अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मल्टीप्लेक्स में काटी जा रही दर्शकों की जेब

Updated at : 27 Jul 2018 5:33 AM (IST)
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अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मल्टीप्लेक्स में काटी जा रही दर्शकों की जेब

पटना : मल्टीप्लेक्स में मुनाफाखोरी की मानसिकता हावी है. मल्टीप्लेक्सों में मूवी देखने जा रहे लोगों काे जबरन खाने-पीने की वस्तुएं खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है. नियम कायदे के नाम पर की जा रही लूट का सबसे अधिक शिकार युवा हो रहे हैं. अलबत्ता यह बात किसी से छिपी नहीं है कि […]

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पटना : मल्टीप्लेक्स में मुनाफाखोरी की मानसिकता हावी है. मल्टीप्लेक्सों में मूवी देखने जा रहे लोगों काे जबरन खाने-पीने की वस्तुएं खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है.
नियम कायदे के नाम पर की जा रही लूट का सबसे अधिक शिकार युवा हो रहे हैं. अलबत्ता यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मल्टीप्लेक्स में बाजार से कई गुना अधिक कीमत पर खाने-पीने की वस्तुओं बेचने का कारोबार चल रहा है. जानकारी के मुताबिक एक लीटर पानी की बोतल 70 रुपये में बेची जा रही है. यहां एक समोसे की कीमत 50 रुपये तक वसूली जा रही है.
दरअसल खाने-पीने की चीजों को यहां ले जाना भी संभव नहीं है, क्योंकि फिल्म देखने आने वाले लोगों की सघन जांच की जाती है. प्रभात खबर ने गुरुवार को सिनेमाघरों व मॉलों की मनमानी को लेकर खबर प्रकाशित की थी. उसी क्रम में टीम ने गुरुवार को सिनेमाघर में आनेवाले लोगों से इस मुद्दे पर बात की दर्शकों ने मुनाफे के नाम पर की जा रही वसूली को गलत ठहराया.
50 रुपये में एक समोसा तो 70 रुपये में बिक रही है पानी की एक बोतल
हम लोग कभी-कभी सिनेमा देखने आते हैं. टिकट की कीमत ही काफी है. ऊपर से कोई खाने की चीज खरीद लेते हैं, तो पूरा बैलेंस बिगड़ जाता है. पानी से कोल्ड ड्रिंक तक की कीमत अधिक है.
—राधे मोहन, छात्र, बाकरगंज
जब से मल्टीप्लेक्स का चलन हुआ है. अंदर खाने के सामानों की कीमत अधिक वसूली जा रही है. प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए. बाहर से भी खाने के समान को ले जाने देना चाहिए.
—संतोष कुमार, मीठापुर
टिकट के दाम तीन सौ रुपये तक पहुंच चुके हैं. अगर आप अंदर कोई भी सामान खरीदते हैं, तो आप को पांच गुना कीमत देनी पड़ती है. दो-तीन लोग साथ आते हैं, तो हजार रुपये से अधिक का खर्च लग जाता है. आम आदमी के लिए यह काफी मुश्किल है.
कई छोटे सिनेमा घर बंद हो गये, मजबूरन जब कभी कोई अच्छी फिल्म लगती है, तो मल्टीप्लेक्स में जाना पड़ता है. ऐसे में एक माह का पूरा बजट बिगड़ जाता है.
—कौशल गुप्ता, गांधी मैदान
इस पर तो सरकार या प्रशासन को जांच अभियान चलाना चाहिए. इतनी अधिक कीमत वसूलना कहीं से भी उचित नहीं है. यह आम आदमी का शोषण है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है.
—विकास कुमार, बोरिंग रोड
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