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प्रवासी बिहारी अपनी जड़ को पहचानें : सुशील मोदी

Updated at : 30 Oct 2018 6:53 PM (IST)
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प्रवासी बिहारी अपनी जड़ को पहचानें : सुशील मोदी

पटना : मॉरीशस में भोजपुरी भाषी संघ की ओर से आयोजित भोजपुरी भाषियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने वहां के प्रवासी बिहारियों से अपनी जड़ को पहचानने का आह्वान किया. "सर्च योर रुट" के तहत प्रवासी बिहारी अपने परिजनों व पुरखों की पहचान कर अपनी जड़ से जुड़ें. […]

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पटना : मॉरीशस में भोजपुरी भाषी संघ की ओर से आयोजित भोजपुरी भाषियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने वहां के प्रवासी बिहारियों से अपनी जड़ को पहचानने का आह्वान किया. "सर्च योर रुट" के तहत प्रवासी बिहारी अपने परिजनों व पुरखों की पहचान कर अपनी जड़ से जुड़ें. उन्होंने कहा कि करीब पौने दो सौ साल पहले 1834 के आस-पास अंग्रेजों ने बिहार के मजदूरों को पानी के जहाज में भर कर यहां लाया. यहां आने वाले लोग गिरमिटिया मजदूर कहलाये. इन मेहनतकश मजदूरों ने ही अपने श्रम से यहां की धरती को हरा-भरा और उपजाऊं बनाया.

मॉरीशस के निर्माण और तरक्की में बिहर से आये मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है. मोदी ने मॉरीशस के प्रवासी बिहारियों से अगले साल जनवरी में वाराणसी में आयोजित होने वाले "प्रवासी भारतीय दिवस" समारोह में शिरकत करने की अपील करते हुए कहा कि उसका उद्घाटन मॉरीशस के राष्ट्रपति पी जगन्नाथ करेंगे. प्रवासी बिहारियों के अपने पुरखों से जीवंत संबंध स्थापित करने के लिए बिहार फाउंडेशन का मॉरीशस चैप्टर स्थापित किया जायेगा. संवाद के जरिये प्रवासी बिहारी अपने बिहार में रहने वाले परिजनों से सतत संबंध स्थापित रख सकेंगे.

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