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अाडवाणी को गिरफ्तार करने वाले इस पूर्व आइएएस अफसर को मोदी कैबिनेट में मिली जगह

Updated at : 03 Sep 2017 2:53 PM (IST)
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अाडवाणी को गिरफ्तार करने वाले इस पूर्व आइएएस अफसर को मोदी कैबिनेट में मिली जगह

नयी दिल्ली : केंद्रीय कैबिनेट में किए गये फेरबदल के तहत शामिल किएगये मंत्रियों में भाजपा सांसदआरकेसिंह का नाम भी शामिल है. जिन्होंने कभी कहा था कि संघ के लोग आतंकवाद से जुड़े हुए हैं. इतना ही नहीं,पूर्व नौकरशाह आरके सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी को भी गिरफ्तार करने का काम किया था. मोदी कैबिनेट के […]

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नयी दिल्ली : केंद्रीय कैबिनेट में किए गये फेरबदल के तहत शामिल किएगये मंत्रियों में भाजपा सांसदआरकेसिंह का नाम भी शामिल है. जिन्होंने कभी कहा था कि संघ के लोग आतंकवाद से जुड़े हुए हैं. इतना ही नहीं,पूर्व नौकरशाह आरके सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी को भी गिरफ्तार करने का काम किया था. मोदी कैबिनेट के नये मंत्री आरके सिंह बिहारके आरा से भाजपा सांसद है. मई 2014 के आम चुनाव में 16वीं लोकसभा के लिए वे यहां से चुने गये आरके सिंह ने रविवार को मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री की शपथ ली है.

आडवाणी को समस्तीपुर में किया गया थागिरफ्तार
आरके सिंह ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर निकले लालकृष्ण आडवाणी का रथ बिहार के समस्तीपुर में रोक लिया थाऔर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. उस दौरान आरके सिंह समस्तीपुर के जिलाधिकारी थे. जिसके बाद भाजपा ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और सरकार गिर गयी थी.

आतंकवाद पर कभी संघ को था घेरा
पूर्व आइएएस आरके सिंह ने केंद्रीय गृह सचिव पद पर रहते हुए 23 जनवरी 2013 के बयान दिया था कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि संदिग्ध आतंकी कभी न कभी संघ के कैंपों के साथ जुड़े रहे हैं. उन्होंने कहा था कि सुनील जोशी, संदीप डांगे, कमल चौहान और देवेंद्र गुप्ता जैसे दस संदिग्ध हैं जिनके संघ के साथ रिश्ते रहे हैं. उनके पासदस आतंकियों के आरएसएस से लिंक के सबूत हैं. उन्होंने समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव धमाके मेंआरएसएस से जुड़े संगठनों के लोगों के नाम सामने आने की बात कही थी. हालांकिभाजपा में शामिल होने के बाद आरके सिंह अपने इस बयान से पलट गये थेऔर कहा था कि ये विचार उनके नहीं, सरकार के थे.

2011 में केंद्रीय गृह सचिव बने थे आरके सिंह

1975 बैच के बिहार कैडर के आइएएस अधिकारी आरके सिंह को जून 2011 में केंद्रीय गृह सचिवकीजिम्मेदारी मिली थी.हालांकि दो साल बाद जून 2013 वे रिटायर हो गये थे. इसके बादवे भाजपा में शामिल हो गये थे. फिर 2014 में बिहार के आरा लोकसभा सेवे सांसदचुनेगयेऔर रविवार को मोदी सरकार में हुए फेरबदलमें उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली है.

सेवानिवृत्ति के बाद की राजनीतिक सफर की शुरुआत
पूर्व आइएएस अधिकारी आरके सिंह ने बिहार के कई जिलों में बतौर जिला अधिकारी के तौर पर अपना योगदान दियाथा. नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीतिक सफर का शुरुआत की और 64 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में शामिल हुए. इससे पूर्व भाजपा ने उन्हें सम्मान देते हुए पहली बार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की.

अहम पदों पर निभा चुके है दायित्व
बिहार के सुपौल जिले के मूल निवासी राजकुमार सिंह का जन्म बसबिट्टी गांव में हुआ था. दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई करने के बाद कानून में बैचलर डिग्री हासिल की और आगे की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड की आरवीबी ड्वेल्फ यूनिवर्सिटी चले गये. फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में बिहार कैडर के 1975 बैच के आइएएस अफसर बने. वह देश के महत्वपूर्ण पद पर अपना दायित्व निभा चुके हैं. आरके सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो उन्होंने अपना लोकसभा क्षेत्र आरा को बनाया. उनका ससुराल भोजपुर के बड़हरा ब्लॉक स्थित गजियापुर में पड़ता है.

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