉक्सो ई-बूथ की जानकारी दी जाती है और न ही बसों में प्रशिक्षित महिला गार्ड की बहाली की गयी है. हालांकि सीबीएसई पूर्व में ही स्कूलों को निर्देश दे चुका है.
- स्कूल नहीं करते नियमों का पूरी तरह पालन
- असेंबली में बच्चों को नहीं दी जाती जानकारी
सीबीएसई ने पूर्व में ही स्कूलों को प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पॉक्सो) अधिनियम-2012 के तहत निर्देश व गाइडलाइन जारी किया था. इसके तहत बच्चों समेत अभिभावकों व कर्मचारियों को समय-समय पर जानकारी दी जानी है. वहीं स्कूल के नोटिस बोर्ड पर तथा सुबह की असेंबली में बच्चों को इसकी जानकारी दी जानी है. लेकिन अभिभावकों की मानें, तो स्कूलों द्वारा न उन्हें जानकारी दी जाती है और सुबह की असेंबली में बच्चों को भी इस संबंध में नहीं बताया जाता है.
एजेंसी की बसें बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं स्कूल
दूसरी ओर बसों की बुकिंग तो स्कूल काउंटर से होती है, लेकिन जब कोई जवाबदेही आती है, तो स्कूल किसी एजेंसी की बस होने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं. स्कूलों का जवाब होता है कि बस उनकी नहीं है. बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्कूली बसों में प्रशिक्षित महिला गार्ड रखने का निर्देश है, बावजूद एक भी बस में इस निर्देश का पालन नजर नहीं आता. बसों में आवश्यक उपकरण भी नहीं लगाये जाते हैं. यहां तक कि परिपक्व व्यक्ति के बजाय चौदह-पंद्रह वर्ष के किशोरों को भी हेल्पर कंडक्टर के रूप में रख लिया जाता है.
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