पटना : सूबे के हर गांव की सड़क होगी बेहतर, नयी मेंटेनेंस नीति लागू

Updated at : 05 Nov 2018 8:41 AM (IST)
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पटना : सूबे के हर गांव की सड़क होगी बेहतर, नयी मेंटेनेंस नीति लागू

गांव की सड़कों पर हाईवे जैसा आराम, इंटरनेशनल स्तर की सुरक्षा पटना : सरकार ने बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 लागू कर दी है. राज्य में गांवों की सड़कें भी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनायी जायेगी. वर्तमान में जो सड़कें हैं उनकी इंटरनेशनल मानक से ही मरम्मत की जायेगी. ट्रैफिक के दबाव के हिसाब […]

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गांव की सड़कों पर हाईवे जैसा आराम, इंटरनेशनल स्तर की सुरक्षा
पटना : सरकार ने बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 लागू कर दी है. राज्य में गांवों की सड़कें भी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनायी जायेगी. वर्तमान में जो सड़कें हैं उनकी इंटरनेशनल मानक से ही मरम्मत की जायेगी. ट्रैफिक के दबाव के हिसाब से उनको उच्चीकृत किया जायेगा.
राज्य में सभी प्रकार की सड़कें अनुरक्षण में रहेंगी. अब गांवों की सड़कें भी ऐसी चिकनी-चुपड़ी होंगी कि लोग उन पर नेशनल और स्टेट हाईवे की तरह सुगम यात्रा कर सकेंगे. आगामी वित्तीय वर्ष से बिहार सरकार सड़क निर्माण के कुल बजट में से नयी सड़कों के निर्माण पर 70 और मरम्मत पर 30 फीसदी बजट खर्च करेगी. अभी तक सड़कों की मरम्मत पर दस फीसदी ही बजट खर्च हो रहा है. सभी सड़कें अनुरक्षण में शामिल भी नहीं थीं.
आउटपुट बेस्ड होगा निर्माण, मशीनों से होगी मरम्मत
ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव विनय कुमार ने बताया कि 36 हजार किमी की सड़क अनुरक्षण अवधि से बाहर आ गयी है. इनकी नयी नीति के तहत मरम्मत होगी. नवंबर में काम शुरू कराया जायेगा.
निर्माण पर प्रति किमी 75 और मरम्मत पर 35 लाख औसत खर्च आयेगा. ग्रामीण सड़कों का निर्माण अब आउटपुट बेस्ड होगा. यानी अब ठेकेदार को बताया जायेगा कि सड़क किस स्तर और मानक के चाहिए. अब जो सड़क बनेंगी उनमें प्रति किमी 400 सेमी से ज्यादा के बंप्स नहीं होंगे. इसमें 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने पर झटके नहीं लगते हैं. मरम्मत का काम भी मशीनों से होगा.
रोड पैकेजिंग सिस्टम लागू
ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव विनय कुमार ने बताया कि देश में पहली बार रोड मेंटनेंस के लिए पैकेज बनाने जा रहे हैं. अब टेंडर एक सड़क का नहीं पूरे प्रखंड या सब डिवीजन की सड़कों के लिये निकाले जायेंगे. यह व्यवस्था इसी माह से लागू हो रही है. सड़कों की मरम्मत पर अभी चार हजार करोड़ प्रति वर्ष खर्च आयेगा, जो कुछ साल बाद घट कर तीन हजार करोड़ हो जायेगा. वर्तमान में विभाग के पास सड़कों के लिये 10 हजार करोड़ रुपये हैं. सचिव ने बताया कि राज्य में 1.20 लाख ग्रामीण सड़क बनाया जाना है. 74 हजार बनायी जा चुकी हैं. करीब
18 हजार किमी सड़कों पर काम जारी है. करीब 20 हजार सड़क बची हैं. मार्च 19 तक इनके निर्माण की स्वीकृति दे दी जायेगी. डेढ़ वर्ष में इनका निर्माण पूरा कर लिया जायेगा.
सड़कों को किया जायेगा चौड़ा, बढ़ेगी मजबूती
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विनय कुमार ने कहा कि बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 को लेकर विस्तार से जानकारी दी. उन्हाेंने कहा कि जितना यातायात होगा उसी के अनुपात में सड़क की मरम्मत की जायेगी. यानी ट्रैफिक अधिक है तो 3.5 मीटर की सड़क को भी 5.5 मीटर चौड़ा किया जा सकेगा. उसकी मजबूती बढ़ायी जायेगी.
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