पटना : कार-टी सेल से ब्लड कैंसर का इलाज

Updated at : 20 Aug 2018 9:24 AM (IST)
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पटना : कार-टी सेल से ब्लड कैंसर का इलाज

दो दिवसीय ईस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप के छठे वार्षिक सम्मेलन का समापन पटना : बिहार सहित देश में हर वर्ष करीब 10 लाख नये कैंसर रोगी मिल रहे हैं. इनमें दो फीसदी ब्लड कैंसर के होते हैं. अकेले पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में हर साल 400 से अधिक ब्लड कैंसर के मरीज आते […]

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दो दिवसीय ईस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप के छठे वार्षिक सम्मेलन का समापन
पटना : बिहार सहित देश में हर वर्ष करीब 10 लाख नये कैंसर रोगी मिल रहे हैं. इनमें दो फीसदी ब्लड कैंसर के होते हैं. अकेले पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में हर साल 400 से अधिक ब्लड कैंसर के मरीज आते हैं, जो मरीज बीमारी के शुरुआती दौर में आते हैं उनका इलाज कर उन्हें बचाया जाता है. वहीं जो अंतिम स्टेज व गंभीर स्थिति में आते हैं उनको बचा पाना मुश्किल हो जाता है.
यह बात आईजीआईएमएस कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ राजेश कुमार ने दो दिवसीय इस्ट ऑन्कोलॉजी ग्रुप के छठे वार्षिक सम्मेलन के समापन के मौके पर कही. इस मौके पर उन्होंने आईजीआईएमएस के तीन मरीजों को बुलाकर उदाहरण दिया. डॉ राजेश ने बच्चेदानी, फेफड़े, ब्लड कैंसर के बारे में विस्तार से चर्चा की.
कार-टी सेल कारगर उपाय : मुंबई से आये डॉ विक्रम चौधरी ने बताया कि बच्चों से लेकर बड़ों तक में होने वाले ब्लड कैंसर के मामले अधिक आ रहे हैं. अब इस बीमारी से निपटना आसान होगा, क्योंकि अब डॉक्टरों ने कार टी-सेल से बीमारी का इलाज करना शुरू कर दिया है. कार-टी सेल की
डोज कैंसर सेल्स को खत्म करने में सक्षम होती है और इससे बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. उन्होंनेकहा कि अमेरिका में हाल में ही कार-टी सेल पर हुए शोध में अच्छे परिणाम मिले हैं. ल्यूकीमिया, लिंफोमा ब्लड कैंसर के मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल किया गया है और इसमें 90 फीसदी परिणाम अच्छे मिले हैं. यह एक लिविंग ड्रग है.
एंटीबॉडी देकर खत्म होगा कैंसर सेल : पीएमसीएच के कैंसर रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ पीएल पंडित ने कहा कि पीएमसीएच में कोबॉल्ट मशीन की सुविधा शुरू होने से मरीजों को इसका पूरा लाभ मिल रहा है. वहीं उन्होंने बताया कि वयस्कों में होने वाले एएलएल ब्लड कैंसर के इलाज की नयी संभावनाओं पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि इम्युनथेरेपी और सेल्युलर थेरेपी में एंटीबॉडी तकनीक है. इसमें रोगी के शरीर में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्ट कर दिया जाता है.
यह एंटीबॉडी इम्युनिटी सेल व कैंसर सेल के बीच ब्रिज का काम करता है. यानी कि इम्युनिटी सेल के समक्ष कैंसर सेल को ला देता है. इम्युनिटी सेल कैंसर कोशिका को खत्म कर देता है. कार्यक्रम में आईजीआईएमएस की डॉ ऋचा माधवी सहित 300 से अधिक कैंसर रोग विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे.
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