पटना : ड्यूटी पुलिस मेस में, खाना बना रहे साहब के घर
Author Prabhat khabar digital desk
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कई अधिकारी तो दूसरे प्रांत में रह रहे अपने परिजन की सेवा में लगा रखे हैं चतुर्थ श्रेणी कर्मी को पटना : बिहार पुलिस में आॅल इस वेल नहीं है. बड़े- बड़े अधिकारी विभाग के झाडूकस, रसोइया, जलवाहक, धोबी, नाई और स्वीपरों से घरेलू कार्य करा रहे हैं. कागजों में ड्यूटी मेस और पुलिस बैरक […]
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कई अधिकारी तो दूसरे प्रांत में रह रहे अपने परिजन की सेवा में लगा रखे हैं चतुर्थ श्रेणी कर्मी को
पटना : बिहार पुलिस में आॅल इस वेल नहीं है. बड़े- बड़े अधिकारी विभाग के झाडूकस, रसोइया, जलवाहक, धोबी, नाई और स्वीपरों से घरेलू कार्य करा रहे हैं.
कागजों में ड्यूटी मेस और पुलिस बैरक में दर्शायी जा रही है, लेकिन काम आवास पर लिया जा रहा है. सरकारी कर्मचारियों से बेगार कराने वालों में पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी तक शामिल हैं. सरकार इस मामले की जांच करे तो वित्तीय घोटाला सामने आ सकता है.
पुलिस विभाग में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारी (रसोइया, जलवाहक, नाई, धोबी, झाडूकश, सईस आदि ) का काम पुलिस फोर्स के मैस, बैरक, थाना अथवा पुलिस बल की तैनाती वाले स्थान पर सेवा देना है. ऐसा हो नहीं रहा है. पुलिस में इन कर्मचारियों से बेगार लेने की परंपरा इतनी बढ़ गयी है कि इसके विरोध में 25 से 27 जून तक हड़ताल भी हो गयी.
बिहार पुलिस चतुर्थ कर्मचारी संघ के राज्याध्यक्ष रामानुज राय कहते हैं कि मुख्यमंत्री-मुख्य सचिव तक को शिकायत भेज चुके हैं कि अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही बेगारी प्रथा को खत्म किया जाये. पुलिस के बड़े अधिकारी से लेकर सार्जेंट जैसे नीचे स्तर तक के कर्मचारी बेगारी करा रहे हैं. इन्कार करने पर कार्रवाई कर दी जाती है.
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