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छह माह बाद बुधवार को सबसे ज्यादा प्रदूषित रही पटना की हवा, एयर इंडेक्स वैल्यू 220 के पार

Updated at : 01 Nov 2018 7:08 AM (IST)
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छह माह बाद बुधवार को सबसे ज्यादा प्रदूषित रही पटना की हवा, एयर इंडेक्स वैल्यू 220 के पार

पटना : करीब छह माह बाद एक बार फिर राजधानी पटना में वायु प्रदूषण उच्चतम स्तर पर है. 31 अक्टूबर को राजधानी का एयर इंडेक्स वैल्यू 220 पार कर गया. यह साबित करने के लिए काफी है कि शहर की वायु बेहद खराब है. अभी 15 दिन पहले तक यह इंडेक्स सौ के कुछ ऊपर […]

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पटना : करीब छह माह बाद एक बार फिर राजधानी पटना में वायु प्रदूषण उच्चतम स्तर पर है. 31 अक्टूबर को राजधानी का एयर इंडेक्स वैल्यू 220 पार कर गया. यह साबित करने के लिए काफी है कि शहर की वायु बेहद खराब है.
अभी 15 दिन पहले तक यह इंडेक्स सौ के कुछ ऊपर था. इसे मोडरेट अर्थात प्रदूषण के हिसाब से संवेदनशील माना गया था. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रियल टाइम आंकड़े बताते हैं कि राजधानी की हवा में पीएम 2़ 5 की मात्रा चरम पर जा पहुंची है. राजधानी में शाम को पीएम 2़ 5 की मात्रा सामान्य लिमिट से करीब तीन गुना 134 से ऊपर थी. आदर्श स्थिति में यह आंकड़ा पचास से ऊपर नहीं जाना चाहिए. हवा में अघुलनशील मैटर, जिसमें वाहनों के धुएं में मिलने वाले सल्फर एवं दूसरे तत्वों के कण और धूल के महीन कणों की मात्रा ज्यादा हो गयी है.
उल्लेखनीय है कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट ने हाल ही में खराब हवा से होने वाले नुकसान पर रिपोर्ट जारी की है. पटना दुनिया के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में भी शामिल रहा है. यहां की हवा में बेंजिन, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर अधिक पाया गया. सोलर रेडिएशन भी अधिक पाया गया.
क्या है पीएम 2.5
पीएम 2़ 5 (पार्टिकुलेट मैटर ) हवा में सर्वाधिक खतरनाक कणों से मिल कर बनता है. इन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता है. इनका साइज 2़ 5 माइक्रॉन होता है. ये साइज हवा की मोटाई से तीस गुना कम होती है. ये शरीर में आसानी से घुस सकते हैं.
– इनका निर्माण : वाहनों के पहिये और कूड़ा जलाने से – क्रिस्टल धातु एवं मिट्टी के कण – कार्बन तत्वों मसलन कार एवं ट्रक, टेंपो आदि के धूएं से यह मैटर निकलता है – खास तौर पर डीजल वाहन से ये तत्व अधिक निकलते हैं. – ये ठोस एवं द्रव्य रसायनों से बनते हैं.
क्या है पीएम
2.5 का असर
– ये कण शरीर में आराम से पहुंच जाते हैं. इनसे सांस के रोग अधिक होते हैं
– दमा और फेफड़े की कार्यक्षमता पर खतरनाक असर पड़ता है
– धुएं में अधिक कार्बन निकलने से कैंसर
की आशंका भी बढ़ जाती है
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