बिहार : अस्पतालों के लेबर रूम में संक्रमण का खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Dec 2017 6:23 AM (IST)
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इलाज का खेल. कई वर्षों से यहां के लेबर रूम का नहीं हुआ अपग्रेडेशन आनंद तिवारी पटना : न्यू बाइपास एरिया में संचालित अस्पतालों के प्रसूति विभाग व लेबर रूम में संक्रमण का खतरा बना हुआ है. इन अस्पतालों में लेबर रूम बनने के बाद इनका अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. अस्पताल दिखने में बाहर से […]
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इलाज का खेल. कई वर्षों से यहां के लेबर रूम का नहीं हुआ अपग्रेडेशन
आनंद तिवारी
पटना : न्यू बाइपास एरिया में संचालित अस्पतालों के प्रसूति विभाग व लेबर रूम में संक्रमण का खतरा बना हुआ है. इन अस्पतालों में लेबर रूम बनने के बाद इनका अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. अस्पताल दिखने में बाहर से भले ही साफ-सुथरी दिखे, लेकिन लेबर रूम में उतनी ही गंदगी फैली रहती है.
पैसे की लालच में ये अस्पताल दो जच्चा-बच्चा को एक ही बिस्तर पर भर्ती कर देते हैं. लेबर रूम में संक्रमण की वजह से बिहार में मातृ मृत्युदर की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
साथ ही नवजात बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं. बावजूद स्वास्थ्य विभाग आज तक इन प्राइवेट अस्पतालों के लेबर रूम की जांच नहीं करती है. अगर जांच होती, तो एमसीआई के तय मानक का पता चल जाता. सूत्र के अनुसार प्राइवेट अस्पताल व स्वास्थ्य विभाग में बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की सांठ-गांठ की वजह से इन अस्पतालों की जांच नहीं हो रही है.
20 से अधिक अस्पतालों में नहीं हुआ अपग्रेडेशन
न्यू बाईपास एरिया के 12 किमी मेन रोड पर बने प्राइवेट अस्पतालों में 20 से अधिक ऐसे अस्पताल हैं, जो लेबर रूम के मानक का पालन नहीं कर रहे हैं. जबकि, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के मुताबिक लेबर रूम व ऑपरेशन थियेटर का हर 15 साल बाद अपग्रेडेशन होना जरूरी है.
अपग्रेडेशन में बेड, फर्श की टायल्स, फर्नीचर आदि सामान बदले जाने चाहिए. इतना ही नहीं, लेबर रूम को संक्रमण मुक्त बनाने के लिए ब्लीचिंग का घोल जरूरी है. अपग्रेडेशन नहीं होने से यहां डिलिवरी करानेवाली महिलाओं में संक्रमण का खतरा बन गया है.
लेबर रूम के लिए हैं 61 तरह के मानक
पीएमसीएच की स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की डॉ रजनी शर्मा ने बताया कि अस्पतालों के लेबर रूम के 61 तरह के मानक हैं. जिनमें आवश्यक वस्तु, दवाएं उपकरण आदि शामिल हैं. इन मानकों में संक्रमण से बचाव, डिलिवरी के बाद ब्लीडिंग को रोकने के इंतजाम, उक्त रक्तचाप हाइ रिस्क गर्भवती महिला की सुरक्षित डिलिवरी कराने के इंतजाम और संसाधन, समय से पूर्व की डिलिवरी के इंतजाम, सफाई, उपकरण, बेबी काॅर्नर सहित नवजात के लिए सुविधाएं, मशीनें व जटिल प्रसव की सुविधाएं सहित अन्य शामिल हैं.
बच्चे हो रहे संक्रमित, मातृ मृत्युदर अधिक
बिहार में जन्म लेनेवाले नवजात बच्चों में संक्रमण की बीमारियां अधिक देखने को मिलती है. यहां जन्म लेनेवाले 100 में 15 नवजात बच्चों में संक्रमण की बात सामने आयी है. इससे बच्चों में निमोनिया, डायरिया, वायरल आदि की समस्या देखने को मिलती है. इसके अलावा जन्म के बाद प्रसूता भी संक्रमण की चपेट में आ रही हैं. यही वजह है कि बिहार में मातृ मृत्युदर भी काफी अधिक हो गयी है. यहां हर साल 216 प्रसूताओं की मौत हर साल हो जाती है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है.
लेकिन नहीं हो रहा पालन
टेबुल पर पॉलीथिन बिछा होना जरूरी
प्रसव कक्ष में वेंटिलेटर होना चाहिए
बेबी काॅर्नर बना होना चाहिए
ब्लड निकालनेवाली सेक्शन मशीन होनी चाहिए
ऑक्सीजन सिलिंडर का होना आवश्यक
ठंड से बचाने को वार्मर जरूरी
लेबर रूम को संक्रमण मुक्त बनाने के लिए ब्लीचिंग का रोजाना घोल देना चाहिए
लेबर रूम का प्रभारी रोजाना निरीक्षण करे
लेबर रूम के आसपास मेडिकल कचरे का तत्काल निबटारा
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