पटना : कुलाधिपति कार्यालय से किया गया जवाब तलब
Updated at : 28 Sep 2018 8:40 AM (IST)
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संबद्धता से पहले बीएड में नामांकन लेने का मामला पटना : पटना हाई कोर्ट ने सूबे कुलाधिपति (राज्यपाल) कार्यालय से सप्ताह के अंदर यह जानकारी देने को कहा है कि कहीं एफिलिएशन के पहले ही बीएड कॉलेजों ने सीईटी में सफल छात्रों का सत्र 2018-20 के लिए एडमिशन तो नहीं ले लिया है. न्यायाधीश चक्रधारी […]
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संबद्धता से पहले बीएड में नामांकन लेने का मामला
पटना : पटना हाई कोर्ट ने सूबे कुलाधिपति (राज्यपाल) कार्यालय से सप्ताह के अंदर यह जानकारी देने को कहा है कि कहीं एफिलिएशन के पहले ही बीएड कॉलेजों ने सीईटी में सफल छात्रों का सत्र 2018-20 के लिए एडमिशन तो नहीं ले लिया है.
न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ पीठ ने एसआरपी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज एवं अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. अदालत ने कुलाधिपति कार्यालय को यह बताने को कहा है कि 10 मई 2018 के बाद ऐसे कितने संबद्धता प्राप्त कॉलेज हैं जिन्होंने बी एड कोर्स में छात्रों का नामांकन अपने कॉलेजों में कर लिया है .दरअसल प्रदेश में पहली बार प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बीएड कॉलेजों में नामांकन लिया गया है .
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत किसी भी कॉलेज में छात्रों का नामांकन संबद्धता एवं मान्यता मिलने के बाद लेना है. किसी भी छात्र का नामांकन नौ महीने पूर्व नहीं लिया जा सकता . सुनवाई के दौरान नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी की तरफ से अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह ने बताया कि करीब 61 हजार छात्र सफल घोषित किये गए थे .
उन्ही सफल छात्रों में से 340 बी एड कॉलेजों में नामांकन लिया जाना था. अधिसंख्य कॉलेज द्वारा कट ऑफ डेट के पहले ही एडमिशन कर लिया. फुलवारी शरीफ में स्थित इस्लामिया टीटी बीएड (अल्पसंख्यक ) कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट से अपवाद के रूप में बड़ी राहत मिल गयी थी .उस कॉलेज को सेल्फ एडमिशन प्रोसेस से नामांकन लेने की छूट दे दी गयी थी. हालांकि हाईकोर्ट ने भी कुछ अल्पसंख्यक कॉलेजों को सफल हुए छात्रों में अपनी चॉइस से नामांकन लेने की छूट दे दी थी .
बर्बाद होगा छात्रों का साल
मालूम हो कि राज्य में पहली बार सीईटी के माध्यम से बीएड कॉलेजों में नामांकन कि प्रक्रिया शुरू की गयी है. नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी को नोडल यूनिवर्सिटी बनाया गया है.
बीएड के लिए आयोजित किये गये परीक्षा के करीब 61 हजार छात्रों को सफल घोषित किया गया. नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण 15 हजार छात्रों का नामांकन नहीं हो पाया है. अगर संबद्धता के पूर्व नामांकित किये गये छात्रों का नामांकन गलत हुआ, तो छात्रों का साल बर्बाद हो जायेगा.
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