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Bihar News: कर्मचारी को लंबे समय तक सस्पेंड नहीं रखा जा सकता, जानें पटना हाइकोर्ट का फैसला...

Updated at : 31 Jan 2022 8:34 AM (IST)
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Bihar News: कर्मचारी को लंबे समय तक सस्पेंड नहीं रखा जा सकता, जानें पटना हाइकोर्ट का फैसला...

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी कर्मचारी या पदाधिकारी को जांच पूरी नहीं होने की स्थिति में लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अगर निर्धारित अवधि तक जांच पूरी नहीं की जाती है, तो निलंबन को हर हाल में रद्द करना होगा.

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पटना हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को लंबी अवधि के लिए निलंबित नहीं रखा जा सकता है. जस्टिस पीबी बजंथरी की एकलपीठ ने बक्सर जिले के राजपुर अंचल के निलंबित सीओ राकेश कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. राकेश कुमार ने इस याचिका में अपने निलंबन आदेश को चुनौती दी थी.

निर्धारित अवधि तक जांच पूरी नहीं होने पर निलंबन को रद्द करना होगा

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी कर्मचारी या पदाधिकारी को जांच पूरी नहीं होने की स्थिति में लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अगर निर्धारित अवधि तक जांच पूरी नहीं की जाती है, तो निलंबन को हर हाल में रद्द करना होगा. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो यह हाइकोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना मानी जायेगी. कोर्ट को याचिकाकर्ता ने बताया कि वह बक्सर जिले के राजपुर अंचल में सीओ के पद पर तैनात था.

विभाग ने लगाये गये आरोप की जांच नहीं की

सात अक्तूबर, 2016 को घूस लेने के आरोप में मुझे गिरफ्तार किया गया. इसके बाद मुझे निलंबित कर दिया गया. न्यायिक हिरासत से जमानत पर 23 मार्च, 2017 को रिहा होने के बाद मैंने अपना योगदान पटना के प्रमंडलीय आयुक्त के कार्यालय में 25 मार्च, 2017 को दिया था, लेकिन निलंबन रद्द नहीं किया गया. याचिकाकर्ता को 16 दिसंबर, 2016 को निलंबित किये जाने के बाद विभाग ने मुझ पर लगाये गये आरोप की जांच नहीं की .

कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अजय कुमार चौधरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में दिये गये निर्णय के आलोक में याचिकाकर्ता के निलंबन की समीक्षा करने का आदेश संबंधित अधिकारी को दिया है. कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के विरुद्ध शुरू किये गये अनुशासनात्मक करवाई को पूरा कर ले. इसी आदेश के साथ कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया.

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