बिहार ने दुनिया को बताया था मुद्रा का महत्व

Updated at : 22 Jul 2018 3:55 AM (IST)
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बिहार ने दुनिया को बताया था मुद्रा का महत्व

पटना : बिहार संग्रहालय में भारतीय मुद्रा की यात्रा प्रदर्शनी समारोह के तहत शनिवार को भी व्याख्यान अायोजित किया गया. व्याख्यान के दूसरे दिन सिक्कों के बिहारी मूल के दिल्ली निवासी संग्राहक मित्रेश सिंह ने कहा कि बिहार वह भूमि थी जिसने दुनिया को मुद्रा का महत्व बताया था. बिहार में ही सबसे पहले मगध […]

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पटना : बिहार संग्रहालय में भारतीय मुद्रा की यात्रा प्रदर्शनी समारोह के तहत शनिवार को भी व्याख्यान अायोजित किया गया. व्याख्यान के दूसरे दिन सिक्कों के बिहारी मूल के दिल्ली निवासी संग्राहक मित्रेश सिंह ने कहा कि बिहार वह भूमि थी जिसने दुनिया को मुद्रा का महत्व बताया था. बिहार में ही सबसे पहले मगध काल में अपने शानदार काल के दौरान आहत सिक्कों का कांसेप्ट दिया था जिसमें चांदी को पिघलाकर पंच मार्क सिक्के बनाये जाते थे.
सिक्कों के विद्वान अमृतेश आनंद ने भारतीय कागजी मुद्रा के सफर पर अपना व्‍याख्‍यान दिया. इस दौरान म्यूजियम के डायरेक्‍टर युसूफ भी मौजूद थे. उन्‍होंने बताया कि कागजी मुद्रा आपसी विश्वास और समझ का बेहतरीन नमूना है.
म्यूजियम के डायरेक्‍टर युसूफ ने बताया कि कागजी मुद्रा की शुरुआत सनारा द्वारा हुई फिर चेक बांड्स आदि मुद्रा के आदान प्रदान का माध्यम बनी. कागजी मुद्रा, जिसे नोट कहते हैं. यह बैंकों द्वारा जारी किया जाने लगा. कागजी मुद्रा के प्रचलन में अधिकता आने पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड का विकास हुआ, जिससे मुद्रा साथ लेकर चलने की बाध्यता समाप्त हो गयी और अब इलेक्ट्रॉनिकल मनी ट्रांसफर होने लगा.
इंदौर के गिरिश भामा ने कहा कि भारतीय मुद्राओं की प्राचीनता अभी भी अनंत गहराइयों में छुपी है, जिनका अनुसंधान लगातार जारी है. बिहार संग्रहालय में आमंत्रित इस प्रदर्शनी में मेरी और पत्नी इदबाला भामा द्वारा प्रस्‍तुत सिक्का अत्यंत दुलर्भ और उत्कृष्ट है. भारत में सिक्कों का इतिहास काफी पुराना है.
सातवाहन सिक्के जो चांदी, तांबा, कांसा, सीसा मिश्रित धातुओं द्वारा निर्मित है, वो अत्यंत सुंदर है. गजलक्ष्मी सिक्के विदर्भ, उज्जैन एवं दक्षिण भारत के राजाओं द्वारा प्रचलित किये गये थे. नर्मदा घाटी सभ्यता के करूपरिका गणराज्य के सिक्के कांस्य धातु से निर्मित थे. मौके पर पटना के संग्रहालीय सहायक डॉ विशि उपाध्यय ने बिहार संग्रहालय में भारतीय मुद्रा की स्वर्णिम यात्रा, कौड़ी से क्रेडिट कार्ड तक की प्रदर्शनी की गयी.
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