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केड़िया के किसानों ने कृषि मंत्री को कृषि रोडमैप पर दिया फीडबैक

Updated at : 30 Jun 2017 5:35 PM (IST)
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केड़िया के किसानों ने कृषि मंत्री को कृषि रोडमैप पर दिया फीडबैक

पटना : जमुई जिले के किसानों के संगठन जीवित माटी किसान समिति, केड़िया के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री रामविचार राय से मुलाकात कर बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित तीसरे कृषि रोडमैप पर फीडबैक दिया. किसान प्रतिनिधियों ने कृषि रोडमैप में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए जैविक खेती के अनुभवों […]

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पटना : जमुई जिले के किसानों के संगठन जीवित माटी किसान समिति, केड़िया के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री रामविचार राय से मुलाकात कर बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित तीसरे कृषि रोडमैप पर फीडबैक दिया. किसान प्रतिनिधियों ने कृषि रोडमैप में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए जैविक खेती के अनुभवों को कृषि मंत्री के साथ साझा किया.

जीवित माटी किसान समिति जमुई के बरहट प्रखंड में स्थित केड़िया गांव के किसानों का संगठन है, जहां बिना किसी रासायनिक खाद व कीटनाशकों के जैविक कृषि के तहत ‘जीवित माटी’ का प्रयोग सफल हुआ है. जीवित माटी किसान समिति के अध्यक्ष आनंदी यादव ने कहा, ‘हमें इस बात की खुशी है कि तीसरे कृषि रोडमैप का मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी को बढ़ाने का बनाया गया है. इस रोडमैप में जैविक खेती को बढ़ावा देना एक प्रगतिशील कदम है. जैविक खेती से कृषि लागत में कमी आती है और खतरनाक रसायनों से मुक्त शुद्ध भोजन तो मिलता ही है, स्वस्थ पर्यावरण भी बनता है.’

प्रतिनिधि मंडल ने मांग की है कि रोडमैप के तहत चयनित गांवों और क्षेत्रों में बायोगैस, वर्मीबेड,पक्का पशुफर्श, नाद एवं मूत्र टैंक, इकोसैन शौचालय, कुआं-तालाब निर्माण, बकरी-मुर्गी पालन, पौधरोपण तथा जैविक खेती में प्रशिक्षण आदि कार्यक्रमों को एक समेकित जैविक खेती कार्यक्रम के तहत जोड़ा जाये और एक प्रखंडस्तरीय अधिकारी के अधीन किया जाये, ताकि किसानों को इनसे जुड़ने के लिए अलग-अलग विभागों में चक्कर न काटना पड़े.

जैविक खाद और कीट-प्रबंधन के जरिये कर रहे खेती

आनंदी यादव ने बताया, ‘पिछले कई बरसों से जमुई के केड़िया गांव में हम रसायनरहित खेती कर रहे हैं. रसायनों की जगह जैविक खाद और कीट-प्रबंधन के तरीके से खेती कर रहे हैं. हम स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल से जैविक खाद और कीट नियंत्रक दवाइयां बना कर खेतों में उनका उपयोग कर रहे हैं. मिट्टी में जैविक तत्वों की वृद्धि से हमारे खेतों की जल-संग्रहण क्षमता बढ़ रही है और कम पटवन से भी खेती संभव है. हमने महसूस किया है कि प्राकृतिक उत्पादनों के उपयोग से हमारी फसलों पर बीमारियों और हानिकारक कीटों के हमले काफी कम हुए हैं. साथ ही मौसमी उतार-चढ़ाव के कुप्रभावों से जूझने की क्षमता भी बढ़ी है.’किसानों के प्रतिनिधि मंडल में शामिल जीवित माटी किसान समिति के सचिव राजकुमार यादव ने बताया, ‘हमारे कई सुझावों को प्रस्तावित कृषि रोड मैप में शामिल किया गया है.’

कृषि मंत्री को दिये कई सुझाव

कृषि मंत्री को कई सुझाव दिये गये हैं. इनमें प्रत्येक प्रखंड में एक आदर्श जैविक ग्राम बनाने, वर्मीबेड की ऊंचाई 2.5 फीट से घटा कर 1.5 से 2 फीट करने, उसे ढंकने, बायोगैस के लिए लघु किसानों को 75 प्रतिशत और सीमांत किसानों के लिए 90 प्रतिशत सब्सिडी करने, पक्का पशुशेड, इकसैन शौचालय का निर्माण आदि शामिल करने के सुझाव दिये गये हैं.इसके अलावा सरकार को केड़िया के जीवित माटी मॉडल की तर्ज पर हर प्रखंड के कम-से-कम एक गांव को कुदरती खेती के आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है.इससे पहले समिति के किसानों ने अलग-अलग अधिकारियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात करके कृषि रोड मैप पर अपना फीडबैक दिया है. इस क्रम में किसानों ने कृषि वैज्ञानिक अनिल झा, सुधीर कुमार, प्रधान सचिव कृषि विभाग, श्रम संसाधन मंत्री श्री विजय प्रकाश से भी मुलाकात की है.

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