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पटना : आपातकाल के कारण बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाये थे सुशील मोदी

Updated at : 26 Jun 2018 6:48 AM (IST)
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पटना : आपातकाल के कारण बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाये थे सुशील मोदी

पटना : आपातकाल के दिनों में हुए जुल्म को याद कर जेपी आंदोलन के सेनानी अब भी सिहर उठते हैं. उनके स्मृतियों में अब भी कई बाते हैं. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी जेपी आंदोलन के अग्रणी सेनानी थे. अपनी बहन की शादी में भी वे नहीं पहुंच पाये थे. शादी में शामिल होने के लिए […]

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पटना : आपातकाल के दिनों में हुए जुल्म को याद कर जेपी आंदोलन के सेनानी अब भी सिहर उठते हैं. उनके स्मृतियों में अब भी कई बाते हैं. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी जेपी आंदोलन के अग्रणी सेनानी थे. अपनी बहन की शादी में भी वे नहीं पहुंच पाये थे.
शादी में शामिल होने के लिए उन्हें पैरोल मिला था लेकिन हजारीबाग के उपायुक्त ने मारपीट कर उन्हें फिर से जेल में बंद कर दिया. इस घटना को लेकर उन्होंने राज्यपाल को और शादी में शामिल नहीं होने पर बहन को पत्र लिखा था. दोनों पत्र आज भी चर्चित हैं.
राज्यपाल को लिखे पत्र में मोदी ने कहा था कि तीन जुलाई 1975 को मीसा में गिरफ्तार पहले दरभंगा के बाद हजारीबाग केंद्रयी ‍ कारा में रखा गया था. राज्य सरकार ने मुझे बहन की शादी में सम्मिलित होने के लिए 15 फरवरी को 21 दिन के पेरोल पर रिहा किया.
15 फरवरी को जेल से मुक्त होते ही जेल की समस्याओं से जिलाधिकारी को अवगत कराने के लिए हजारीबाग के उपायुक्त दुर्गा शंकर मुखोपाध्याय के बंगले पर पहुंचा. मैंने उनके समीप जाकर कहा कि मैं जेल से पेरोल पर रिहा होकर आया हूं और आपसे एक मिनट बात करना चाहता हूं.
मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि उपायुक्त ने मुझे मारना शुरू कर दिया. मैं अवाक रह गया. मैंने बार-बार उनसे आग्रह किया कि सर कल बहन की शादी है छोड़ दीजिए मैंने कौन सा अपराध किया है.
मुक्कों से पीटने के बाद मुझे घसीट कर बगल के कमरे में ले गये. मैं अधमरा सा हो चुका था. जब होश आया तो देखा कि पुलिस पहुंच गयी है. मालूम हुआ कि उपायुक्त के किसी सहायक कर्मचारी के नाम से एक झुठा एफआईआर मेरे विरुद्ध दर्ज की गयी है. मुझे पुन: गिरफ्तार कर थाने के हाजत में बंद कर दिया गया. इधर, मोदी ने 22 जनवरी 1976 को अपनी बहन उषा को पत्र लिखा था.
बहन उषा को संबोधित पत्र में मोदी ने लिखा था कि संध्या के सात बज रहे हैं. तुम्हारा जीवन साथी द्वार पर आ चुका होगा. शहनाई बज रही होगी. सारा घर परिवार के सदस्यों मित्र परिजनों से भरा होगा. कल तुम अपने नये घर में चली जाओगी. ऐसी मंगल बेला में तुम्हारा एक भाई इस कार्य में सहयोगी नहीं हो सका.
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