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चारा घोटाला फैसला : लालू के गांव व ससुराल में पसरा सन्नाटा, जगन्नाथ मिश्र के परिवार में छायी खुशी

Updated at : 24 Dec 2017 10:43 AM (IST)
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चारा घोटाला फैसला : लालू के गांव व ससुराल में पसरा सन्नाटा, जगन्नाथ मिश्र के परिवार में छायी खुशी

पटना : शनिवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड का नजारा बदला-बदला दिख रहा था. हर दिन चहल-पहल रहनेवाले इस बंगले पर सुबह से ही सन्नाटा पसरा हुआ था. यह दिन लालू परिवार के लिए खास था. रांची की सीबीआई कोर्ट द्वारा लालू प्रसाद को लेकर पशुपालन घोटाले को लेकर […]

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पटना : शनिवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड का नजारा बदला-बदला दिख रहा था. हर दिन चहल-पहल रहनेवाले इस बंगले पर सुबह से ही सन्नाटा पसरा हुआ था. यह दिन लालू परिवार के लिए खास था. रांची की सीबीआई कोर्ट द्वारा लालू प्रसाद को लेकर पशुपालन घोटाले को लेकर फैसला आनेवाला था. इसको लेकर राजद सुप्रीमो शुक्रवार को ही पटना से रांची पहुंच गये थे.

इधर आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव रांची में होनेवाली एक एक घटना पर नजर बनाये हुए थे. दोपहर 3.50 बजे रांची कोर्ट के फैसला आने के बाद 10 सर्कुलर रोड़ के बाहर मायूसी छा गयी. लालू प्रसाद के सजा सुनाये जाने के अविलंब बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह, विधायक भाई वीरेंद्र और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी राबड़ी देवी से मिलने उनके आवास पहुंचे.

तेजस्वी ने मंदिर जाकर की पूजा
सुबह से ही लालू प्रसाद के आवास पर पूजा-अनुष्ठान का आयोजन भी किया जाता रहा. तेजस्वी ने खुद मंदिर जाकर पूजा की. दोपहर लगभग तीन बजे बड़हरा के राजद विधायक सरोज यादव पहुंचे. उसके बाद राजद कार्यकर्ताओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ. छात्र राजद के अध्यक्ष आकाश यादव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचने लगे.

लालू हमलोगों के भगवान : राजद कार्यकर्ता
न्यायालय द्वारा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को दोषी करार दिये जाने पर राजद कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजद का एक-एक कार्यकर्ता लालू है. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद हमलोगों के भगवान हैं. हाथ में लालू प्रसाद की तस्वीर लेकर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता 10 सर्कुलर रोड स्थित लालू-राबड़ी आवास के बाहर जमे रहे. चारा घोटाला मामले को लेकर शुक्रवार को लालू अपने छोटे पुत्र व नेता विरोधी दल तेजस्वी यादव के साथ रांची गये थे. कोर्ट के फैसले को लेकर राबड़ी चिंतित थी, लेकिन कल से लेकर आज तक वे सारी चीजों की जानकारी लेती रही.

कार्यकर्ताओं ने लालू की तस्वीर लेकरबनायी मानव श्रृंखला
चारा घोटाले में कोर्ट द्वारा लालू प्रसाद को दोषी करार दिये जाने के खिलाफ राजद कार्यकर्ताओं ने आवास के बाहर मानव शृंखला बनायी. राजद कार्यकर्ता हाथ में लालू की तस्वीर लेकर मानव शृंखला बनायी. कार्यकर्ताओं ने नीतीश और मोदी सरकार के खिलाफ नारा लगाते रहे.

लालू के गांव फुलवरिया और ससुराल में छायी मायूसी
सीबीआई के विशेष कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिया, जिसके बाद उनके पैतृक गांव फुलवरिया में मातम छा गया. लोगों के चेहरे की रौनक फीकी पड़ गयी. सुबह से ही लालू को निर्दोष साबित कराने के लिए उनके परिजनों और ग्रामीणों द्वारा की जा रही पूजा-अर्चना भी काम नहीं आया. आखिरकार अदालत के इस फैसले के बाद लालू यादव को एक बार फिर सलाखों के पीछे जाना पड़ा .

इस घटनाक्रम को लेकर फुलवरिया और उनकी ससुराल में मातमी सन्नाटा पसर गया. गांव के लोग एक स्वर में लालू यादव को निर्दोष बतातें इसे केंद्र की साजिश करार दे रहे हैं. फैसले के दिन फुलवरियागांव में जगह जगह लोग टीवी पर चिपक कर पल पल की खबर लेते रहे.

पसरा सन्नाटा
फुलवरिया और उनकी ससुराल सेलार कला में सन्नाटा पसर गया. किसी को यह यकीन नहीं हो रहा था कि गांव के लाल को अब तीन जनवरी को सजा सुना दी जायेगी. लोग लालू यादव के पैतृक आवास पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी लेते और परिजनों को सांत्वना देते दिखे. लोगों का कहना था कि उन्हें ऊपरी अदालत से न्याय मिलेगा. सीबीआई केंद्र सरकार की कठपुतली बन गयी है. इसके कारण लालू को तंग किया जा रहा है.

जगन्नाथ मिश्र के परिवार में छायी खुशी
पटना. बहुचर्चित चारा घोटाले में सीबीआई कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र को बरी किये जाने पर पूरे परिवार में खुशी छा गयी. पिछले 21 साल से मुकदमा का सामना कर रहे परिवार को अब राहत मिली है. पटना में लालबहादुर शास्त्री नगर स्थित आवास संख्या 113/77बी में परिवार के लोगों से नहीं होने के कारण कोई चहल-पहल नहीं दिखी. पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र अपने पिता के साथ रांची चले गये थे. उनकी मां दिल्ली में रह रही है. सीबीआई कोर्ट द्वारा चारा घोटाले में बरी किये जाने पर उन्होंने सकून महसूस की.

बातचीत में कहा कि सत्य परेशान होता है, पराजित नहीं होता है. उन्होंने कहा कि उनके पिता ने मात्र तीन अनुशंसा पत्र लिखने का काम किये थे. जिस वजह से वे 21 साल से मुकदमा का सामना कर रहे थे. जनप्रतिनिधियों के लिए अनुशंसा पत्र लिखना सामान्य बात है. शनिवार को कोर्ट के निर्णय से ईश्वर व देश की न्याय व्यवस्था पर विश्वास और भी बढ़ गया.

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