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आइटीआर कम या कई गुना ज्यादा भरने वालों की जांच शुरू

Updated at : 07 Aug 2017 7:26 AM (IST)
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आइटीआर कम या कई गुना ज्यादा भरने वालों की जांच शुरू

पटना : आयकर रिटर्न (आइटीआर) दायर करने की अंतिम तारीख 5 अगस्त को समाप्त हो गयी है. इस दौरान वित्तीय वर्ष 2016-17 में जिन लोगों के टैक्स कटे या जिन्होंने टैक्स जमा किया, उसका पूरा लेखा-जोखा आयकर विभाग को जमा किया गया है. अब जितने लोगों ने आइटीआर जमा किया है, उसकी पूरी पड़ताल आयकर […]

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पटना : आयकर रिटर्न (आइटीआर) दायर करने की अंतिम तारीख 5 अगस्त को समाप्त हो गयी है. इस दौरान वित्तीय वर्ष 2016-17 में जिन लोगों के टैक्स कटे या जिन्होंने टैक्स जमा किया, उसका पूरा लेखा-जोखा आयकर विभाग को जमा किया गया है.
अब जितने लोगों ने आइटीआर जमा किया है, उसकी पूरी पड़ताल आयकर विभाग ने शुरू कर दी है. इसमें बड़े और मध्यम वर्ग के लोगों पर खासतौर से नजर रहेगी. एक वैसी श्रेणी के लोग हैं, जिसका टैक्स तो कट गया, लेकिन उन्होंने आइटीआर जमा नहीं किया है. इसकी मुख्य वजह जरूरत से कम या उसके अनुसार जमा नहीं करना है. दूसरा, कुछ लोगों ने पिछले साल की तुलना में ढाई गुना से ज्यादा का आइटीआर इस बार जमा किया है. ऐसे सभी श्रेणी के लोगों की स्क्रूटनी का काम शुरू कर दिया गया है.
जल्द ही ऐसे लोगों को चिह्नित करके इन्हें नोटिस भेजा जायेगा. इन्हें अपनी संपत्ति में हुई बेतहासा बढ़ोतरी का स्पष्ट कारण उल्लेख करना होगा. अगर कोई व्यक्ति स्पष्ट कारण बताने में नाकाम रहता है, तो उन्हें पेनाल्टी भी भरनी या इनकम टैक्स की कार्रवाई भी झेलनी पड़ सकती है. इस बार आयकर विभाग का मकसद है कि टैक्स में किसी तरह की गड़बड़ी करने वालों को छोड़ा नहीं जायेगा. जिन लोगों का ज्यादा टैक्स कटा है या उचित कारणों से टैक्स वापस होना है, उन्होंने तो बड़ी प्रमुखता से अपना आइटीआर दायर किया है.
परंतु टैक्स में गड़बड़ी करने वालों ने इसे दायर करने में थोड़ी लापरवाही बरती है. बीते वित्तीय वर्ष में नोटबंदी और शराबबंदी के बाद भी आयकर विभाग ने बिहार और झारखंड में अपने निर्धारित 10 हजार 600 करोड़ से कहीं ज्यादा 11 हजार 500 करोड़ टैक्स संग्रह किया था. इस टैक्स संग्रहण के आधार पर आइटीआर कितना दायर किया गया है. फिलहाल इसकी जांच भी विभागीय स्तर पर चल रही है.
हालांकि शुरुआती स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 90-95 फीसदी लोगों ने आइटीआर दायर कर दिया है. बीते वित्तीय वर्ष में बिहार और झारखंड में करीब 90 हजार नये टैक्स पेयर्स (जमाकर्ता) की संख्या बढ़ी है.
इन नवधनाढ्यों के आइटीआर पर भी खासतौर से नजर रहेगी. इसके अलावा ऐसे कई नये स्थानों से भी इस बार टैक्स संग्रह किये गये हैं, जो छूट जाते थे या इन स्थानों से टैक्स नहीं आ पाते थे. इन सेक्टर के टैक्स एसेस्मेंट पर खासतौर से नजर रहेगी.
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