वेलेंटाइन डे पर उठी ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की मांग,पढ़ें
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Feb 2018 5:35 PM
पटना : आज वेलेंटाइन डे के साथ-साथ बिहार की एक ऐसी महानआत्मा का जन्मदिन है, जिसने पत्नी के प्यार में पहाड़ का सीना चीर डाला था. जी हां, बात दशरथ मांझी की हो रही है. आज उनके जन्मदिन पर उन्हें याद किया गया. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने […]
पटना : आज वेलेंटाइन डे के साथ-साथ बिहार की एक ऐसी महानआत्मा का जन्मदिन है, जिसने पत्नी के प्यार में पहाड़ का सीना चीर डाला था. जी हां, बात दशरथ मांझी की हो रही है. आज उनके जन्मदिन पर उन्हें याद किया गया. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इस मौके पर उनकी तस्वीर को श्रद्धा सुमन अर्पित की और सरकार से उन्हें भारत रत्न देने की मांग की. मांझी ने कहा कि वह पूरे बिहार के साथ, विश्व के लोगों के लिए प्रेरणा के श्रोत हैं.
जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का आज भी मलाल है कि उनके जीवन पर कई फिल्में बनी डॉक्यूमेंट्री बनी, लेकिन उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला. मांझी ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए. दशरथ मांझी का जन्मआजही के दिन 1934मेंहुआ था. बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे. केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली. कहा जाता है कि 22 वर्षों परिश्रम के बाद, दशरथ के बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को 55 किमी से 15 किलोमीटर कर दिया.
दशरथ मांझी एक बेहद पिछड़े इलाके से आते थे और दलित जाति से थे. शुरुआती जीवन में उन्हें अपना छोटे से छोटा हक मांगने के लिए संघर्ष करना पड़ा. वे जिस गांव में रहते थे वहां से पास के कस्बे जाने के लिए एक पूरा पहाड़ गहलोर को पार करना पड़ता था. उनके गांव में उन दिनों न बिजली थी, न पानी. ऐसे में छोटी से छोटी जरूरत के लिए उस पूरे पहाड़ को या तो पार करना पड़ता था या उसका चक्कर लगाकर जाना पड़ता था. उन्होंने फाल्गुनी देवी से शादी की. दशरथ मांझी को गहलौर पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का जुनून तब सवार हुया, जब पहाड़ के दूसरे छोर पर लकड़ी काट रहे अपने पति के लिए खाना ले जाने के क्रम में उनकी पत्नी फगुनी पहाड़ के दर्रे में गिर गयी और उनका निधन हो गया. यह बात उनके मन में घर कर गयी. इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले दम पर पहाड़ के बीचों-बीच से रास्ता निकलेगा और अतरी व वजीरगंज की दूरी को कम करेगा. दशरथमांझी का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में पित्ताशय के कैंसर से पीड़ित मांझी का 73 साल की उम्र में, 17 अगस्त 2007 को निधन हो गया था.
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